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Basti News: बंदरों की धमाचौकड़ी से आफत...तोड़ रहे ऑक्सीजन और पानी की पाइपलाइन

Sun, 18 Jan 2026 12:36 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jan 2026 12:36 AM IST
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Monkeys' mischief is causing trouble...breaking oxygen and water pipelines.
जिला अस्पताल परिसर में धमाचौकड़ी करते बंदर संवाद
बस्ती। जिला अस्पताल में बंदरों का आतंक बढ़ता जा रहा है। मरीज और अस्पताल स्टाफ इससे दहशत में हैं। यदि बंदरों को भगाने का प्रयास किया जाता है तो वह उनपर हमला करके घायल कर रहे हैं। बंदरों के झुंड अस्पताल में ऑक्सीजन और जलापूर्ति पाइपलाइन को तोड़ दे रहे हैं। वहीं नगर पालिका और वन विभाग से बंदरों को पकड़वाने की जहमत नहीं उठा रही है।
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बता दें कि जिला अस्पताल में रोजाना आठ सौ से अधिक मरीज उपचार कराने के लिए आते हैं। अस्पताल में 100 से अधिक मरीजों को भर्ती भी किया जाता है। अस्पताल में जनरल ऑपरेशन के लिए महिलाएं भी आती हैं और पुरुष की संख्या अधिक रहती है। मेडिकल वार्ड, इमरजेंसी, महिला वार्ड, प्राइवेट वार्ड और चिल्ड्रेन वार्ड में हमेशा मरीज भर्ती रहते हैं। वहीं, अस्पताल परिसर में 30 से 40 की संख्या में बंदर मंडराते रहते हैं।
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बंदर मरीजों पर हमला बोल देते हैं और उन्हें काटकर घायल कर रहे हैं। मरीजों का कहना है कि बंदर मरीजों के वार्ड में भी घुस जाते है और मरीजों को काटने का प्रयास करते हैं। कई बार तो बंदरों ने काटकर भी घायल कर दिया है। ऐसे में वार्ड का दरवाजा बंद करना पड़ता है। बंदरों के आतंक से मरीजों में भय का माहौल बना हुआ है।
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बृहस्पतिवार को प्राइवेट वार्ड में ऑक्सीजन सप्लाई के लिए बिछाई गई पाइपलाइन पर बंदरों का झुंड टूट पड़ा। इससे लीकेज आ गया। इससे खलबली मच गई थी। लोगों ने बंदरों को भगाने का प्रयास किया तो उनको भी दौड़ा लिए थे। वहीं, कई बार जलापूर्ति पाइपलाइन भी तोड़ दिए हैं। इससे कई वार्ड में पानी नहीं पहुंचता है। मरीज रिंकी, आशीष ने बताया कि बंदर अक्सर जांच रिपोर्ट खींचकर ले भागते हैं। इससे फिर से जांच करानी पड़ती है।
आवास व वार्ड से समान उठा ले जाते हैं बंदर : जिला अस्पताल परिसर में बने चिकित्सकों के आवास में बंदर घुस रहे हैं। छत पर सुखाने के लिए रखे गए कपड़ों को भी उठाकर ले जाते हैं। समान भी कभी-कभी उठा ले जा रहे हें। ऐसे में चिकित्सकों ने कपड़ों को छत पर सुखाना तो बंद कर दिया और कमरों का गेट बंद कर अंदर रहने के लिए मजबूर है। वहीं, खिड़की और बरामदा में जाली लगवा लिए हैं।
वार्ड में भी अक्सर मरीजों के कपड़े, दवा व अन्य उपकरण उठा ले जा रहे हैं। डॉ. वीके, डॉ. रामजी, डॉ. पीएस पटेल ने कहा कि बंदरों के धमाचौकड़ी से काफी परेशानी हो रही है।

तीमारदार व बच्चों पर करते हैं हमला : अस्पताल परिसर में मरीज, तीमारदार पर अचानक बंदर उनपर हमला कर देते हैं और खाने का सामान भी छीन लेते है। पर्ची बनाने के लिए लाइन में लगे मरीजों को भी परेशान करते है। ऐसे में अस्पताल परिसर में चलना मुश्किल हो गया है। शिकायत के बाद भी बंदरों को नहीं पकड़ा जा रहा है। बच्चों पर भी बंदर तेजी से झपट्टा मारते हैं।
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