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Basti News: सरयू तट से होंगे श्रीराम नगरी के दर्शन
Tue, 19 Sep 2023 12:32 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 19 Sep 2023 12:32 AM IST
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अयोध्या विकास प्राधिकरण में जिले की हर्रैया तहसील के 112 गांव शामिल
- अयोध्या धाम के आभा विस्तार में बस्ती हो रही शामिल- हनुमान द्वार, रिंग रोड, परिक्रमा मार्ग का खाका तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सरयू नदी पहले से है...अब प्रभु श्रीराम की अयोध्या भी बस्ती आने को आतुर है। इस ओर अयोध्या के कदम बढ़ चले हैं। सरयू इस पार कंकरीट की नई दुनिया बसाई जा रही है। नव्य-भव्य अयोध्या के नए आभा मंडल में जिले का पश्चिमी हिस्सा भी शामिल होने जा रहा है। प्रभु श्रीराम की स्मृतियों के साथ बस्ती अब अयोध्या के विहंगम दृश्य को भी अपने आंचल में संजोएगी।
गुरु वशिष्ठ की इस धरा पर सरयू अवध की आबोहवा लिए प्रभु राम के उद्भव काल से ही हिलोरे ले रही है। अब अयोध्या भी सरयू के साथ इस धरा को छूने लगी है। इसकी नींव अटल के स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के पहुंचते ही पड़ गई थी। 13 वर्ष पहले फोरलेन बनने से बस्ती और अयोध्या के बीच आवागमन आसान हो गया है। इधर वैश्विक पहचान की मुहिम में अयोध्या के आभा का विस्तार शुरू हुआ तो जनपद सीमा घघौआ से अयोध्या के बीच का सूनापन खत्म होने लगा। व्यापार की नई संभावना देख हाईवे के दोनों तरफ सरयू के दियारा क्षेत्र में होटल, रिसार्ट जैसे व्यावसायिक काप्लेक्टस के रूप में कंकरीट की नई दुनिया बस रही है।
अयोध्या पुल से जनपद सीमा घघौआ की ओर निजी क्षेत्र का निर्माण तेजी के साथ हो रहा है। उधर अयोध्या धाम खुद आधा दर्जन महत्वपूर्ण परियोजनाओं के साथ जिले में उतर रहा है। इन परियोजना का खाका तैयार हो चुका है। अब देरी है निर्माण शुरू होने की। अयोध्या का रिंग रोड, 84 कोसी परिक्रमा मार्ग जिले के परशुरामपुर, विक्रमजोत और दुबौलिया ब्लॉक क्षेत्र से होकर गुजरेंगे। वहीं प्रभु श्रीराम के प्राक्ट्य स्थल से जिले के मखौड़ा धाम तक कॉरिडोर का निर्माण भी प्रस्तावित है। अयोध्या विकास प्राधिकरण में जिले की हर्रैया तहसील के 112 गांव शामिल किए जा रहे हैं। सबकुछ ठीक रहा तो इन परियोजनाओं के मूर्तरूप लेते ही भव्य, नव्य, दिव्य अयोध्या के साथ बस्ती भी आध्यात्म, व्यापार, तरक्की की नई चमक बिखेरेगी।
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अपनी धरोहर से बिछड़ रही थी बस्ती
80 के दशक से बस्ती अपनी अमूल्य धरोहर से बिछड़ने लगी। वर्ष 1988 में गौतम बुद्ध के जन्मस्थली से जुड़ा अंचल जिले का उत्तरी भूभाग कटकर सिद्धार्थनगर के रूप में नए जिले का स्वरूप ले लिया। नौ साल बाद 1997 में जिले का पूर्वी हिस्सा कटकर संतकबीर नगर जिले के रूप में सृजित हो गया। इस अंचल की मुख्य धरोहर सूफी संत कबीर दास की निर्वाण स्थली मगहर थी। पूर्वी और उत्तरी अंचल का काफी हिस्सा अलग हो जाने से विकास की दौड़ में यह जिला लंबे समय तक पीछे रहा। आंचल में बची थी तो प्रभु श्रीराम की सरयू और उनके पदचिह्न से जुड़े स्थल, जिनके सहारे अब फिर से विकास की नई इबारत गढ़े जाने की कवायद शुरू हो गई है।
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बस्ती-अयोध्या का त्रेतायुगीन नाता
बस्ती का अयोध्या से त्रेतायुगीन नाता है। यह इच्छाकु वंश के कुल गुरु महर्षि वशिष्ठ की तपोभूमि रही है। यहीं पर चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ ने सरयू के उत्तरी क्षोर पर स्थिति मख धाम में मनवर नदी के तट पर पुत्र कामेष्टि यज्ञ कराई थी। वर्तमान में यह मखौड़ा धाम के नाम से प्रचलित है, जो बस्ती जिले के परशुरामपुर ब्लॉक का हिस्सा है। प्रभु श्रीराम और माता जानकी के पद चिह्न भी यहां है। जिले का रामजानकी मार्ग भी इसी नाते प्रसिद्ध है कि जनकपुर से विवाहोपरांत सीता और राम इसी रास्ते अयोध्या पहुंचे थे।
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किसानों से 7.5046 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू
देश-दुनिया से आने वाले पर्यटकों को बस्ती नए अयोध्या का दर्शन कराने के साथ प्रवेश भी कराएगी। नई अयोध्या के उत्तरी छोर का हनुमान द्वार जिले के लोलपुर और इस्माइलपुर गांव के पास बनेगा। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से चिह्नित 59 किसानों से 7.5046 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस द्वार के बगल में पर्यटकों और दर्शनार्थियों के ठहरने की व्यापक व्यवस्था बन रही है। आधुनिक रेस्टोरेंट और बड़े आयत में गाड़ियों का पार्किंग स्थल होगा। इस परियोजना पर कुल 25 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
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1 हेक्टयर जमीन 30 करोड़ की लागत से अधिग्रहित होगी
अयोध्या के चारों तरफ प्रस्तावित रिंग रोड जिले के हर्रैया तहसील के 13 गांवों से होकर गुजरेगी। इसमें रमहटिया, मझौवा दूबे, एकमा हरदिया, पड़रिया, घिरौली पांडेय, रैदासपुर, बड़ागांव, चौरा, मलौली दुबे, पिकौरा चौबे, एलिया जुग्गाराम, एकमा हिरमिया व रायपुर गांव शामिल हैं। कुल 41 हेक्टयर जमीन 30 करोड़ की लागत से अधिग्रहित होनी है। जिला प्रशासन ने 618 में से 484 किसानों से 25 करोड़ मूल्य की जमीन का रजिस्ट्री भी करा लिया है।
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परिक्रमा मार्ग की भी शुरू हुई तैयारी
84 कोसी परिक्रमा मार्ग मखौड़ा धाम से शुरू होकर जिले में 29 किमी की लंबाई में बनाया जाएगा। इसमें 54 गांवों के 6500 किसानों की भूमि अधिग्रहित की जाएगी। इसके लिए प्रशासन ने भूमि चिह्नांकन (थ्री-डी) की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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मखौड़ा तक बनेगा श्रीराम अवतरण कॉरिडोर
जिले में स्थित पुत्र कामेष्टि यज्ञ स्थल मखौड़ा धाम अयोध्या के श्रीराम लला की प्राक्ट्य स्थली से सीधे जुड़ेगी। इसके लिए श्रीराम अवतरण कॉरिडोर बनाने की योजना है। यह श्रीराम लला के मंदिर से मखौड़ा तक बनेगा। शासन ने बस्ती और अयोध्या जिला प्रशासन से आख्या तलब कर ली है। जिसमें परियोजना का खाका तैयार कर संपूर्ण विवरण के साथ उपलब्ध कराना है।
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अयोध्या से जुड़ी सभी परियोजनाओं में तेजी के साथ कार्य कराया जा रहा है। रिंग रोड, 84 कोसी परिक्रमा मार्ग, हनुमान द्वार के लिए शेष जमीनों का अधिग्रहण जल्द कर लिया जाएगा। संबंधित विभाग को अधिग्रहण की कार्रवाई पूर्ण करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। समीक्षा भी की जा रही है।
अंद्रा वामसी, डीएम।
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- अयोध्या धाम के आभा विस्तार में बस्ती हो रही शामिल- हनुमान द्वार, रिंग रोड, परिक्रमा मार्ग का खाका तैयार
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। सरयू नदी पहले से है...अब प्रभु श्रीराम की अयोध्या भी बस्ती आने को आतुर है। इस ओर अयोध्या के कदम बढ़ चले हैं। सरयू इस पार कंकरीट की नई दुनिया बसाई जा रही है। नव्य-भव्य अयोध्या के नए आभा मंडल में जिले का पश्चिमी हिस्सा भी शामिल होने जा रहा है। प्रभु श्रीराम की स्मृतियों के साथ बस्ती अब अयोध्या के विहंगम दृश्य को भी अपने आंचल में संजोएगी।
गुरु वशिष्ठ की इस धरा पर सरयू अवध की आबोहवा लिए प्रभु राम के उद्भव काल से ही हिलोरे ले रही है। अब अयोध्या भी सरयू के साथ इस धरा को छूने लगी है। इसकी नींव अटल के स्वर्णिम चतुर्भुज योजना के पहुंचते ही पड़ गई थी। 13 वर्ष पहले फोरलेन बनने से बस्ती और अयोध्या के बीच आवागमन आसान हो गया है। इधर वैश्विक पहचान की मुहिम में अयोध्या के आभा का विस्तार शुरू हुआ तो जनपद सीमा घघौआ से अयोध्या के बीच का सूनापन खत्म होने लगा। व्यापार की नई संभावना देख हाईवे के दोनों तरफ सरयू के दियारा क्षेत्र में होटल, रिसार्ट जैसे व्यावसायिक काप्लेक्टस के रूप में कंकरीट की नई दुनिया बस रही है।
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अपनी धरोहर से बिछड़ रही थी बस्ती
80 के दशक से बस्ती अपनी अमूल्य धरोहर से बिछड़ने लगी। वर्ष 1988 में गौतम बुद्ध के जन्मस्थली से जुड़ा अंचल जिले का उत्तरी भूभाग कटकर सिद्धार्थनगर के रूप में नए जिले का स्वरूप ले लिया। नौ साल बाद 1997 में जिले का पूर्वी हिस्सा कटकर संतकबीर नगर जिले के रूप में सृजित हो गया। इस अंचल की मुख्य धरोहर सूफी संत कबीर दास की निर्वाण स्थली मगहर थी। पूर्वी और उत्तरी अंचल का काफी हिस्सा अलग हो जाने से विकास की दौड़ में यह जिला लंबे समय तक पीछे रहा। आंचल में बची थी तो प्रभु श्रीराम की सरयू और उनके पदचिह्न से जुड़े स्थल, जिनके सहारे अब फिर से विकास की नई इबारत गढ़े जाने की कवायद शुरू हो गई है।
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बस्ती-अयोध्या का त्रेतायुगीन नाता
बस्ती का अयोध्या से त्रेतायुगीन नाता है। यह इच्छाकु वंश के कुल गुरु महर्षि वशिष्ठ की तपोभूमि रही है। यहीं पर चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ ने सरयू के उत्तरी क्षोर पर स्थिति मख धाम में मनवर नदी के तट पर पुत्र कामेष्टि यज्ञ कराई थी। वर्तमान में यह मखौड़ा धाम के नाम से प्रचलित है, जो बस्ती जिले के परशुरामपुर ब्लॉक का हिस्सा है। प्रभु श्रीराम और माता जानकी के पद चिह्न भी यहां है। जिले का रामजानकी मार्ग भी इसी नाते प्रसिद्ध है कि जनकपुर से विवाहोपरांत सीता और राम इसी रास्ते अयोध्या पहुंचे थे।
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किसानों से 7.5046 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू
देश-दुनिया से आने वाले पर्यटकों को बस्ती नए अयोध्या का दर्शन कराने के साथ प्रवेश भी कराएगी। नई अयोध्या के उत्तरी छोर का हनुमान द्वार जिले के लोलपुर और इस्माइलपुर गांव के पास बनेगा। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से चिह्नित 59 किसानों से 7.5046 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। इस द्वार के बगल में पर्यटकों और दर्शनार्थियों के ठहरने की व्यापक व्यवस्था बन रही है। आधुनिक रेस्टोरेंट और बड़े आयत में गाड़ियों का पार्किंग स्थल होगा। इस परियोजना पर कुल 25 करोड़ खर्च किए जाएंगे।
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1 हेक्टयर जमीन 30 करोड़ की लागत से अधिग्रहित होगी
अयोध्या के चारों तरफ प्रस्तावित रिंग रोड जिले के हर्रैया तहसील के 13 गांवों से होकर गुजरेगी। इसमें रमहटिया, मझौवा दूबे, एकमा हरदिया, पड़रिया, घिरौली पांडेय, रैदासपुर, बड़ागांव, चौरा, मलौली दुबे, पिकौरा चौबे, एलिया जुग्गाराम, एकमा हिरमिया व रायपुर गांव शामिल हैं। कुल 41 हेक्टयर जमीन 30 करोड़ की लागत से अधिग्रहित होनी है। जिला प्रशासन ने 618 में से 484 किसानों से 25 करोड़ मूल्य की जमीन का रजिस्ट्री भी करा लिया है।
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परिक्रमा मार्ग की भी शुरू हुई तैयारी
84 कोसी परिक्रमा मार्ग मखौड़ा धाम से शुरू होकर जिले में 29 किमी की लंबाई में बनाया जाएगा। इसमें 54 गांवों के 6500 किसानों की भूमि अधिग्रहित की जाएगी। इसके लिए प्रशासन ने भूमि चिह्नांकन (थ्री-डी) की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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मखौड़ा तक बनेगा श्रीराम अवतरण कॉरिडोर
जिले में स्थित पुत्र कामेष्टि यज्ञ स्थल मखौड़ा धाम अयोध्या के श्रीराम लला की प्राक्ट्य स्थली से सीधे जुड़ेगी। इसके लिए श्रीराम अवतरण कॉरिडोर बनाने की योजना है। यह श्रीराम लला के मंदिर से मखौड़ा तक बनेगा। शासन ने बस्ती और अयोध्या जिला प्रशासन से आख्या तलब कर ली है। जिसमें परियोजना का खाका तैयार कर संपूर्ण विवरण के साथ उपलब्ध कराना है।
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अयोध्या से जुड़ी सभी परियोजनाओं में तेजी के साथ कार्य कराया जा रहा है। रिंग रोड, 84 कोसी परिक्रमा मार्ग, हनुमान द्वार के लिए शेष जमीनों का अधिग्रहण जल्द कर लिया जाएगा। संबंधित विभाग को अधिग्रहण की कार्रवाई पूर्ण करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। समीक्षा भी की जा रही है।
अंद्रा वामसी, डीएम।