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Bijnor News: हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिर बढ़ी पंचायतों में सक्रियता
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कोतवाली देहात/बिजनौर। पंचायत चुनाव तीन माह में कराने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद ग्राम प्रधान बनने की तैयारी कर रहे दावेदार सक्रिय हो गए हैं। प्रधानों ने राज्य सरकार से तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने की मांग की है। उनका कहना है कि ग्राम पंचायतों में विकास कार्य सुचारु रूप से चलाने के लिए चुनाव जल्द कराना जरूरी है। वहीं, कार्ययोजनाओं की स्वीकृति नहीं मिलने से भी ग्राम प्रधानों में नाराजगी है।
अखिल भारतीय प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष सचिन मलिक ने बताया कि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प भी दिया है। सरकार को चुनाव शीघ्र कराने चाहिए।
सचिन मलिक ने कहा कि ग्राम प्रधान प्रशासक तो बन गए हैं, लेकिन जिलाधिकारी की ओर से डीपीआरओ के माध्यम से कार्ययोजनाओं को स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। पिछले चार महीने से एक भी कार्ययोजना स्वीकृत नहीं हुई है। इससे ग्राम पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और प्रधान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराए जाएं। साथ ही प्रशासकों को कार्ययोजनाओं की स्वीकृति देने का अधिकार भी दिया जाए, ताकि गांवों में विकास कार्य जारी रह सकें।
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ग्राम पंचायत केलनपुर के प्रधान प्रशासक राजीव चौधरी ने कहा कि पंचायत चुनाव तत्काल कराए जाने चाहिए। चुनाव को लेकर कई संभावित प्रत्याशियों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार जल्द से जल्द चुनाव कराने की मांग की।
ग्राम पंचायत बीबीपुर के प्रधान प्रशासक फिरोज आलम ने कहा कि पंचायत चुनाव शीघ्र होने चाहिए। चुनाव संपन्न होने के बाद ही ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को गति मिल सकेगी। ग्राम पंचायत जालबपुर गूदड की ग्राम प्रधान प्रशासक नंदनी राजपूत ने कहा कि न्यायालय के आदेश का स्वागत है। अभी पिछड़ा वर्ग आयोग को रिपोर्ट देने में लगभग दो महीने का समय लगेगा। उसके बाद पंचायत राज विभाग को आरक्षण प्रक्रिया में एक महीने का समय लगेगा। इसके बाद ही चुनाव कार्यक्रम लागू हो सकेगा, जिस कारण 3 महीने में चुनाव कराए जाने संभव नहीं है। सरकार व पंचायत राज विभाग अपने अनुसार जो भी निर्णय लेंगे वह स्वागत योग्य है।
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अखिल भारतीय प्रधान संगठन के जिलाध्यक्ष सचिन मलिक ने बताया कि हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का आदेश दिया है। हालांकि, कोर्ट ने इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करने का विकल्प भी दिया है। सरकार को चुनाव शीघ्र कराने चाहिए।
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सचिन मलिक ने कहा कि ग्राम प्रधान प्रशासक तो बन गए हैं, लेकिन जिलाधिकारी की ओर से डीपीआरओ के माध्यम से कार्ययोजनाओं को स्वीकृति नहीं मिल पा रही है। पिछले चार महीने से एक भी कार्ययोजना स्वीकृत नहीं हुई है। इससे ग्राम पंचायतों में विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं और प्रधान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उन्होंने मांग की कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराए जाएं। साथ ही प्रशासकों को कार्ययोजनाओं की स्वीकृति देने का अधिकार भी दिया जाए, ताकि गांवों में विकास कार्य जारी रह सकें।
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ग्राम पंचायत केलनपुर के प्रधान प्रशासक राजीव चौधरी ने कहा कि पंचायत चुनाव तत्काल कराए जाने चाहिए। चुनाव को लेकर कई संभावित प्रत्याशियों ने भी तैयारी शुरू कर दी है। उन्होंने हाई कोर्ट के आदेश के अनुसार जल्द से जल्द चुनाव कराने की मांग की।
ग्राम पंचायत बीबीपुर के प्रधान प्रशासक फिरोज आलम ने कहा कि पंचायत चुनाव शीघ्र होने चाहिए। चुनाव संपन्न होने के बाद ही ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों को गति मिल सकेगी। ग्राम पंचायत जालबपुर गूदड की ग्राम प्रधान प्रशासक नंदनी राजपूत ने कहा कि न्यायालय के आदेश का स्वागत है। अभी पिछड़ा वर्ग आयोग को रिपोर्ट देने में लगभग दो महीने का समय लगेगा। उसके बाद पंचायत राज विभाग को आरक्षण प्रक्रिया में एक महीने का समय लगेगा। इसके बाद ही चुनाव कार्यक्रम लागू हो सकेगा, जिस कारण 3 महीने में चुनाव कराए जाने संभव नहीं है। सरकार व पंचायत राज विभाग अपने अनुसार जो भी निर्णय लेंगे वह स्वागत योग्य है।