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Basti News: तेवर दिखा रहा तापमान, पछुआ सोख रही खेत की नमी
Fri, 10 Mar 2023 11:39 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 10 Mar 2023 11:39 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। मौसम का रुख दिन-ब-दिन तल्ख होता जा रहा है। तापमान 34 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के बाद फसलें वैसे भी मुर्झाने लगी थीं, अब पछुआ हवा भी परेशान करने लगी है। दो-तीन दिनों से चल रही तेज पछुआ हवा मिट्टी और पौधों की नमी सोख ले रही है।
किसानों को खेत में नमी कायम रखने में काफी चुनौती पेश आने लगी है। सबसे बड़ी दिक्कत सिंचाई को लेकर होने लगी है। किसान अगर ज्यादा सिंचाई कर देगा तो गेहूं की फसल के गिरने का खतरा बढ़ जाएगा। न सिंचाई करें तो फसल पकने से पहले पौधों के सूखने का डर है। मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि इस समय फसल को सुरक्षित कर पाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। थोड़ी सी भी चूक सारे किए कराए पर पानी फेर सकती है।
इस बार 15 फरवरी के बाद से ही तापमान आंखें दिखाने लगा। इसमें लगातार इजाफा होते रहने का नतीजा यह है कि मार्च के दूसरे सप्ताह में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया, जबकि इसे अधिक से अधिक 31 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए था। यही हाल न्यूनतम तापमान का भी है। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
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कृषि विशेषज्ञ प्रेमशंकर बताते हैं कि 20 दिसंबर के बाद की बोई गेहूं की फसल पर सबसे ज्यादा खतरा है। उसकी बालियों में अभी दाने बनने की प्रक्रिया चल रही है। तापमान ज्यादा होने से उसके दाने पुष्ट होने से पहले सूख जाएंगे। हालांकि नवंबर के अंतिम सप्ताह से दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक की बोई फसल पर फिलहाल ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला है।
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बस्ती। मौसम का रुख दिन-ब-दिन तल्ख होता जा रहा है। तापमान 34 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंचने के बाद फसलें वैसे भी मुर्झाने लगी थीं, अब पछुआ हवा भी परेशान करने लगी है। दो-तीन दिनों से चल रही तेज पछुआ हवा मिट्टी और पौधों की नमी सोख ले रही है।
किसानों को खेत में नमी कायम रखने में काफी चुनौती पेश आने लगी है। सबसे बड़ी दिक्कत सिंचाई को लेकर होने लगी है। किसान अगर ज्यादा सिंचाई कर देगा तो गेहूं की फसल के गिरने का खतरा बढ़ जाएगा। न सिंचाई करें तो फसल पकने से पहले पौधों के सूखने का डर है। मौसम वैज्ञानिक बताते हैं कि इस समय फसल को सुरक्षित कर पाना किसानों के लिए बड़ी चुनौती है। थोड़ी सी भी चूक सारे किए कराए पर पानी फेर सकती है।
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इस बार 15 फरवरी के बाद से ही तापमान आंखें दिखाने लगा। इसमें लगातार इजाफा होते रहने का नतीजा यह है कि मार्च के दूसरे सप्ताह में अधिकतम तापमान 34 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया, जबकि इसे अधिक से अधिक 31 डिग्री सेल्सियस होना चाहिए था। यही हाल न्यूनतम तापमान का भी है। शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 16 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
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कृषि विशेषज्ञ प्रेमशंकर बताते हैं कि 20 दिसंबर के बाद की बोई गेहूं की फसल पर सबसे ज्यादा खतरा है। उसकी बालियों में अभी दाने बनने की प्रक्रिया चल रही है। तापमान ज्यादा होने से उसके दाने पुष्ट होने से पहले सूख जाएंगे। हालांकि नवंबर के अंतिम सप्ताह से दिसंबर के दूसरे सप्ताह तक की बोई फसल पर फिलहाल ज्यादा असर नहीं पड़ने वाला है।