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प्रथम विश्व युद्ध में बनवारी सिंह ने दिया था बलिदान

Fri, 11 Nov 2022 10:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 11 Nov 2022 10:36 PM IST
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Banwari Singh had sacrificed in the First World War
बिजनौर के बनवारी सिंह को मरने के बाद मिला था सैन्य पदक। - फोटो : BIJNOR
प्रथम विश्व युद्ध में बनवारी सिंह ने दिया था बलिदान
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विवेक गुप्ता
कोतवाली देहात/बिजनौर। प्रथम विश्व युद्ध 28 जुलाई 1914 को शुरू हुआ था। युद्ध की समाप्ति की अधिकारिक घोषणा 11 नवंबर 1918 को हुई थी। इस युद्ध में बिजनौर के भी कई सैनिकों ने भाग लिया था। युद्ध में थाना कोतवाली देहात क्षेत्र के ग्राम बांकपुर निवासी बनवारी सिंह ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। बनवारी सिंह को मरणोपरांत तत्कालीन ब्रिटिश हुकूमत द्वारा सैन्य पदक प्रदान किया गया था। उनका नाम आज भी कॉमनवेल्थ ग्रेव्यार्ड कमीशन में दर्ज है।
प्रथम विश्व युद्ध के दौरान पूरा विश्व दो सेनाओं में बंट गया था। उस समय पर भारत में अंग्रेजों का शासन था। बिजनौर के कई सैनिक इस युद्ध में इंग्लैंड की ओर से लड़े। ग्राम बांकपुर निवासी बनवारी सिंह के प्रपौत्र शिक्षक दुष्यंत कुमार बताते हैं कि उनके परदादा फौज में भर्ती हो गए थे। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान उन्हें लड़ने के लिए इटली के बॉर्डर पर भेजा गया। वह एक दिलेर सैनिक थे। इटली के बॉर्डर पर हुई लड़ाई में उनके परदादा की टुकड़ी ने जीत हासिल की। उस समय विरोधी सेनानी ने लैंडमाइन बिछाई हुई थी, जिसकी चपेट में आकर बनवारी सिंह की मौत हो गई थी। उनकी वीरता को देखते हुए इराक के बसरा शहर में अंग्रेजी हुकूमत द्वारा उनकी समाधि बनवाई गई थी, जो आज भी है।
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बनवारी सिंह का नाम इंडिया गेट पर भी लिखा है। अंग्रेजी सरकार द्वारा मरणोपरांत बनवारी सिंह को वीरता पदक तथा प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया था। लंदन की टकसाल में गढ़ा गया वह पदक आज भी उनके परिवार के पास सुरक्षित है। दुष्यंत कुमार बताते हैं कि दादाजी से संबंधित काफी दस्तावेज परिवार के पास थे, लेकिन एक बार घर में आग लगने के कारण सभी दस्तावेज जल गए थे। दुष्यंत कुमार के अनुसार कॉमनवेल्थ ग्रेव्यार्ड कमीशन में उनके परदादा का नाम आज भी ऑनलाइन है। उनके दादा प्रताप सिंह अपने पिता की वीरता के किस्से उन्हें सुनाया करते थे।
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