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वन्यजीवों को रोकने की कवायद शुरू
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वन्यजीवों को रोकने की कवायद शुरू
कालागढ़। कार्बेट टाइगर रिजर्व व नेशनल पार्क के वनों से वन्यजीवों को आबादी में आने से रोकने के लिए कार्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बायो फैंसिंग की कवायद शुरू कर दी है। कालागढ़ उपखंड के ढेला गांव का इसके लिए चयन किया गया है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व की दक्षिणी सीमा पर उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर की सीमा लगती है। जंगली जानवर सीमा पर बसे गांवों के खेतों में प्रवेश कर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं मानव वन्यजीव संघर्ष का खतरा भी बना रहता है। वन विभाग की ओर से बायोफैंसिंग की सबसे पहले कालागढ़ उपखंड के ढेला गांव से शुरूआत की जाएगी। इसके लिए वनों की सीमा पर मौन पालन किया जाएगा, जिससे वन्यजीव इस इलाके में आने से डरेंगे। इससे फसलों की भी सुरक्षा हो सकेगी।
पंतनगर विवि से मिलेगा खास प्रशिक्षण
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. धीरज पांडेय ने बताया कि बायो फैंसिंग के लिए मौन पालन किया जाएगा। ढेला गांव व सावल्दे को सबसे पहले चरण में लिया जा रहा है। इसके लिए बाकायदा खास प्रशिक्षण पंतनगर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से ग्रामीणों को दिलाया जाएगा। बाद में अन्य स्थानों पर भी मौन पालन किया जाएगा। इस पहल से सीमावर्ती लोगों को राहत मिलेगी और ग्रामीणों को रोजगार भी मिलेगा।
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कालागढ़। कार्बेट टाइगर रिजर्व व नेशनल पार्क के वनों से वन्यजीवों को आबादी में आने से रोकने के लिए कार्बेट टाइगर रिजर्व प्रशासन ने बायो फैंसिंग की कवायद शुरू कर दी है। कालागढ़ उपखंड के ढेला गांव का इसके लिए चयन किया गया है।
कार्बेट टाइगर रिजर्व की दक्षिणी सीमा पर उत्तर प्रदेश के जनपद बिजनौर की सीमा लगती है। जंगली जानवर सीमा पर बसे गांवों के खेतों में प्रवेश कर फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं, वहीं मानव वन्यजीव संघर्ष का खतरा भी बना रहता है। वन विभाग की ओर से बायोफैंसिंग की सबसे पहले कालागढ़ उपखंड के ढेला गांव से शुरूआत की जाएगी। इसके लिए वनों की सीमा पर मौन पालन किया जाएगा, जिससे वन्यजीव इस इलाके में आने से डरेंगे। इससे फसलों की भी सुरक्षा हो सकेगी।
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पंतनगर विवि से मिलेगा खास प्रशिक्षण
कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक डॉ. धीरज पांडेय ने बताया कि बायो फैंसिंग के लिए मौन पालन किया जाएगा। ढेला गांव व सावल्दे को सबसे पहले चरण में लिया जा रहा है। इसके लिए बाकायदा खास प्रशिक्षण पंतनगर विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों से ग्रामीणों को दिलाया जाएगा। बाद में अन्य स्थानों पर भी मौन पालन किया जाएगा। इस पहल से सीमावर्ती लोगों को राहत मिलेगी और ग्रामीणों को रोजगार भी मिलेगा।
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