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Bhadohi News: पितरों के तर्पण के लिए आज घाटों पर जुटेंगे लोग

Sat, 14 Oct 2023 12:03 AM IST
Varanasi Bureau वाराणसी ब्यूरो
Updated Sat, 14 Oct 2023 12:03 AM IST
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People will gather at the ghats today to offer prayers to their ancestors.
ज्ञानपुर। जिले के विभिन्न गंगा घाटों पर शनिवार को लोग अपने पितरों का श्राद्ध तर्पण कर उन्हें नमन करेंगे और अपने पूर्वजों ेके प्रति कृतज्ञता का भाव प्रकट करेंगे। पितृ विसर्जन को जिले के रामपुर व सीतामढ़ी घाटों पर लाखों की भीड़ जुटती है। इस दिन बड़ी संख्या में लोग गंगा घाटों पर पहुंच कर पितरों का श्राद्ध एवं तर्पण करते हैं। ऐसे तो तिथि के अनुसार पितरों का तर्पण किया जाता है, लेकिन जो तिथि भुल चुके हैं। वे पितृ अमावया के दिन श्राद्ध कर सकते हैं।
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जिले के रामपुर, सीतामढ़ी, बेरासपुर, भोगांव आदि सहित दर्जन भर घाटों पर पितरों का श्राद्ध करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। सुबह से ही यहां पर भीड़ होने लगती है, जो दोपहर तीन बजे तक चलती है। कर्मकांडी ब्राहम्ण गंगा घाट पर सुबह ही पहुंच जाते हैं। घाटों पर जुटने वाली लाखों की भीड़ के बाद भी गंगा घाटों पर विशेष सफाई व्यवस्था नहीं देखी गई। पूर्वजों की याद में करीब एक पखवाडे़ तक चलने वाला पितृपक्ष का आखिरी दिन शनिवार को है। रविवार से नवरात्र का शुभारंभ हो रहा है। तर्पण की पूर्व संध्या पर बाजारों में काला तिल, रोरी, घी, रक्षा सहित अन्य श्राद्ध सामग्री की खरीदारी की गई। जिसको लेकर दुकानों पर भीड़ रही। गंगा घाटों पर पितृ विसर्जन को लेकर कोई खास तैयारी नहीं है। जहां तहां घाटों पर सफाई करायी गयी है। 14 अक्तूबर अमावस्या को पितृ विसर्जन के साथ ही यह पर्व संपन्न भी हो जाएगा। पौराणिक मान्यता के अनुसार पितृ विसर्जन के दिन ज्ञात-अज्ञात सभी पितरों का श्राद्ध-तर्पण करके उनका पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
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इनसेट:
पितरों का करें तपण, बनी रहेंगी कृपा:
डुहिया भावसिंहपुर निवासी आचार्य पं. दीनानाथ शुक्ल ने बताया कि काशी से प्रकाशित महावीर पंचाग के अनुसार स्नान ध्यान कर एवं श्राद्ध की अमवस्या पितृ विजर्सन 14 अक्तूबर को है। पितरों की संतुष्टि के लिए ब्राह्मणों को विष्णु मानकर भोजन कराना चाहिए। यथा शक्ति के अनुसार दान भी करना चाहिए। इससे परिवार में सुख-शांति संग वंश वृद्धि होती है। 15 दिनों तक चलने वाले पितृपक्ष में तिथि के दिन पितरों को पिंडदान किया जाता है, लेकिन जिन्हें अपने पितरों की तिथि नहीं मालूम है। वे अंतिम दिन अमावस्या को श्राद्ध कर सकते हैं।
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