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बार अध्यक्ष के खिलाफ नहीं होगी रिपोर्ट दर्ज
ब्यूरो/अमर उजाला, बिजनौर
Updated Wed, 31 May 2017 12:27 AM IST
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बिजनौर में सीजेएम प्रमोद गंगवार ने अधिवक्ता राजेंद्र टिकैत द्वारा जिला बार अध्यक्ष राजीव चौहान पर धन के दुरूपयोग करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए दिए गए प्रार्थना पत्र को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि मामला सिविल प्रकृति का प्रतीत होता है और लगाए गए आरोपों से कोई आपराधिक मामला नहीं बनता है।
अधिवक्ता राजेंद्र टिकैत द्वारा न्यायालय में जिला बार अध्यक्ष राजीव चौहान के विरुद्ध दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा गया था कि चुनाव प्रक्रिया में सात लाख रुपया इकट्ठा हुआ था तथा वकालत नामों की बिक्री से भी काफी पैसा इकट्ठा हुआ।
जिला बार का कार्यकाल 27 फरवरी को समाप्त हो गया। पर इसके बाद भी जिलाध्यक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की गई। बार द्वारा जो पैसा इकट्ठा किया गया उसका बार बार अनुरोध किए जाने के बाद भी कोई हिसाब किताब नहीं दिया गया। न ही वह पैसा बार के खर्चे में जमा किया। फर्जी दस्तावेज बना कर अध्यक्ष द्वारा पैसे का दुरुपयोग किया गया।
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इस मामले में कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि लगाए गए आरोपों के बारे में बार काउंसिल में या पुलिस अधीक्षक को शिकायत की गई हो ऐसा कोई तथ्य न्यायालय के सामने नहीं रखा गया। प्रार्थना पत्र में जो तथ्य दिए गए हैं उससे मामला सिविल प्रकृति का प्रतीत होता है। किसी अपराध का होना नहीं पाया जाता है।
कोर्ट ने कहा है कि अधिवक्ता राजेंद्र टिकैत की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र को निरस्त किया जाता है।
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अधिवक्ता राजेंद्र टिकैत द्वारा न्यायालय में जिला बार अध्यक्ष राजीव चौहान के विरुद्ध दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा गया था कि चुनाव प्रक्रिया में सात लाख रुपया इकट्ठा हुआ था तथा वकालत नामों की बिक्री से भी काफी पैसा इकट्ठा हुआ।
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जिला बार का कार्यकाल 27 फरवरी को समाप्त हो गया। पर इसके बाद भी जिलाध्यक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया प्रारंभ नहीं की गई। बार द्वारा जो पैसा इकट्ठा किया गया उसका बार बार अनुरोध किए जाने के बाद भी कोई हिसाब किताब नहीं दिया गया। न ही वह पैसा बार के खर्चे में जमा किया। फर्जी दस्तावेज बना कर अध्यक्ष द्वारा पैसे का दुरुपयोग किया गया।
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इस मामले में कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि लगाए गए आरोपों के बारे में बार काउंसिल में या पुलिस अधीक्षक को शिकायत की गई हो ऐसा कोई तथ्य न्यायालय के सामने नहीं रखा गया। प्रार्थना पत्र में जो तथ्य दिए गए हैं उससे मामला सिविल प्रकृति का प्रतीत होता है। किसी अपराध का होना नहीं पाया जाता है।
कोर्ट ने कहा है कि अधिवक्ता राजेंद्र टिकैत की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र को निरस्त किया जाता है।