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Basti News: सात महीने तक तकनीकी परीक्षण में उलझा रहा मामला, अब कहा- जरूरत ही नहीं
Thu, 15 Oct 2026 03:00 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 15 Oct 2026 03:00 AM IST
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बस्ती। अटल आवासीय विद्यालय में जलभराव की समस्या दूर करने के लिए रिटेनिंग वॉल बनाने का मामला सात महीने तक तकनीकी परीक्षण में उलझा रहा। अब अधिकारियों की बैठक में तय हुआ कि परीक्षण की जरूरत नहीं है। अब 8.72 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को इसी आधार पर स्वीकृति के लिए शासन में भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
विद्यालय परिसर में जलभराव के स्थायी समाधान के लिए सिंचाई विभाग के सरयू नहर खंड-4 ने फरवरी में ही चहारदीवारी के चारों तरफ रिटेनिंग वॉल बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था। इसकी अनुमानित लागत 8.72 करोड़ रुपये रखी गई थी। निर्माण से पहले तकनीकी परीक्षण के लिए लोक निर्माण विभाग के भवन सेल, अयोध्या को पत्र भेजा गया था। परीक्षण के लिए आईआईटी रुड़की की मदद लेने का विकल्प भी सामने आया, लेकिन अनुमति और अग्रिम कार्रवाई के इंतजार में प्रस्ताव सात महीने तक आगे नहीं बढ़ सका।
इस संबंध में खबरें प्रकाशित होने के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हुई। मुख्य विकास अधिकारी सार्थक अग्रवाल की अध्यक्षता में सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया गया कि रिटेनिंग वॉल निर्माण के लिए अब तकनीकी परीक्षण की जरूरत नहीं है और 8.72 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को इसी आधार पर स्वीकृति के लिए शासन भेजा जाएगा।
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इनसेट
ढाई मीटर जमीन के नीचे बनेगी दीवार, शासन की मंजूरी का इंतजार
बैठक में तकनीकी टीम और संबंधित अधिकारियों ने जलभराव के निस्तारण के लिए रिटेनिंग वॉल के निर्माण को सबसे कारगर विकल्प माना। तय किया गया कि विद्यालय की चारदीवारी के चारों तरफ लगभग ढाई मीटर जमीन के नीचे तक रिटेनिंग वॉल बनाई जाएगी, ताकि जलभराव की समस्या का समाधान हो सके। अब इसी के अनुरूप प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जा रहा है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
इनसेट
विभागों में आपसी तालमेल का अभाव, बच्चों ने भुगता खामियाजा
-पूरे प्रकरण में श्रम विभाग, लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग के मध्य आपसी तालमेल का अभाव देखा गया। इसी का नतीजा रहा कि सात महीने से मामले का निस्तारण नहीं हो सका और तकनीकी परीक्षण के फेर में परियोजना अटकी रही। इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। सर्वाधिक दिक्कत हाईस्कूल के 140 विद्यार्थियों को हुई, जिनका पाठ्यक्रम पिछड़ने की आशंका बनी हुई है और भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। वहीं, इस पूरे मामले में विभागीय कार्यशैली पर सवाल भी खड़े किए हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि जिस तकनीकी परीक्षण की अब जरूरत ही नहीं महसूस की जा रही है, उसके चक्कर में पूर्व में 20 अनुस्मारक क्यों भेजे गए? यदि यही इस समस्या के निस्तारण का विकल्प था तो अधिकारियों ने पहले इस पर अमल क्यों नहीं कर लिया?
वर्जन..
तीनों विभागों की बैठक में जलभराव की समस्या के निस्तारण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। तकनीकी परीक्षण को लेकर अब कोई बाधा नहीं बची है। प्रस्ताव शासन स्तर पर भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। -सार्थक अग्रवाल, सीडीओ, बस्ती
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विद्यालय परिसर में जलभराव के स्थायी समाधान के लिए सिंचाई विभाग के सरयू नहर खंड-4 ने फरवरी में ही चहारदीवारी के चारों तरफ रिटेनिंग वॉल बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था। इसकी अनुमानित लागत 8.72 करोड़ रुपये रखी गई थी। निर्माण से पहले तकनीकी परीक्षण के लिए लोक निर्माण विभाग के भवन सेल, अयोध्या को पत्र भेजा गया था। परीक्षण के लिए आईआईटी रुड़की की मदद लेने का विकल्प भी सामने आया, लेकिन अनुमति और अग्रिम कार्रवाई के इंतजार में प्रस्ताव सात महीने तक आगे नहीं बढ़ सका।
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इस संबंध में खबरें प्रकाशित होने के बाद विभागीय स्तर पर हलचल तेज हुई। मुख्य विकास अधिकारी सार्थक अग्रवाल की अध्यक्षता में सिंचाई विभाग और लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई। इसमें निर्णय लिया गया कि रिटेनिंग वॉल निर्माण के लिए अब तकनीकी परीक्षण की जरूरत नहीं है और 8.72 करोड़ रुपये के प्रस्ताव को इसी आधार पर स्वीकृति के लिए शासन भेजा जाएगा।
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ढाई मीटर जमीन के नीचे बनेगी दीवार, शासन की मंजूरी का इंतजार
बैठक में तकनीकी टीम और संबंधित अधिकारियों ने जलभराव के निस्तारण के लिए रिटेनिंग वॉल के निर्माण को सबसे कारगर विकल्प माना। तय किया गया कि विद्यालय की चारदीवारी के चारों तरफ लगभग ढाई मीटर जमीन के नीचे तक रिटेनिंग वॉल बनाई जाएगी, ताकि जलभराव की समस्या का समाधान हो सके। अब इसी के अनुरूप प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जा रहा है। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा।
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विभागों में आपसी तालमेल का अभाव, बच्चों ने भुगता खामियाजा
-पूरे प्रकरण में श्रम विभाग, लोक निर्माण विभाग और सिंचाई विभाग के मध्य आपसी तालमेल का अभाव देखा गया। इसी का नतीजा रहा कि सात महीने से मामले का निस्तारण नहीं हो सका और तकनीकी परीक्षण के फेर में परियोजना अटकी रही। इसका खामियाजा विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है। सर्वाधिक दिक्कत हाईस्कूल के 140 विद्यार्थियों को हुई, जिनका पाठ्यक्रम पिछड़ने की आशंका बनी हुई है और भविष्य पर संकट मंडरा रहा है। वहीं, इस पूरे मामले में विभागीय कार्यशैली पर सवाल भी खड़े किए हैं। सबसे बड़ा सवाल है कि जिस तकनीकी परीक्षण की अब जरूरत ही नहीं महसूस की जा रही है, उसके चक्कर में पूर्व में 20 अनुस्मारक क्यों भेजे गए? यदि यही इस समस्या के निस्तारण का विकल्प था तो अधिकारियों ने पहले इस पर अमल क्यों नहीं कर लिया?
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तीनों विभागों की बैठक में जलभराव की समस्या के निस्तारण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। तकनीकी परीक्षण को लेकर अब कोई बाधा नहीं बची है। प्रस्ताव शासन स्तर पर भेजा जाएगा। स्वीकृति मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू कराया जाएगा। -सार्थक अग्रवाल, सीडीओ, बस्ती