{"_id":"6ae118b3137d083c77011c6f","slug":"notices-issued-to-47-secretaries-of-defunct-cooperative-societies-action-to-be-taken-if-they-fail-to-return-basti-news-c-207-1-bst1005-170431-2026-10-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: बंद सहकारी समितियों के 47 सचिवों को नोटिस, नहीं लौटे तो होगी कार्रवाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: बंद सहकारी समितियों के 47 सचिवों को नोटिस, नहीं लौटे तो होगी कार्रवाई
विज्ञापन
बस्ती। सहकारी समितियों के सचिवों की हड़ताल से खाद-बीज वितरण व्यवस्था प्रभावित होने के बीच सहकारिता विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। विभाग की गोपनीय निरीक्षण टीम के सर्वे में बंद मिलीं 47 समितियों के सचिवों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। काम पर नहीं लौटने वाले सचिवों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। वहीं, रबी सीजन में गेहूं की बोआई की तैयारी कर रहे किसानों को खाद-बीज के लिए निजी केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।
जिले की 121 सहकारी समितियों पर तैनात सचिव उत्तर प्रदेश संयुक्त सहकारी समिति कर्मचारी संघ के बैनर तले 22 अक्तूबर से लखनऊ के इको गार्डन में अनिश्चितकालीन धरने पर हैं। पांच दिन से समितियों पर ताले लटकने के कारण किसान खाद और बीज के लिए परेशान हैं। धान की कटाई के बाद गेहूं की बोआई की तैयारी में जुटे किसानों को समितियों से खाद-बीज नहीं मिल पा रहा है।
ऐसे में उन्हें निजी केंद्रों से खरीदारी करनी पड़ रही है, जहां उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। किसान परमात्मा प्रसाद, राधेश्याम और कुलदीप समेत अन्य का कहना है कि 20-50 रुपये बचाने के चक्कर में गेहूं की बोआई पिछड़ गई तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इसलिए वे मजबूरी में महंगे दाम पर खाद-बीज खरीद रहे हैं। सहकारी समितियों के बंद रहने से निजी केंद्रों पर किसानों की भीड़ बढ़ रही है।
विज्ञापन
जिलाध्यक्ष ने आर-पार की लड़ाई बताया : विभागीय सर्वे रिपोर्ट के आधार पर 47 समितियों के सचिवों को नोटिस जारी किए जाने के बाद भी संगठन ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है। संगठन के जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार उपाध्याय का कहना है कि यह आर-पार की लड़ाई है। नियमित वेतनमान मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारी कमीशन छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन वेतन राज्य कोष से जारी किया जाना चाहिए। नोटिस के संबंध में दिनेश उपाध्याय ने कहा कि एआर कोऑपरेटिव उन्हें नोटिस नहीं दे सकते, क्योंकि विभाग ने अदालत में उन्हें अपना कर्मचारी माना ही नहीं है। ऐसे में सचिव नोटिस से डरने वाले नहीं हैं।
संचालक मंडल के अधिकार का उठा रहे मुद्दा : संगठन का कहना है कि सभी 121 सहकारी समितियां संचालक मंडल के अधीन संचालित होती हैं। इनमें अध्यक्ष समेत अन्य सदस्य शामिल हैं। संगठन के मुताबिक, समितियों के सचिवों और कर्मचारियों को हटाने या नोटिस देने का अधिकार संचालक मंडल को है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि संचालक मंडल की ओर से कोई निर्णय लिया जाता है तो उसका जवाब दिया जाएगा।
विकल्प के तौर पर दूसरे केंद्रों से करा रहे वितरण : सहकारी समितियों पर तालाबंदी के कारण विभाग ने खाद वितरण के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की है। एआर कोऑपरेटिव रविशंकर ने बताया कि निजी क्षेत्र, इफ्को और अन्य क्रय केंद्रों के माध्यम से खाद का वितरण कराया जा रहा है। उनके अनुसार, जिले में खाद का पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन समितियों के बंद रहने से उसका पूरी तरह वितरण नहीं हो पा रहा है। ा
विज्ञापन
जिले की 121 सहकारी समितियों पर तैनात सचिव उत्तर प्रदेश संयुक्त सहकारी समिति कर्मचारी संघ के बैनर तले 22 अक्तूबर से लखनऊ के इको गार्डन में अनिश्चितकालीन धरने पर हैं। पांच दिन से समितियों पर ताले लटकने के कारण किसान खाद और बीज के लिए परेशान हैं। धान की कटाई के बाद गेहूं की बोआई की तैयारी में जुटे किसानों को समितियों से खाद-बीज नहीं मिल पा रहा है।
विज्ञापन
ऐसे में उन्हें निजी केंद्रों से खरीदारी करनी पड़ रही है, जहां उन्हें अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। किसान परमात्मा प्रसाद, राधेश्याम और कुलदीप समेत अन्य का कहना है कि 20-50 रुपये बचाने के चक्कर में गेहूं की बोआई पिछड़ गई तो उत्पादन पर असर पड़ सकता है। इसलिए वे मजबूरी में महंगे दाम पर खाद-बीज खरीद रहे हैं। सहकारी समितियों के बंद रहने से निजी केंद्रों पर किसानों की भीड़ बढ़ रही है।
विज्ञापन
जिलाध्यक्ष ने आर-पार की लड़ाई बताया : विभागीय सर्वे रिपोर्ट के आधार पर 47 समितियों के सचिवों को नोटिस जारी किए जाने के बाद भी संगठन ने आंदोलन जारी रखने की बात कही है। संगठन के जिलाध्यक्ष दिनेश कुमार उपाध्याय का कहना है कि यह आर-पार की लड़ाई है। नियमित वेतनमान मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारी कमीशन छोड़ने को तैयार हैं, लेकिन वेतन राज्य कोष से जारी किया जाना चाहिए। नोटिस के संबंध में दिनेश उपाध्याय ने कहा कि एआर कोऑपरेटिव उन्हें नोटिस नहीं दे सकते, क्योंकि विभाग ने अदालत में उन्हें अपना कर्मचारी माना ही नहीं है। ऐसे में सचिव नोटिस से डरने वाले नहीं हैं।
संचालक मंडल के अधिकार का उठा रहे मुद्दा : संगठन का कहना है कि सभी 121 सहकारी समितियां संचालक मंडल के अधीन संचालित होती हैं। इनमें अध्यक्ष समेत अन्य सदस्य शामिल हैं। संगठन के मुताबिक, समितियों के सचिवों और कर्मचारियों को हटाने या नोटिस देने का अधिकार संचालक मंडल को है। जिलाध्यक्ष ने कहा कि संचालक मंडल की ओर से कोई निर्णय लिया जाता है तो उसका जवाब दिया जाएगा।
विकल्प के तौर पर दूसरे केंद्रों से करा रहे वितरण : सहकारी समितियों पर तालाबंदी के कारण विभाग ने खाद वितरण के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की है। एआर कोऑपरेटिव रविशंकर ने बताया कि निजी क्षेत्र, इफ्को और अन्य क्रय केंद्रों के माध्यम से खाद का वितरण कराया जा रहा है। उनके अनुसार, जिले में खाद का पर्याप्त स्टॉक है, लेकिन समितियों के बंद रहने से उसका पूरी तरह वितरण नहीं हो पा रहा है। ा