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Basti News: गेम खेलने की लत से मस्तिष्क पर दुष्प्रभाव... डिप्रेशन में जा रहे बच्चे
Thu, 23 May 2024 01:53 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 23 May 2024 01:53 AM IST
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-स्कूलों में अवकाश के बाद बच्चे हुए मोबाइल के आदी, गेम की लगी लत
-मस्तिष्क के अलावा गर्दन की हड्डी और आंखों को भी पहुंच रहा नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। यदि आपके बच्चों को मोबाइल पर घंटों गेम खेलने की आदत है तो यह गंभीर परेशानियों का कारण बन सकती है। मोबाइल पर खेलने वाले गेम बच्चों में कई तरह के शारीरिक और मानसिक विकारों का कारण तो बनते ही हैं, गेम के कारण डिप्रेशन में भी बच्चे चले जा रहे हैं। इससे बच्चों के मस्तिष्क पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा गर्दन की हड्डी भी टेढ़ी हो रही है तो आंखों पर भी लगातार मोबाइल चलाने से जोर पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को इस लत से अचानक से निकाल पाना मुश्किल है, लेकिन प्रयास किया जाय तो बच्चों की मोबाइल से दूरी बन सकती है। मोबाइल की जगह बच्चे अगर शारीरिक रूप से खेलकूद में शामिल हों तो उनके लिए यह फायदेमंद रहेगा।
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. एके दुबे का कहना है कि मोबाइल में खेले जाने वाला गेम एक काल्पनिक दुनिया का अहसास कराते हैं। पहले क्रिकेट, कबड्डी, फुटबॉल, वॉलीबाल और खो-खो आदि खेल से बच्चों में शारीरिक रूप से विकास होता था। वजन के साथ-साथ लंबाई बढ़ती थी और परिश्रम के कारण फेफड़े भी मजबूत हुआ करते थे। लेकिन अब इन खेलों की जगह मोबाइल गेम ने ले लिया है। बच्चों का ज्यादातर समय मोबाइल में ही बीत रहा है। कई गेम ऐसे हैं, जो बच्चों के मानसिक विकास में बाधक बन रहे हैं। दिनभर मोबाइल में व्यस्त रहने के बाद जब बच्चे रात में सो रहे हैं तो उस वक्त गेम से जुड़ी बातें बोल रहे हैं। यह गंभीर है। परिजनों को चाहिए कि वह अपने बच्चों को मोबाइल से दूर रखें। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शारिब सुहेल का कहना था कि अधिक समय तक मोबाइल स्क्रीन पर नजर रखने के कारण आंखों की समस्या से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इसमें बच्चे भी शामिल हैं। अचानक से बच्चों को मोबाइल से दूर कर पाना कठिन है, लेकिन धीरे-धीरे कर उन्हें मोबाइल स्क्रीन से दूर करने का प्रयास करना चाहिए। अगर बच्चों को कम उम्र में ही चश्मा लग गया तो फिर लंबे समय तक चश्मा लगाना होगा और आंखों की दवा चलानी पड़ेगी। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके गुप्ता का कहना था कि लगातार मोबाइल चलाने से बच्चों के गर्दन की हड्डी टेढ़ी हो रही है। गेम और रील्स देखने के कारण बच्चों का मन मोबाइल पर ज्यादा लग रहा है। परिवार के लोग भी बच्चों की जिद को पूरी करने के लिए मोबाइल थमा दे रहे हैं। अधिक समय तक गर्दन टेंढ़ी कर मोबाइल देखने से रीढ़ व गर्दन की हड्डी टेढ़ी होने की शिकायतें मिल रहीं हैं। कम समय में ही अगर बच्चों में हड्डी रोग से संबंधित बीमारी हो गई तो लंबे समय के लिए उपचार कराना पड़ेगा।
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-मस्तिष्क के अलावा गर्दन की हड्डी और आंखों को भी पहुंच रहा नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। यदि आपके बच्चों को मोबाइल पर घंटों गेम खेलने की आदत है तो यह गंभीर परेशानियों का कारण बन सकती है। मोबाइल पर खेलने वाले गेम बच्चों में कई तरह के शारीरिक और मानसिक विकारों का कारण तो बनते ही हैं, गेम के कारण डिप्रेशन में भी बच्चे चले जा रहे हैं। इससे बच्चों के मस्तिष्क पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। इसके अलावा गर्दन की हड्डी भी टेढ़ी हो रही है तो आंखों पर भी लगातार मोबाइल चलाने से जोर पड़ रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों को इस लत से अचानक से निकाल पाना मुश्किल है, लेकिन प्रयास किया जाय तो बच्चों की मोबाइल से दूरी बन सकती है। मोबाइल की जगह बच्चे अगर शारीरिक रूप से खेलकूद में शामिल हों तो उनके लिए यह फायदेमंद रहेगा।
जिला अस्पताल के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. एके दुबे का कहना है कि मोबाइल में खेले जाने वाला गेम एक काल्पनिक दुनिया का अहसास कराते हैं। पहले क्रिकेट, कबड्डी, फुटबॉल, वॉलीबाल और खो-खो आदि खेल से बच्चों में शारीरिक रूप से विकास होता था। वजन के साथ-साथ लंबाई बढ़ती थी और परिश्रम के कारण फेफड़े भी मजबूत हुआ करते थे। लेकिन अब इन खेलों की जगह मोबाइल गेम ने ले लिया है। बच्चों का ज्यादातर समय मोबाइल में ही बीत रहा है। कई गेम ऐसे हैं, जो बच्चों के मानसिक विकास में बाधक बन रहे हैं। दिनभर मोबाइल में व्यस्त रहने के बाद जब बच्चे रात में सो रहे हैं तो उस वक्त गेम से जुड़ी बातें बोल रहे हैं। यह गंभीर है। परिजनों को चाहिए कि वह अपने बच्चों को मोबाइल से दूर रखें। नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. शारिब सुहेल का कहना था कि अधिक समय तक मोबाइल स्क्रीन पर नजर रखने के कारण आंखों की समस्या से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ गई है। इसमें बच्चे भी शामिल हैं। अचानक से बच्चों को मोबाइल से दूर कर पाना कठिन है, लेकिन धीरे-धीरे कर उन्हें मोबाइल स्क्रीन से दूर करने का प्रयास करना चाहिए। अगर बच्चों को कम उम्र में ही चश्मा लग गया तो फिर लंबे समय तक चश्मा लगाना होगा और आंखों की दवा चलानी पड़ेगी। हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. डीके गुप्ता का कहना था कि लगातार मोबाइल चलाने से बच्चों के गर्दन की हड्डी टेढ़ी हो रही है। गेम और रील्स देखने के कारण बच्चों का मन मोबाइल पर ज्यादा लग रहा है। परिवार के लोग भी बच्चों की जिद को पूरी करने के लिए मोबाइल थमा दे रहे हैं। अधिक समय तक गर्दन टेंढ़ी कर मोबाइल देखने से रीढ़ व गर्दन की हड्डी टेढ़ी होने की शिकायतें मिल रहीं हैं। कम समय में ही अगर बच्चों में हड्डी रोग से संबंधित बीमारी हो गई तो लंबे समय के लिए उपचार कराना पड़ेगा।
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