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व्रत रखकर पुत्रों की दीर्घायु की कामना
ब्यूरो, भदोही, अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 24 Sep 2016 01:23 AM IST
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ज्ञानपुर के हरिहरनाथ मंदिर में जीवित्पुत्रिका की पूजा करतीं महिलाएं।
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पुत्र की सलामती के लिए जीवित्पुत्रिका पर्व शुक्रवार को जिले में परंपरागत ढंग से मनाया गया। महिलाओं ने 24 घंटे तक निराजल व्रत रखकर संतान के सुख-सौभाग्य की कामना की। दोपहर बाद मंदिरों और सार्वजनिक स्थलों पर बनाए गए गोंठ में बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालुओं ने सामूहिक रूप से एकत्र होकर पूजा-अर्चना की। इस दौरान महिलाओं ने कहानियों के जरिए देवी जीवित्पुत्रिका की महिमा का वर्णन किया।
मंदिरों और सरोवरों के किनारे बनीं बेदियों पर शुक्रवार को मां जीवित्पुत्रिका से संतान की दीर्घायु और सलामती की प्रार्थना की गई। बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालुओं ने फल-फूल और प्रसाद से भरी थाल के साथ गोंठ में पहुंचकर पूजन-अर्चन किया। ज्ञानपुर स्थित हरिहरनाथ मंदिर परिसर में बनाए गए पूजा स्थल पर दोपहर बाद से ही महिलाओं का आगमन शुरू हो गया। लोग परिवार समेत पहुंचकर अपना-अपना स्थान पक्का कर रहे थे। तमाम लोग बाजे-गाजे के साथ मंदिर पहुंचे।
इस दौरान साथ की महिलाएं देवी गीत गाती चल रहीं थीं। इससे वातावरण भक्तिमय हो उठा। मंदिर पर पूजा-पाठ के बाद कहानियां सुनाने का दौर चला। महिलाओं ने एक के बाद एक कहानियां सुनाईं। इसमें जीवित्पुत्रिका मां की महिमा का बखान किया गया। महिलाओं ने कहानियों के जरिए बताया कि किस तरह से मां के आशीर्वाद से मृत पुत्रों को पुनर्जीवन मिला और कई नि:संतान महिलाओं को मां बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पूजा में कई विवाहित जोड़े भी शामिल हुए और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की।
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अंत में जीवित्पुत्रिका मां से मंगल कामना का आशीर्वाद ले श्रद्धालु घरों को रवाना हुए। जीवित्पुत्रिका व्रत में महिलाएं 24 घंटे निराजल व्रत रखती हैं। इस कठोर व्रत का पारण शनिवार को सुबह किया जाएगा। उसी दिन घर में विविध पकवान भी बनाए जाते हैं। व्रती महिलाएं इस दिन पुत्रों की संख्या के बराबर सिरजना माला के रूप में पहनती हैं।
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मंदिरों और सरोवरों के किनारे बनीं बेदियों पर शुक्रवार को मां जीवित्पुत्रिका से संतान की दीर्घायु और सलामती की प्रार्थना की गई। बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालुओं ने फल-फूल और प्रसाद से भरी थाल के साथ गोंठ में पहुंचकर पूजन-अर्चन किया। ज्ञानपुर स्थित हरिहरनाथ मंदिर परिसर में बनाए गए पूजा स्थल पर दोपहर बाद से ही महिलाओं का आगमन शुरू हो गया। लोग परिवार समेत पहुंचकर अपना-अपना स्थान पक्का कर रहे थे। तमाम लोग बाजे-गाजे के साथ मंदिर पहुंचे।
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इस दौरान साथ की महिलाएं देवी गीत गाती चल रहीं थीं। इससे वातावरण भक्तिमय हो उठा। मंदिर पर पूजा-पाठ के बाद कहानियां सुनाने का दौर चला। महिलाओं ने एक के बाद एक कहानियां सुनाईं। इसमें जीवित्पुत्रिका मां की महिमा का बखान किया गया। महिलाओं ने कहानियों के जरिए बताया कि किस तरह से मां के आशीर्वाद से मृत पुत्रों को पुनर्जीवन मिला और कई नि:संतान महिलाओं को मां बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। पूजा में कई विवाहित जोड़े भी शामिल हुए और सुखद वैवाहिक जीवन की कामना की।
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अंत में जीवित्पुत्रिका मां से मंगल कामना का आशीर्वाद ले श्रद्धालु घरों को रवाना हुए। जीवित्पुत्रिका व्रत में महिलाएं 24 घंटे निराजल व्रत रखती हैं। इस कठोर व्रत का पारण शनिवार को सुबह किया जाएगा। उसी दिन घर में विविध पकवान भी बनाए जाते हैं। व्रती महिलाएं इस दिन पुत्रों की संख्या के बराबर सिरजना माला के रूप में पहनती हैं।