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Basti News: इमाम हुसैन के बीसवें पर निकाला गया मातमी जुलूस
Fri, 25 Jul 2025 01:13 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 25 Jul 2025 01:13 AM IST
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बस्ती। कर्बला के शहीदों के बीसवें पर गांधीनगर में बृहस्पतिवार को मातमी जुलूस निकाला गया। अंजुमने हैदरी हल्लौर व अंजुमने इमामिया बस्ती ने नौहा व मातम कर इमाम हुसैन व कर्बला में शहीद होने वाले उनके साथियों को खिराजे अकीदत पेश किया। जुलूस में ताबूत, जुलजुनाह के साथ अलम मौजूद था। युवाओं ने इस अवसर पर जंजीर व कमा से मातम कर कुर्बानी के जज्बे का इजहार किया।
मातमदारों के लिए चाय व पानी की सबील लगाई गई थी। मातमी जुलूस स्व. शब्बीर हुसैन उर्फ कल्लू साहब के रहमतगंज स्थित इमामबाड़े से मजलिस के बाद शुरू हुआ। मुख्य मार्ग पर पहुंचकर यह जुलूस भारतीय स्टेट बैंक के पीछे स्थित हुसैनी मस्जिद के करीब इमामबाड़ा मुस्तफा हुसैन पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस के अंत में मजलिस का आयोजन हुआ। जिसे संबोधित करते हुए मौलाना जमाल हैदर ने कहा कि जिस तरह हम अपने अजीजों की मौत के बाद उनका दसवां, बीसवां व चालीसवा मनाते हैं, उसी तरह हम कर्बला के शहीदों के लिए भी यह आयोजन करते हैं। कर्बला की घटना के बाद इस्लाम दो गिरोह में बंट गया, एक यजीदी और एक हुसैनी। इमाम हुसैन ने यह पैगाम दिया कि दुश्मन कितना ही ताकतवर क्यों न हो उसकी गलत बातों को कभी स्वीकार्य मत करना। यजीदियों ने इमाम हुसैन से बैयत (धार्मिक रूप से समर्पण) लेने के लिए उन्हें कर्बला के मैदान में तीन दिन तक भूखा प्यासा रखा। अंत में शहीद कर दिया गया। इमाम हुसैन की यह शहादत दुनिया के मजलूमों के लिए प्रेरणा है।
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मातमदारों के लिए चाय व पानी की सबील लगाई गई थी। मातमी जुलूस स्व. शब्बीर हुसैन उर्फ कल्लू साहब के रहमतगंज स्थित इमामबाड़े से मजलिस के बाद शुरू हुआ। मुख्य मार्ग पर पहुंचकर यह जुलूस भारतीय स्टेट बैंक के पीछे स्थित हुसैनी मस्जिद के करीब इमामबाड़ा मुस्तफा हुसैन पहुंचकर समाप्त हुआ। जुलूस के अंत में मजलिस का आयोजन हुआ। जिसे संबोधित करते हुए मौलाना जमाल हैदर ने कहा कि जिस तरह हम अपने अजीजों की मौत के बाद उनका दसवां, बीसवां व चालीसवा मनाते हैं, उसी तरह हम कर्बला के शहीदों के लिए भी यह आयोजन करते हैं। कर्बला की घटना के बाद इस्लाम दो गिरोह में बंट गया, एक यजीदी और एक हुसैनी। इमाम हुसैन ने यह पैगाम दिया कि दुश्मन कितना ही ताकतवर क्यों न हो उसकी गलत बातों को कभी स्वीकार्य मत करना। यजीदियों ने इमाम हुसैन से बैयत (धार्मिक रूप से समर्पण) लेने के लिए उन्हें कर्बला के मैदान में तीन दिन तक भूखा प्यासा रखा। अंत में शहीद कर दिया गया। इमाम हुसैन की यह शहादत दुनिया के मजलूमों के लिए प्रेरणा है।
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