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Basti News: न हरियाली की व्यवस्था... न ही सुरक्षा के इंतजाम
Fri, 22 Mar 2024 02:23 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 22 Mar 2024 02:23 AM IST
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लुंबिनी-दुद्धी मार्ग : सड़क पर आवागमन शुरू होते ही निर्माण एजेंसी ने मुंह मोड़ा, खामियाजा भुगत रहे राहगीर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। लुंबिनी-दुद्धी मार्ग के नाम से नेपाल तक सड़क तो बना दी। इसके बाद जिम्मेदार छोड़कर चले गए। आठ साल पहले सड़क निर्माण के दौरान अंधाधुंध पेड़ों की कटान की गई। इससे इस मार्ग पर वृक्षों की छाया गुम हो गई, लेकिन निर्माण एजेंसी ने नए सिरे से हरियाली नहीं पनपा पाई। जिले में 55 किमी लंबी यह सड़क बिना हरियाली के होकर रह गई है। अब गर्मी में चिलचिलाती धूप में राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बनेगी। वहीं चौक-चौराहों एवं प्रमुख बाजार में इस सड़क पर सुरक्षा के इंतजाम भी नहीं है।
यह मार्ग टांडा पुल के पास बस्ती सीमा में प्रवेश कर रहा है। रुधौली कस्बे के आगे आमी नदी के पुल के पास तक 55 किमी लंबाई की यह सड़क बस्ती सीमा क्षेत्र में है। वर्ष 2018 में करीब साढ़े तीन सौ करोड़ की लागत से केंद्रीय राज्य सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस सड़क को बनाकर तैयार किया था। आरोप है कि सड़क चालू होते ही निर्माण एजेंसी ने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। टू-लेन विद पिप्ड सोल्डर यह सड़क बाजार में बिना बैरिकेडिंग के छोड़ दी गई।
कई चौराहों पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। संकेतांक तक नहीं लगाए गए हैं। जबकि इस सड़क पर प्रतिदिन दो से ढाई लाख रुपये टोल की वसूली हो रही है। बावजूद इसके यात्रियों के लिए समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। सड़क के दोनों तरफ प्रस्तावित हरियाली पनपाने की योजना धराशायी हो गई। पुराने पेड़ सड़क चौड़ीकरण में काट दिए गए थे। सड़क के दोनों तरफ छायादार पौधे नहीं लगाए गए। प्रचंड गर्मी में इस सड़क पर खुले वाहनों से यात्रा कठिन हो जाती है।
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लुंबिनी- दुद्धी मार्ग के किनारे प्रमुख कस्बों एवं बाजार में सुरक्षा की दृष्टि से सड़क के दोनों तरफ बैरिकेडिंग नहीं की गई है। कलवारी चौराहा सबसे संवेदनशील है। यहां रामजानकी मार्ग और लुंबिनी-दुद्दी मार्ग की क्रॉसिंग है। मगर, इन दोनों सड़क परियोजनाओं की ओर से ओवरब्रिज का निर्माण नहीं किया गया है। ऐसे में सड़क पार करते समय राहगीरों को खतरा बना रहता है। इसके आगे कुशौरा और नगर बाजार कस्बे में घनी आबादी के साथ बाजार है। यहां भी बैरिकेडिंग नहीं है।
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शाम के समय बढ़ रहा खतरा
प्रमुख कस्बों और बाजार में शाम के समय खतरा बढ़ जा रहा है। घरेलू सामग्री एवं सब्जी आदि की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ जुटती है। खासकर कुशौरा, नगर बाजार और रुधौली में भीड़ जुटने के चलते लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर चलने वाले वाहनों की रफ्तार थम रही है। खरीदारी के समय लोग सड़क पर पैदल चलते हैं। इससे सड़क सिकुड़ जा रही है। इस दौरान तेज रफ्तार में चलने वाले वाहनों से आमजन को खतरा बना रहता है।
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मूड़घाट से बड़ेवन तक नहीं बनाई सड़क
लुंबिनी-दुद्धी मार्ग की सड़क फुटहिया चौराहे तक बनाई गई है। इसके बाद अयोध्या-बस्ती फोरलेन हाईवे की क्रॉसिंग है। इसी हाईवे में अंडरपास और सर्विस रोड के जरिए इस सड़क को मिला दिया गया है। इसके आगे मूड़घाट चौराहे पर नेपाल जाने वाली इस सड़क का रास्ता अलग होता है। यहां से आगे डेढ़ किमी लंबाई तक यह सड़क नहीं बनाई गई। आबादी होने के नाते मूड़घाट चौराहे पर इस मार्ग का आवागमन फोरलेन सड़क के सर्विस लेन पर निर्भर कर छोड़ दिया गया है। बड़ेवन तक सर्विस रोड से आने के बाद फिर से यह टू-लेन सड़क यात्रियों को मिल रही है।
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टोल प्लाजा पर नहीं है उपचार के इंतजाम
फोरलेन हाईवे की तरह इस सड़क पर टोल वसूली के प्रबंध किए गए हैं। एक्सड़ा चौराहे के पास लुंबिनी-दुद्धी मार्ग का टोल बूथ है। यहां प्रतिदिन औसतन दो से ढाई लाख रुपये नेपाल एवं वाराणसी की ओर जाने वाले वाहनों से टोल वसूली होती है। बावजूद इसके यात्रियों की सुविधा के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। फोरलेन हाईवे अथॉरिटी की तरह इस सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त यात्रियों के लिए एनएचएआई की ओर से एंबुलेंस एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था नहीं है। संवेदनशील मोड़ एवं चौराहों पर संकेतांक एवं रिफलेक्टर भी नहीं लगवाए गए हैं।
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कोट
लुंबिनी-दुद्धी मार्ग की हालत से परिचित नहीं हूं। इसके अनुरूक्षण कार्य के लिए विभाग के पास कोई बजट भी नहीं है। वैसे यह सड़क एनएचएआई के अधीन न होकर केंद्रीय सड़क मंत्रालय के अधीन है। इसका कार्यालय दिल्ली व लखनऊ में है।
-इं. ललित प्रताप, पीडी, एनएचएआई
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। लुंबिनी-दुद्धी मार्ग के नाम से नेपाल तक सड़क तो बना दी। इसके बाद जिम्मेदार छोड़कर चले गए। आठ साल पहले सड़क निर्माण के दौरान अंधाधुंध पेड़ों की कटान की गई। इससे इस मार्ग पर वृक्षों की छाया गुम हो गई, लेकिन निर्माण एजेंसी ने नए सिरे से हरियाली नहीं पनपा पाई। जिले में 55 किमी लंबी यह सड़क बिना हरियाली के होकर रह गई है। अब गर्मी में चिलचिलाती धूप में राहगीरों के लिए परेशानी का सबब बनेगी। वहीं चौक-चौराहों एवं प्रमुख बाजार में इस सड़क पर सुरक्षा के इंतजाम भी नहीं है।
यह मार्ग टांडा पुल के पास बस्ती सीमा में प्रवेश कर रहा है। रुधौली कस्बे के आगे आमी नदी के पुल के पास तक 55 किमी लंबाई की यह सड़क बस्ती सीमा क्षेत्र में है। वर्ष 2018 में करीब साढ़े तीन सौ करोड़ की लागत से केंद्रीय राज्य सड़क परिवहन मंत्रालय ने इस सड़क को बनाकर तैयार किया था। आरोप है कि सड़क चालू होते ही निर्माण एजेंसी ने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। टू-लेन विद पिप्ड सोल्डर यह सड़क बाजार में बिना बैरिकेडिंग के छोड़ दी गई।
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कई चौराहों पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं है। संकेतांक तक नहीं लगाए गए हैं। जबकि इस सड़क पर प्रतिदिन दो से ढाई लाख रुपये टोल की वसूली हो रही है। बावजूद इसके यात्रियों के लिए समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। सड़क के दोनों तरफ प्रस्तावित हरियाली पनपाने की योजना धराशायी हो गई। पुराने पेड़ सड़क चौड़ीकरण में काट दिए गए थे। सड़क के दोनों तरफ छायादार पौधे नहीं लगाए गए। प्रचंड गर्मी में इस सड़क पर खुले वाहनों से यात्रा कठिन हो जाती है।
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लुंबिनी- दुद्धी मार्ग के किनारे प्रमुख कस्बों एवं बाजार में सुरक्षा की दृष्टि से सड़क के दोनों तरफ बैरिकेडिंग नहीं की गई है। कलवारी चौराहा सबसे संवेदनशील है। यहां रामजानकी मार्ग और लुंबिनी-दुद्दी मार्ग की क्रॉसिंग है। मगर, इन दोनों सड़क परियोजनाओं की ओर से ओवरब्रिज का निर्माण नहीं किया गया है। ऐसे में सड़क पार करते समय राहगीरों को खतरा बना रहता है। इसके आगे कुशौरा और नगर बाजार कस्बे में घनी आबादी के साथ बाजार है। यहां भी बैरिकेडिंग नहीं है।
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शाम के समय बढ़ रहा खतरा
प्रमुख कस्बों और बाजार में शाम के समय खतरा बढ़ जा रहा है। घरेलू सामग्री एवं सब्जी आदि की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ जुटती है। खासकर कुशौरा, नगर बाजार और रुधौली में भीड़ जुटने के चलते लुंबिनी-दुद्धी मार्ग पर चलने वाले वाहनों की रफ्तार थम रही है। खरीदारी के समय लोग सड़क पर पैदल चलते हैं। इससे सड़क सिकुड़ जा रही है। इस दौरान तेज रफ्तार में चलने वाले वाहनों से आमजन को खतरा बना रहता है।
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मूड़घाट से बड़ेवन तक नहीं बनाई सड़क
लुंबिनी-दुद्धी मार्ग की सड़क फुटहिया चौराहे तक बनाई गई है। इसके बाद अयोध्या-बस्ती फोरलेन हाईवे की क्रॉसिंग है। इसी हाईवे में अंडरपास और सर्विस रोड के जरिए इस सड़क को मिला दिया गया है। इसके आगे मूड़घाट चौराहे पर नेपाल जाने वाली इस सड़क का रास्ता अलग होता है। यहां से आगे डेढ़ किमी लंबाई तक यह सड़क नहीं बनाई गई। आबादी होने के नाते मूड़घाट चौराहे पर इस मार्ग का आवागमन फोरलेन सड़क के सर्विस लेन पर निर्भर कर छोड़ दिया गया है। बड़ेवन तक सर्विस रोड से आने के बाद फिर से यह टू-लेन सड़क यात्रियों को मिल रही है।
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टोल प्लाजा पर नहीं है उपचार के इंतजाम
फोरलेन हाईवे की तरह इस सड़क पर टोल वसूली के प्रबंध किए गए हैं। एक्सड़ा चौराहे के पास लुंबिनी-दुद्धी मार्ग का टोल बूथ है। यहां प्रतिदिन औसतन दो से ढाई लाख रुपये नेपाल एवं वाराणसी की ओर जाने वाले वाहनों से टोल वसूली होती है। बावजूद इसके यात्रियों की सुविधा के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। फोरलेन हाईवे अथॉरिटी की तरह इस सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त यात्रियों के लिए एनएचएआई की ओर से एंबुलेंस एवं प्राथमिक उपचार की व्यवस्था नहीं है। संवेदनशील मोड़ एवं चौराहों पर संकेतांक एवं रिफलेक्टर भी नहीं लगवाए गए हैं।
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कोट
लुंबिनी-दुद्धी मार्ग की हालत से परिचित नहीं हूं। इसके अनुरूक्षण कार्य के लिए विभाग के पास कोई बजट भी नहीं है। वैसे यह सड़क एनएचएआई के अधीन न होकर केंद्रीय सड़क मंत्रालय के अधीन है। इसका कार्यालय दिल्ली व लखनऊ में है।
-इं. ललित प्रताप, पीडी, एनएचएआई