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मौसम ने ली करवट चिंता में पड़े किसान
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला
Updated Mon, 09 Nov 2015 01:18 AM IST
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रविवार को हल्की बूंदाबांदी के बाद आसमान में छाए बादलों ने किसानों की
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चिंता बढ़ा दी है। मौसम को देख खेतों में काटकर छोड़ी गई धान की फसल को
किसान समेटने में जुट गए। इसके साथ ही ठंड ने भी दस्तक दे दी है।
60 फीसदी किसानों की फसलें तैयार होने के बावजूद कटाई, मढाई से वंचित है, इसके चलते बारिश होने पर किसानों का नुकसान और बढ़ सकता है।
धान, बाजरा और उड़द आदि फसलें तैयार हो चुकी है, इसमें लगभग 40 फीसदी फसलें तैयार होने के साथ कटाई और मढ़ाई के दौर में है। शेष फसलें भी पक चुकी हैं लेकिन किसान कटाई नहीं कर पाए हैं।
पानी बरसने पर फसलें खेत में गिर जाएंगी और दो-तीन दिन बारिश हुई तो धान की फसल को काफी नुकसान हो सकता है। किसान तेजी से कटाई और मड़ाई करने में लगे हैं ताकि रबी की फसल की बुवाई समय से की जा सके। ऐसे में बारिश से उनके काम में व्यवधान उत्पन्न हो जाएगा।
ऐसे में एक दिन पूर्व हुए बूंदाबांदी और रविवार को आसमान में छाए बादलों को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। यदि बारिश हो गई तो उनके सारे किए धरे पर पानी फिर जाएगा। वर्तमान फसल चौपट होगी ही, रबी की बुआई भी पिछड़ सकती है।
किसानों का मानना है कि यदि बारिश एक सप्ताह तक न हो तो उनके लिए फायदेमंद रहेगा। इसके लिए वे भगवान से भी प्रार्थना कर रहे हैं। मौसम में बदलाव से ठंड का असर भी बढ़ गया है।
स्वेटर, मफलर, जैकेट आदि को बाहर निकलना शुरू हो गया है। आमतौर पर दीपावली पर ऐसा मौसम नहीं होता है। मौसम यह बदलाव सेहत के लिए भी घातक साबित हो सकता है।
चिकित्सकों के मुताबिक दीपावली में पटाखों से एलर्जी और अस्थमा के रोगियों को परेशानी होती है। मौसम का बदलाव इसे और बढ़ा सकता है।
60 फीसदी किसानों की फसलें तैयार होने के बावजूद कटाई, मढाई से वंचित है, इसके चलते बारिश होने पर किसानों का नुकसान और बढ़ सकता है।
धान, बाजरा और उड़द आदि फसलें तैयार हो चुकी है, इसमें लगभग 40 फीसदी फसलें तैयार होने के साथ कटाई और मढ़ाई के दौर में है। शेष फसलें भी पक चुकी हैं लेकिन किसान कटाई नहीं कर पाए हैं।
पानी बरसने पर फसलें खेत में गिर जाएंगी और दो-तीन दिन बारिश हुई तो धान की फसल को काफी नुकसान हो सकता है। किसान तेजी से कटाई और मड़ाई करने में लगे हैं ताकि रबी की फसल की बुवाई समय से की जा सके। ऐसे में बारिश से उनके काम में व्यवधान उत्पन्न हो जाएगा।
ऐसे में एक दिन पूर्व हुए बूंदाबांदी और रविवार को आसमान में छाए बादलों को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। यदि बारिश हो गई तो उनके सारे किए धरे पर पानी फिर जाएगा। वर्तमान फसल चौपट होगी ही, रबी की बुआई भी पिछड़ सकती है।
किसानों का मानना है कि यदि बारिश एक सप्ताह तक न हो तो उनके लिए फायदेमंद रहेगा। इसके लिए वे भगवान से भी प्रार्थना कर रहे हैं। मौसम में बदलाव से ठंड का असर भी बढ़ गया है।
स्वेटर, मफलर, जैकेट आदि को बाहर निकलना शुरू हो गया है। आमतौर पर दीपावली पर ऐसा मौसम नहीं होता है। मौसम यह बदलाव सेहत के लिए भी घातक साबित हो सकता है।
चिकित्सकों के मुताबिक दीपावली में पटाखों से एलर्जी और अस्थमा के रोगियों को परेशानी होती है। मौसम का बदलाव इसे और बढ़ा सकता है।