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Basti News: फिर बन सकेंगे हैवी डीएल, मिला ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल
Sat, 02 Mar 2024 12:57 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sat, 02 Mar 2024 12:57 AM IST
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बस्ती। जिले में अब हैवी ड्राइविंग लाइसेंस बनने का इंतजाम हो गया है। एआरटीओ पंकज कुमार सिंह ने एक मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल का संचालन शुरू करवा दिया है। इससे तीन माह से भटक रहे डीएल के आवेदकों को अब परेशान नहीं होना पड़ेगा।
तीन माह से जिले में हैवी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का कार्य ठप पड़ा हुआ है। इसका प्रमुख कारण यह है कि यहां पूर्व में संचालित सात ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल तकरीबन तीन माह पहले दिसंबर में अवैध घोषित हो चुके हैं। जबकि इसके पूर्व हैवी डीएल बनवाने के लिए हर माह औसतन डेढ़ से दो सौ आवेदन प्राप्त होते थे। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि अब तक लगभग चार से पांच सौ आवेदक हैवी डीएल न बन पाने के कारण सुविधा से वंचित हो चुके हैं आरटीओ प्रशासन फरीदुदीन ने कहा था कि इसके लिए जल्द ही कोई विकल्प तैयार किया जाएगा। उन्होंने एआरटीओ पंकज सिंह से अवध मोटर ड्राइविंग स्कूल की विचाराधीन पत्रावली की जांच करवाई और स्कूल के मानकों का स्थलीय परीक्षण व सत्यापन करवाया और उसके संचालन की व्यवस्था बनवाई है।
एआरटीओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि शहर से सटे उमरी दुधौरा में अवध मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल के मानकों का स्थलीय सत्यापन किया गया है। इसी सप्ताह इसमें ट्रेनिंग शुरू करवा दिया गया है।
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जिले में स्थापित सात में एक भी मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल मानक नहीं पूरा कर पाए था। लिहाजा सभी का लाइसेंस दिसंबर में ही निरस्त किया जा चुका है। परिवहन विभाग में कामर्शियल वाहन चालक लाइसेंस के लिए मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल कोर्स करने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है। जिले में कुल सात ट्रेनिंग स्कूल थे जो सभी मानक विहीन थे। जिसकी संभागीय प्राविधिक निरीक्षक यानी कि आरआई संजय दास ने जांच के बाद पुष्टि किया था।
यह होना चाहिए मानक
परिवहन विभाग के डाटा बेस आपरेटर राकेश तिवारी अनुसार मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों के मानक में स्वागत कक्ष व कार्यालय कक्ष ऐसा होना चाहिए जिसमें इंटरनेट कनेक्शन व कंप्यूटर प्रिंटर सहित, व्याख्यान कक्ष (न्यूनतम 30 व्यक्तियों के लिए), सिमुलेटर कक्ष (एक प्रकार के वाहन के लिए), मॉडल चार्ट व उपकरण, सभी यानों के लिए पार्किंग व फर्नीचर कंप्यूटर सहित मल्टीमीडिया प्रोजेक्टर आदि होना चाहिए।
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तीन माह से जिले में हैवी ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का कार्य ठप पड़ा हुआ है। इसका प्रमुख कारण यह है कि यहां पूर्व में संचालित सात ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल तकरीबन तीन माह पहले दिसंबर में अवैध घोषित हो चुके हैं। जबकि इसके पूर्व हैवी डीएल बनवाने के लिए हर माह औसतन डेढ़ से दो सौ आवेदन प्राप्त होते थे। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि अब तक लगभग चार से पांच सौ आवेदक हैवी डीएल न बन पाने के कारण सुविधा से वंचित हो चुके हैं आरटीओ प्रशासन फरीदुदीन ने कहा था कि इसके लिए जल्द ही कोई विकल्प तैयार किया जाएगा। उन्होंने एआरटीओ पंकज सिंह से अवध मोटर ड्राइविंग स्कूल की विचाराधीन पत्रावली की जांच करवाई और स्कूल के मानकों का स्थलीय परीक्षण व सत्यापन करवाया और उसके संचालन की व्यवस्था बनवाई है।
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एआरटीओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि शहर से सटे उमरी दुधौरा में अवध मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल के मानकों का स्थलीय सत्यापन किया गया है। इसी सप्ताह इसमें ट्रेनिंग शुरू करवा दिया गया है।
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जिले में स्थापित सात में एक भी मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल मानक नहीं पूरा कर पाए था। लिहाजा सभी का लाइसेंस दिसंबर में ही निरस्त किया जा चुका है। परिवहन विभाग में कामर्शियल वाहन चालक लाइसेंस के लिए मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूल कोर्स करने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है। जिले में कुल सात ट्रेनिंग स्कूल थे जो सभी मानक विहीन थे। जिसकी संभागीय प्राविधिक निरीक्षक यानी कि आरआई संजय दास ने जांच के बाद पुष्टि किया था।
यह होना चाहिए मानक
परिवहन विभाग के डाटा बेस आपरेटर राकेश तिवारी अनुसार मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों के मानक में स्वागत कक्ष व कार्यालय कक्ष ऐसा होना चाहिए जिसमें इंटरनेट कनेक्शन व कंप्यूटर प्रिंटर सहित, व्याख्यान कक्ष (न्यूनतम 30 व्यक्तियों के लिए), सिमुलेटर कक्ष (एक प्रकार के वाहन के लिए), मॉडल चार्ट व उपकरण, सभी यानों के लिए पार्किंग व फर्नीचर कंप्यूटर सहित मल्टीमीडिया प्रोजेक्टर आदि होना चाहिए।