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जिला पंचायत प्रकरण : हाईकोर्ट में पेश हुए डीएम, मांगी माफी
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जिला पंचायत प्रकरण : हाईकोर्ट में पेश हुए डीएम, मांगी माफी
बिजनौर। जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ दिए गए अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में डीएम उमेश मिश्रा शुक्रवार को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। हाईकोर्ट ने डीएम से पूर्व में पूछे गए सवालों का सही जवाब नहीं देने पर नाराजगी जताई। डीएम की ओर से अपनी गलती के लिए बिना शर्त माफी मांगने पर उन्हें व्यक्तिगत हाजिरी से मुक्त कर दिया।
जिला पंचायत सदस्य आयुष चौहान की ओर से 32 अन्य सदस्यों के शपथ पत्रों के साथ डीएम के समक्ष जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था। इस मामले में बैठक बुलाने की मांग की गई थी। आयुष चौहान के साथ 22 सदस्य डीएम के समक्ष पेश हुए और शपथ पत्र सौंपे थे। डीएम की ओर से इस मामले में बैठक नहीं बुलाए जाने पर हाईकोर्ट में आयुष चौहान की ओर से याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट से डीएम को बैठक बुलाने के निर्देश देने की मांग की गई है। इस मामले में डीएम से जवाब तलब करते हुए व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने के आदेश दिए थे।
बुधवार को इस मामले में हाईकोर्ट के न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता व न्यायाधीश जयंत बनर्जी की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई थी। हाईकोर्ट की पीठ डीएम की ओर से दाखिल शपथ पत्र से संतुष्ट नहीं हुई। उन्होंने डीएम को जवाब देने के लिए व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट पीठ के समक्ष 11 नवंबर को पेश होने के आदेश दिए थे। शुक्रवार को डीएम व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट के समक्ष पेश हुए। डीएम की ओर से पूर्व में दाखिल शपथ पत्र में हाईकोर्ट द्वारा मांगी गई सूचनाओं पर सही जानकारी नहीं देने पर कहा कि डीएम ने न्यायालय के साथ-साथ अपना भी समय खराब किया है।
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डीएम की ओर से दोबारा शपथ पत्र दाखिल कर अपनी गलती मानी और बिना शर्त माफी मांग ली। डीएम ने यह भी कहा कि वह आगे से भविष्य में ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे। हाईकोर्ट ने इस पर डीएम को व्यक्तिगत हाजिरी से मुक्त कर दिया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता भुवनेश कुमार सिंह के अनुसार हाईकोर्ट ने यह माना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव तीन पेज में था, उस पर 33 सदस्यों के हस्ताक्षर थे। अब इस मामले की सुनवाई 18 नवंबर को होगी।
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बिजनौर। जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ दिए गए अविश्वास प्रस्ताव के संबंध में डीएम उमेश मिश्रा शुक्रवार को हाईकोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। हाईकोर्ट ने डीएम से पूर्व में पूछे गए सवालों का सही जवाब नहीं देने पर नाराजगी जताई। डीएम की ओर से अपनी गलती के लिए बिना शर्त माफी मांगने पर उन्हें व्यक्तिगत हाजिरी से मुक्त कर दिया।
जिला पंचायत सदस्य आयुष चौहान की ओर से 32 अन्य सदस्यों के शपथ पत्रों के साथ डीएम के समक्ष जिला पंचायत अध्यक्ष साकेंद्र प्रताप सिंह के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था। इस मामले में बैठक बुलाने की मांग की गई थी। आयुष चौहान के साथ 22 सदस्य डीएम के समक्ष पेश हुए और शपथ पत्र सौंपे थे। डीएम की ओर से इस मामले में बैठक नहीं बुलाए जाने पर हाईकोर्ट में आयुष चौहान की ओर से याचिका दाखिल की गई। हाईकोर्ट से डीएम को बैठक बुलाने के निर्देश देने की मांग की गई है। इस मामले में डीएम से जवाब तलब करते हुए व्यक्तिगत शपथ पत्र दाखिल करने के आदेश दिए थे।
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बुधवार को इस मामले में हाईकोर्ट के न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता व न्यायाधीश जयंत बनर्जी की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई थी। हाईकोर्ट की पीठ डीएम की ओर से दाखिल शपथ पत्र से संतुष्ट नहीं हुई। उन्होंने डीएम को जवाब देने के लिए व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट पीठ के समक्ष 11 नवंबर को पेश होने के आदेश दिए थे। शुक्रवार को डीएम व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट के समक्ष पेश हुए। डीएम की ओर से पूर्व में दाखिल शपथ पत्र में हाईकोर्ट द्वारा मांगी गई सूचनाओं पर सही जानकारी नहीं देने पर कहा कि डीएम ने न्यायालय के साथ-साथ अपना भी समय खराब किया है।
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डीएम की ओर से दोबारा शपथ पत्र दाखिल कर अपनी गलती मानी और बिना शर्त माफी मांग ली। डीएम ने यह भी कहा कि वह आगे से भविष्य में ऐसा कोई कार्य नहीं करेंगे। हाईकोर्ट ने इस पर डीएम को व्यक्तिगत हाजिरी से मुक्त कर दिया। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता भुवनेश कुमार सिंह के अनुसार हाईकोर्ट ने यह माना है कि जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव तीन पेज में था, उस पर 33 सदस्यों के हस्ताक्षर थे। अब इस मामले की सुनवाई 18 नवंबर को होगी।