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Bijnor News: सांसद चंद्रशेखर ने उठाए स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
नगीना। नगीना सांसद एवं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर ने दवाओं की कीमतों में भारी अंतर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद मरीजों को बेहतर उपचार नहीं मिलने का आरोप लगाया। सांसद ने अपनी पोस्ट में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने दवाओं की कीमतों में भारी अंतर के मामले में ‘दिनदहाड़े डकैती’, ‘नरसंहार’, ‘बर्बरता’ और ‘कत्लेआम’ जैसे गंभीर शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक है।
चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद मरीजों को दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है। उन्होंने निजी अस्पतालों की आड़ में करीब 200 मेडिकल स्टोर अवैध रूप से संचालित होने की बात सामने आने का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उच्चतम न्यायालय उत्तर प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को अपनी आंखों से देखता, तो इस बदहाली को परिभाषित करने के लिए कौन से शब्द इस्तेमाल करता। सांसद ने कहा कि यह केवल सरकारी व्यवस्था की नाकामी का मामला नहीं है, बल्कि मरीजों की जिंदगी और उनकी जेब, दोनों के साथ खिलवाड़ का गंभीर सवाल है।
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नगीना। नगीना सांसद एवं आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर ने दवाओं की कीमतों में भारी अंतर को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणियों का हवाला देते हुए उत्तर प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
सांसद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में संसाधनों की उपलब्धता के बावजूद मरीजों को बेहतर उपचार नहीं मिलने का आरोप लगाया। सांसद ने अपनी पोस्ट में कहा कि उच्चतम न्यायालय ने दवाओं की कीमतों में भारी अंतर के मामले में ‘दिनदहाड़े डकैती’, ‘नरसंहार’, ‘बर्बरता’ और ‘कत्लेआम’ जैसे गंभीर शब्दों का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति भी चिंताजनक है।
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चंद्रशेखर ने आरोप लगाया कि पर्याप्त संसाधन होने के बावजूद मरीजों को दूसरे अस्पतालों के लिए रेफर किया जा रहा है। उन्होंने निजी अस्पतालों की आड़ में करीब 200 मेडिकल स्टोर अवैध रूप से संचालित होने की बात सामने आने का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि उच्चतम न्यायालय उत्तर प्रदेश की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को अपनी आंखों से देखता, तो इस बदहाली को परिभाषित करने के लिए कौन से शब्द इस्तेमाल करता। सांसद ने कहा कि यह केवल सरकारी व्यवस्था की नाकामी का मामला नहीं है, बल्कि मरीजों की जिंदगी और उनकी जेब, दोनों के साथ खिलवाड़ का गंभीर सवाल है।
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