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Bijnor News: आदमी के दर्द को बयां करतीं हैं दुष्यंत की गजलें
Sun, 31 Aug 2025 11:53 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sun, 31 Aug 2025 11:53 PM IST
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नजीबाबाद-साहित्यकार दुष्यंत कुमार (फाइल फोटो)।
नजीबाबाद। यहां तक आते-आते सूख जातीं हैं कई नदियां, मुझे मालूम है पानी कहां ठहरा हुआ होगा, रहनुमाओं की अदाओं पे फिदा है दुनिया, इस बहकती हुई दुनिया को संभालो यारों... सरीखीं पंक्तियां गजलकार दुष्यंत कुमार की याद को ताजा करती हैं। आज उनका जन्म दिन है।
नजीबाबाद तहसील के गांव राजपुर नवादा में एक सितंबर 1933 को जन्मे साहित्यकार दुष्यंत कुमार ने हिंदी गजल को नया आयाम देकर जन-जन तक पहुंचाया। सादा जीवन उच्च विचार के धनी हिंदी गजल के प्रणेता दुष्यंत कुमार की काव्य रचनाएं और गजलें समाज के दर्द, व्यवस्थाओं पर चोट और सामाजिक के इर्द-गिर्द के माहौल से जुड़ी होतीं थीं।
दुष्यंत कुमार की पंक्तियां हौले-हौले पांव हिलाओ, जल सोया है छेड़ो मत, हम सब अपने-अपने दीपक यहां सिराने आएंगे...आज भी लोगों की जुबान पर हैं। कैसे आकाश में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों.., मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए.., सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए.. यह वह पंक्तियां हैं जो गजलकार दुष्यंत कुमार की गंभीर सोच की कसौटी पर खरा उतरती हैं।
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करोड़ों की लागत से बनेगा संग्रहालय
साहित्यकार दुष्यंत कुमार की स्मृति में उनके आवास पर 5.66 करोड़ रुपये की लागत से शासन ने संग्रहालय बनाने का फैसला लिया। दुष्यंत कुमार के पुत्रों आलोक त्यागी और अपूर्व त्यागी ने संबंधित संपत्ति को संग्रहालय निर्माण के लिए सरकार के नाम दर्ज करा दिया। परिजन बताते हैं जल्द संग्रहालय निर्माण की प्रक्रिया होगी।
खटारा कार ने दिलाए मित्र
आकाशवाणी में कार्यरत रहे साहित्यकार दुष्यंत कुमार के बाल सखा रहे सत्य कुमार त्यागी का कहना था कि भोपाल से लंबा सफर तय कर दुष्यंत जब गांव राजपुर नवादा आया करते थे तो अपनी पुरानी फिएट कार लेकर आते थे। वे अक्सर कहा करते थे कि मैं अपनी पुरानी फिएट कार का शुक्र गुजार हूं जिसने रास्ते के सारे मिस्त्री मेरे मित्र बना दिए हैं।
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नजीबाबाद तहसील के गांव राजपुर नवादा में एक सितंबर 1933 को जन्मे साहित्यकार दुष्यंत कुमार ने हिंदी गजल को नया आयाम देकर जन-जन तक पहुंचाया। सादा जीवन उच्च विचार के धनी हिंदी गजल के प्रणेता दुष्यंत कुमार की काव्य रचनाएं और गजलें समाज के दर्द, व्यवस्थाओं पर चोट और सामाजिक के इर्द-गिर्द के माहौल से जुड़ी होतीं थीं।
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दुष्यंत कुमार की पंक्तियां हौले-हौले पांव हिलाओ, जल सोया है छेड़ो मत, हम सब अपने-अपने दीपक यहां सिराने आएंगे...आज भी लोगों की जुबान पर हैं। कैसे आकाश में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों.., मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही, हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए.., सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए.. यह वह पंक्तियां हैं जो गजलकार दुष्यंत कुमार की गंभीर सोच की कसौटी पर खरा उतरती हैं।
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करोड़ों की लागत से बनेगा संग्रहालय
साहित्यकार दुष्यंत कुमार की स्मृति में उनके आवास पर 5.66 करोड़ रुपये की लागत से शासन ने संग्रहालय बनाने का फैसला लिया। दुष्यंत कुमार के पुत्रों आलोक त्यागी और अपूर्व त्यागी ने संबंधित संपत्ति को संग्रहालय निर्माण के लिए सरकार के नाम दर्ज करा दिया। परिजन बताते हैं जल्द संग्रहालय निर्माण की प्रक्रिया होगी।
खटारा कार ने दिलाए मित्र
आकाशवाणी में कार्यरत रहे साहित्यकार दुष्यंत कुमार के बाल सखा रहे सत्य कुमार त्यागी का कहना था कि भोपाल से लंबा सफर तय कर दुष्यंत जब गांव राजपुर नवादा आया करते थे तो अपनी पुरानी फिएट कार लेकर आते थे। वे अक्सर कहा करते थे कि मैं अपनी पुरानी फिएट कार का शुक्र गुजार हूं जिसने रास्ते के सारे मिस्त्री मेरे मित्र बना दिए हैं।