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Bhadohi News: भारत को कालीन उद्योग के लिए खोजना होगा नया विकल्प
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भदोही। भारतीय उत्पादों पर अमेरिका की ओर से लगाए जाने वाले टैरिफ पर बुधवार को स्थिति साफ हो गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय वस्तुओं पर 25 फीसदी टैरिफ की घोषणा की है। नए टैरिफ शुक्रवार (एक अगस्त) से लागू हो जाएंगे। 25 फीसदी टैरिफ भारतीय हस्तनिर्मित कालीनों के लिए न केवल भारी है, बल्कि इससे भारत-अमेरिका के बीच कालीन व्यापार पर व्यापक असर पड़ेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को बड़ा झटका दिया है। इसका दूरगामी असर देखने को मिलेगा। व्यापारिक समझौते पर बात करके बीते महीने भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका से लौटा है। तब उम्मीद लगाई जा रही थी कि भारत और अमेरिका किसी अच्छे नतीजे पर पहुंच रहे हैं, लेकिन बुधवार की घोषणा से भारतीय कालीन उद्योग जगत को चिंता में डाल दिया है। भारत का कालीन निर्यात वर्ष भर में लगभग 16 हजार करोड़ है। इसमें लगभग 58 प्रतिशत कालीनों का खरीदार अमेरिका है, लेकिन अब भारतीय कालीन उद्योग को बचाने के लिए अमेरिका का विकल्प ढूंढना होगा। बीते नौ अप्रैल को ट्रंप ने कालीन सहित अन्य भारतीय उत्पादों पर 26 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था। इसके बाद हस्तनिर्मित उत्पाद जिन्हें तैयार करने में छह से 12 माह तक लग जाते हैं। काफी अग्रह के बाद तीन महीने तक समय (9 जुलाई तक) दिया था। उक्त समय सीमा समाप्त होने के बाद उसे 31 जुलाई तक बढ़ा दिया गया था।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारतीय कालीन उद्योग को बड़ी चोट दी है। चार महीने की कशमकश के बाद 25 फीसदी टैरिफ की घोषणा से कालीन उद्योग प्रभावित होगा। ऐसे में अब हमें अमेरिका का विकल्प ढूंढना होगा। -पीयूष कुमार बरनवाल, मानद सचिव एकमा
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भारतीय कालीनों में 60 प्रतिशत तक श्रम का उपयोग होता है। बाकी में 40 प्रतिशत कच्चा माल लगता है। 60 प्रतिशत तक भारतीय कालीन खरीदने वाला अमेरिका का बाजार प्रभावित होने से हमारे श्रमिकों पर व्यापक असर होगा। -वासिफ अंसारी, अध्यक्ष सीईपीसी फेयर कमेटी।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को बड़ा झटका दिया है। इसका दूरगामी असर देखने को मिलेगा। व्यापारिक समझौते पर बात करके बीते महीने भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका से लौटा है। तब उम्मीद लगाई जा रही थी कि भारत और अमेरिका किसी अच्छे नतीजे पर पहुंच रहे हैं, लेकिन बुधवार की घोषणा से भारतीय कालीन उद्योग जगत को चिंता में डाल दिया है। भारत का कालीन निर्यात वर्ष भर में लगभग 16 हजार करोड़ है। इसमें लगभग 58 प्रतिशत कालीनों का खरीदार अमेरिका है, लेकिन अब भारतीय कालीन उद्योग को बचाने के लिए अमेरिका का विकल्प ढूंढना होगा। बीते नौ अप्रैल को ट्रंप ने कालीन सहित अन्य भारतीय उत्पादों पर 26 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया था। इसके बाद हस्तनिर्मित उत्पाद जिन्हें तैयार करने में छह से 12 माह तक लग जाते हैं। काफी अग्रह के बाद तीन महीने तक समय (9 जुलाई तक) दिया था। उक्त समय सीमा समाप्त होने के बाद उसे 31 जुलाई तक बढ़ा दिया गया था।
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अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारतीय कालीन उद्योग को बड़ी चोट दी है। चार महीने की कशमकश के बाद 25 फीसदी टैरिफ की घोषणा से कालीन उद्योग प्रभावित होगा। ऐसे में अब हमें अमेरिका का विकल्प ढूंढना होगा। -पीयूष कुमार बरनवाल, मानद सचिव एकमा
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भारतीय कालीनों में 60 प्रतिशत तक श्रम का उपयोग होता है। बाकी में 40 प्रतिशत कच्चा माल लगता है। 60 प्रतिशत तक भारतीय कालीन खरीदने वाला अमेरिका का बाजार प्रभावित होने से हमारे श्रमिकों पर व्यापक असर होगा। -वासिफ अंसारी, अध्यक्ष सीईपीसी फेयर कमेटी।