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Basti News: बूढ़े ससुर बने परिवार के खेवनहार...डेढ़ साल बीते, पति के हत्यारों तक नहीं पहुंच सकी पुलिस

Fri, 21 Nov 2025 01:32 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 21 Nov 2025 01:32 AM IST
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The elderly father-in-law became the family's savior, a year and a half passed, and the police could not reach the husband's killers.
हरिकान्त की पत्नी गुंजा देवी और पिता भाष्कर
बस्ती। मुंडेरवा थाना क्षेत्र के रामपुर रेवटी गांव निवासी हरिकांत (35) की गला रेत कर की गई हत्या डेढ़ साल बाद भी अबूझ पहले बनी है। शुरुआती तफ्तीश में पुलिस ने खूब तेजी दिखाई। कई संदिग्धों को उठाया। पूछताछ की, बाद में क्लू न मिलने की बात कहकर संदिग्धों को छोड़ दिया गया। पीड़ित परिवार ने हत्याकांड से पर्दा उठाने के लिए एसपी से लेकर सीएम तक गुहार लगाई, मगर पुलिस असली कातिल को ढूंढ़ने में अब तक नाकाम है।
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मृतक की पत्नी रोते हुए बोल पड़ती है कि उनके परिवार का खेवनहार अब बूढ़े ससुर हैं। प्रदेश सरकार के जीरो टॉलरेंस नीति के बाद उनके पति के कातिलों तक पुलिस नहीं पहुंच सकी है। तीन मई 2024 को हुई हरिकांत हत्या की जांच नवंबर 2024 से गोरखपुर की एफएस सेल भी कर चुकी है, मगर वह भी हरिकांत के कातिलों तक नहीं पहुंच सकी। उधर, मुंडेरवा के थानेदार प्रदीप कुमार सिंह का कहना है कि 26 अगस्त से इस हत्याकांड की जांच बस्ती पुलिस की क्राइम ब्रांच टीम कर रही है।
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हरिकांत के भाई संतोष का आरोप है कि पुलिस सबकुछ जानते हुए मामले को उलझाए हुए हैं। उनका कहना है कि हत्या जैसे मामले में आरोपियों को पकड़ने में पुलिस के डेढ़ साल से अधिक वक्त लग जा रहे हैं तो छोटे-मोटे मामले का क्या हाल होता होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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बता दें कि रामपुर रेवटी गांव में तीन मई 2024 की रात हरिकांत पिता भाष्कर गुप्ता के पास बिस्तर लगाकर सो रहा था। रात करीब 11 बजे उसके मोबाइल पर किसी का फोन आया था। वह उससे मिलने चला गया था। रात करीब एक बजे वह लहूलुहान स्थिति में घर पहुंचा। उसके गर्दन का आधा हिस्सा कटा था और मुंह में कपड़ा ठूंसा हुआ था। दोनों हाथ भी बंधे थे।
परिवार वालों के मुताबिक हरिकांत ने इशारे से बताया था कि उसे तीन लोग घर से पांच सौ मीटर दूर बनकटी मार्ग पर ले गए और गला रेतकर भाग गए। परिवार के लोग उसे जिला अस्पताल ले गए थे जहां उसे मृत घोषित कर दिया गया था।
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आर्थिक तंगी में सरकारी स्कूल में पढ़ने लगे बच्चे
हरिकांत की पत्नी गुंजा देवी का कहना है कि पति की हत्या के बाद बूढ़े ससुर पर परिवार का खर्च चलाने की जिम्मेदारी आई गई है। तीन पुत्रियों काजल (14), आंचल (12), अन्नया (6) और एक बेटे अभय (10) पहले प्राइवेट स्कूल में पढ़ते थे। आर्थिक तंगी के कारण बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ाना पड़ रहा है, जबकि पति की इच्छा बच्चों को अच्छे स्कूल में पढ़ाकर अफसर बनाने की थी। हरिकांत के पिता भाष्कर रोते हुए कहते हैं कि उनके न रहने पर बच्चों का भरण-पोषण कैसे होगा, इसकी चिंता सता रही है। भाई संतोष का कहना है कि हरिकांत के कातिलों को सजा दिलाकर ही चैन की सांस लेंगे।
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कई पुलिस अफसर बदले मगर नहीं उठा पाए हत्याकांड से पर्दा
डेढ़ साल के भीतर जिले के दो आईजी, दो एसपी, सर्किल के दो सीओ और मुंडेरवा के चार थानेदार बदल चुके हैं, मगर हरिकांत हत्याकांड का खुलासा किसी के कार्यकाल में नहीं हो पाया। इससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठना लाजिमी है।

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कोट
इस मामले की तफ्तीश अपराध शाखा को सौंपी गई है। कुछ बिंदुओं पर उच्चाधिकारियों के निर्देश के अनुसार गहन छानबीन की जा रही है। जल्द पुलिस सच्चाई सामने लाने में कामयाब होगी।

-स्वर्णिमा सिंह, सीओ रुधौली
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