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Bhadohi News: स्टेट बैंक के खिलाफ दाखिल याचिका उपभोक्ता आयोग ने की खारिज
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। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने भारतीय स्टेट बैंक के खिलाफ दायर एक परिवाद को खारिज कर दिया है।
आयोग ने बैंक की ओर से किसान के बचत खाते से ऋण राशि समायोजित करने को वैध ठहराया है।
यह निर्णय 28 अक्तूबर 2026 को अध्यक्ष संजय कुमार डे और सदस्य विजय बहादुर सिंह ने सुनाया। जिला उपभोक्ता आयोग के रीडर स्वतंत्र रावत ने बताया कि ज्ञानपुर के जोरई निवासी कृपाशंकर दुबे ने आरोप लगाया था कि बैंक ने उन्हें उत्तर प्रदेश की ऋण मोचन योजना का पूरा लाभ नहीं दिया। आयोग में दी गई याचिका में उन्होंने बताया कि बैंक ने बिना अनुमति उनके बचत खाते से 37,905 रुपये समायोजित किए।
इसके लिए उन्होंने एक लाख 10 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति और वाद-व्यय की मांग की। बैंक ने अपने जवाब में कहा कि परिवाद गलत तथ्यों पर आधारित है। बैंक के अनुसार, किसान क्रेडिट कार्ड ऋण मोचन योजना के तहत 56,524 रुपये माफ किए गए थे।
इसके बाद ऋण खाते में 13,194 रुपये बकाया रहे। ब्याज सहित यह राशि 18 सितंबर 2024 को 37,905 रुपये हो गई थी। बैंक ने बताया कि उसने बैंकर्स लियन के अधिकार का प्रयोग करते हुए यह राशि बचत खाते से समायोजित की।आयोग ने पाया कि दुबे के दूसरे किसान क्रेडिट कार्ड ऋण खाते पर यह योजना लागू हुई थी। बैंक ने 56,524 रुपये की ऋण माफी दी थी, जो शासनादेश के अनुरूप थी। शेष बकाया राशि अदा करने की जिम्मेदारी परिवादी की थी। आयोग के चेयरमैन संजय कुमार डे की पीठ ने दोनों पक्षों के तर्क सुना। संवाद
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आयोग ने बैंक की ओर से किसान के बचत खाते से ऋण राशि समायोजित करने को वैध ठहराया है।
यह निर्णय 28 अक्तूबर 2026 को अध्यक्ष संजय कुमार डे और सदस्य विजय बहादुर सिंह ने सुनाया। जिला उपभोक्ता आयोग के रीडर स्वतंत्र रावत ने बताया कि ज्ञानपुर के जोरई निवासी कृपाशंकर दुबे ने आरोप लगाया था कि बैंक ने उन्हें उत्तर प्रदेश की ऋण मोचन योजना का पूरा लाभ नहीं दिया। आयोग में दी गई याचिका में उन्होंने बताया कि बैंक ने बिना अनुमति उनके बचत खाते से 37,905 रुपये समायोजित किए।
इसके लिए उन्होंने एक लाख 10 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति और वाद-व्यय की मांग की। बैंक ने अपने जवाब में कहा कि परिवाद गलत तथ्यों पर आधारित है। बैंक के अनुसार, किसान क्रेडिट कार्ड ऋण मोचन योजना के तहत 56,524 रुपये माफ किए गए थे।
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इसके बाद ऋण खाते में 13,194 रुपये बकाया रहे। ब्याज सहित यह राशि 18 सितंबर 2024 को 37,905 रुपये हो गई थी। बैंक ने बताया कि उसने बैंकर्स लियन के अधिकार का प्रयोग करते हुए यह राशि बचत खाते से समायोजित की।आयोग ने पाया कि दुबे के दूसरे किसान क्रेडिट कार्ड ऋण खाते पर यह योजना लागू हुई थी। बैंक ने 56,524 रुपये की ऋण माफी दी थी, जो शासनादेश के अनुरूप थी। शेष बकाया राशि अदा करने की जिम्मेदारी परिवादी की थी। आयोग के चेयरमैन संजय कुमार डे की पीठ ने दोनों पक्षों के तर्क सुना। संवाद
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