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कर्मचारियों को नहीं मिल रहा दुर्गम क्षेत्र का लाभ
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Thu, 09 Feb 2017 12:28 AM IST
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कालागढ़ में रामगंगा बांध परियोजना के कर्मियों को दुर्गम परियोजना पर काम करने की परिभाषा विभाग के अधिकारियों की उदासीनता के चलते बदल गई है। इसके चलते कर्मचारियों को दुर्गम क्षेत्र में काम करने का लाभ नहीं मिल रहा है। उधर, एनजीटी के आदेश आने के बाद परियोजना के कर्मियों का भविष्य भी उज्ज्वल नहीं दिख रहा है।
उत्तर प्रदेश की रामगंगा बांध परियोजना में रामगंगा नदी पर कालागढ़ की पहाड़ियों के बीच बांध बनाया गया है। बांध के साथ ही रामगंगा जल विद्युत गृह बना है। इसमें 66 मेगावाट क्षमता की तीन टरबाइन लगी हैं। इनसे बिजली बनाई जाती है। पूरी परियोजना के संचालन के लिए उत्तर प्रदेश ने 1960 के दशक में केंद्रीय कॉलोनी, नई कॉलोनी, हाइडिल कॉलोनी, प्राथमिक पाठशाला, इंटर कॉलेज, दो डाकघर, अस्पताल, बैंक, दो बाजार आदि की सुविधा कर्मियों को दी थी। बाद में विभाग ने परियोजना के दुर्गम क्षेत्र में होने को नकार दिया। इसके चलते परियोजना के हजारों आवासीय व अनावासीय भवन अवैध कब्जे की परिभाषा में आ गए। उन्हें हटाने की कवायद शुरू हो गई। वर्तमान मेें एनजीटी के आदेश आने पर यहां के दोनों बाजारों और नागरिकों के घरों पर संकट आ गया है। वन सीमा पर होने के कारण यहां के नागरिकों को बाजारों, यातायात, चिकित्सा, डाक, बैंक आदि की सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी। इस बारे मे विभाग का कोई भी अधिकारी न्यायालय का मामला होने के चलते कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। वहीं सिंचाई विभाग के कर्मचारी नेता सुरेश देवांतक का कहना है कि परियोजना के कर्मचारियों को पूर्व के समान सुविधाएं विभाग को देनी चाहिए।
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उत्तर प्रदेश की रामगंगा बांध परियोजना में रामगंगा नदी पर कालागढ़ की पहाड़ियों के बीच बांध बनाया गया है। बांध के साथ ही रामगंगा जल विद्युत गृह बना है। इसमें 66 मेगावाट क्षमता की तीन टरबाइन लगी हैं। इनसे बिजली बनाई जाती है। पूरी परियोजना के संचालन के लिए उत्तर प्रदेश ने 1960 के दशक में केंद्रीय कॉलोनी, नई कॉलोनी, हाइडिल कॉलोनी, प्राथमिक पाठशाला, इंटर कॉलेज, दो डाकघर, अस्पताल, बैंक, दो बाजार आदि की सुविधा कर्मियों को दी थी। बाद में विभाग ने परियोजना के दुर्गम क्षेत्र में होने को नकार दिया। इसके चलते परियोजना के हजारों आवासीय व अनावासीय भवन अवैध कब्जे की परिभाषा में आ गए। उन्हें हटाने की कवायद शुरू हो गई। वर्तमान मेें एनजीटी के आदेश आने पर यहां के दोनों बाजारों और नागरिकों के घरों पर संकट आ गया है। वन सीमा पर होने के कारण यहां के नागरिकों को बाजारों, यातायात, चिकित्सा, डाक, बैंक आदि की सुविधाएं नहीं मिल पाएंगी। इस बारे मे विभाग का कोई भी अधिकारी न्यायालय का मामला होने के चलते कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। वहीं सिंचाई विभाग के कर्मचारी नेता सुरेश देवांतक का कहना है कि परियोजना के कर्मचारियों को पूर्व के समान सुविधाएं विभाग को देनी चाहिए।
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