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घाघरा खतरे के निशान के करीब
ब्यूरो अमर उजाला/ बस्ती
Updated Mon, 18 Jul 2016 11:40 PM IST
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विक्रमजोत गौरियानयन के पास कटा बंधा।
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घाघरा का लगातार बढ़ते जलस्तर और कटान के चलते बंधे के किनारे बसे करीब दो दर्जन गांव वालों की नींद उड़ गई है। खतरे के निशान से महज पांच सेमी दूर बह रही घाघरा के जल्द ही इसे पार कर जाने की संभावना है। दुबौलिया के टकटकवा गांव के पास रिंग रोड पानी के दबाव से फट गया है जबकि लोलपुर बंधे के पास सोमवार सुबह नौ बजे से करीब चार मीटर कटान हुई। देर शाम तक यहां कटान भीषण रुख अख्तियार कर चुकी थी। गांव वालों की सूचना पर प्रशासनिक अमले ने लोलपुर- विक्रमजोत बंधे पर डेरा डाल दिया है।
लोलपुर-विक्रमजोत बंधे के नौ नंबर स्पर के पास सोमवार सुबह भीषण कटान शुरू हुई। देखते हि देखते 12 बजे तक बंधे के पास का पांच मीटर हिस्सा धारा में समा गया। महत्वपूर्ण हिस्सा कटते ही गांव वालों में हाहाकार मच गई। यहां लगातार बोल्डर और ईट गिट्टी आदि डाली जा रही है लेकिन स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण नहीं हो पा रही है। मौके पर बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता राजीव कुमार सिंह, जेई ज्ञानप्रकाश, दया शंकर, एसडीएम हरिश्चंद्र सिंह, नायब तहसीलदार विजय सिंह आदि डटे हैं।
केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक सोमवार शाम छह बजे घाघरा का जल स्तर 92:685 मीटर था जो कि लगातार आधा सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। 1500 मीटर लंबे मीटर बांध का आधा हिस्सा संवेदनशील बन गया है। नदी स्थान बदल बदल कर रैंपो को काट रही है। जिस गति से कार्य हो रहा है उससे संकट बढ़ सकता है।
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लोलपुर-विक्रमजोत बंधे के नौ नंबर स्पर के पास सोमवार सुबह भीषण कटान शुरू हुई। देखते हि देखते 12 बजे तक बंधे के पास का पांच मीटर हिस्सा धारा में समा गया। महत्वपूर्ण हिस्सा कटते ही गांव वालों में हाहाकार मच गई। यहां लगातार बोल्डर और ईट गिट्टी आदि डाली जा रही है लेकिन स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण नहीं हो पा रही है। मौके पर बाढ़ विभाग के अधिशासी अभियंता राजीव कुमार सिंह, जेई ज्ञानप्रकाश, दया शंकर, एसडीएम हरिश्चंद्र सिंह, नायब तहसीलदार विजय सिंह आदि डटे हैं।
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केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक सोमवार शाम छह बजे घाघरा का जल स्तर 92:685 मीटर था जो कि लगातार आधा सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। 1500 मीटर लंबे मीटर बांध का आधा हिस्सा संवेदनशील बन गया है। नदी स्थान बदल बदल कर रैंपो को काट रही है। जिस गति से कार्य हो रहा है उससे संकट बढ़ सकता है।
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