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सेमराधनाथ में टकराया था सुदर्शन-त्रिशूल

Sun, 27 Feb 2022 12:31 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sun, 27 Feb 2022 12:31 AM IST
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Sudarshan-Trishul collided in Semradhanath
काशी-प्रयाग के मध्य स्थित सेमराधनाथ धाम इतिहास समेटे हुए है। कहा जाता है कि यहीं पर भगवान शिव और द्वारिकाधीश श्रीकृष्ण का सुदर्शन चक्र टकराया था। पुराणों में इस बात का जिक्र तो मिलता है, लेकिन स्थान के नाम का उल्लेख नहीं मिलता है। हालांकि सम दूरी होने के समराधिनाथ वर्तमान में सेमराधनाथ को ही माना जाता है। कुल 15 फीट नीचे स्थित बाबा का शिवलिंग भी आस्था का केंद्र बना हुआ है।
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सेमराधनाथ जंगीगंज बाजार से 10 किलोमीटर दक्षिण और सीता समाहित स्थल से 15 किमी पूरब उत्तर वाहिनी गंगा तट पर स्थित है। संत केशव कृपाल महराज बताते हैं कि सेमराध नाथ महादेव मंदिर काशी प्रयाग और विंध्य का अनूठा संगम है। पुराणों और ग्रंथों में इसे उप ज्योतिर्लिंग की संज्ञा दी गई है। इस मंदिर का उल्लेख पद्म पुराण, लिंग पुराण एवं श्रीमद्भभागवत के दशम स्कंद में मिलता है। पद्म पुराण में वर्णित कथा के तहत काशी के शूलटंकेश्वर से भगवान शिव ने अपना त्रिशूल और तीर्थ राज प्रयाग सोमेश्वर स्थल से द्वारिकाधीश श्री कृष्ण ने अपना सुदर्शन चक्र एक दूसरे की ओर छोड़ा। दोनों अस्त्र काशी और प्रयाग का मध्य पता लगाने के लिए छोड़े गए थे। काशी और प्रयाग के मध्य शिव के त्रिशूल और श्री कृष्ण का सुदर्शन चक्र टकराने से एक दिव्य दीप प्रज्ज्वलित हुई। जो एक ज्योतिर्मय शिवलिंग का रूप बन कर धरती में समा गया। कालांतर में भगवान शिव की प्रेरणा से एक सौदागर ने जब सेमराध स्थित इस स्थल की खुदाई की तो जमीन से 15 फीट नीचे एक चमत्कारिक और अद्भुत शिवलिंग मिला। श्रद्धालुओं में इस शिवलिंग के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास है। भारी संख्या लोग नित्य तथा सोमवार को भारी संख्या में श्रद्धालु दर्शन पूजन के लिए आते हैं। ऐसी मान्यता है कि सच्चे मन मांगी गई हर मनोकामना को बाबा पूर्ण करते हैं। मंदिर के पुजारी विनोद गिरी ने बताया कि बाबा सेमराधनाथ अवढरदानी हैं। जो एक लोटा जल और बेलपत्र से ही प्रसन्न होकर लोगों की मनोकामना पूर्ण कर देते हैं। संत केशव कृपाल महाराज के मुताबिक स्मर (कामदेव) का दहन करने के कारण इन्हें स्मराधिनाथ भी कहा गया है। कहा कि बाबा सेमराधनाथ का दर्शन-पूजन करने से काम का विनाश होता है। साथ ही कामनाओं की पूर्ति होने के साथ ही बाबा विश्वनाथ के दर्शन पूजन का फल मिलता है। सेमराधनाथ में वैसे तो हर सोमवार को भक्तों की भीड़ उमड़ती है, लेकिन सावन और महाशिवरात्रि पर संख्या काफी बढ़ जाती है।
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