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Basti News: सुहागिनों ने की शिव-पार्वती की आराधना
Tue, 19 Sep 2023 01:03 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 19 Sep 2023 01:03 AM IST
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हरितालिका तीज पर भद्रेश्वरनाथ समेत तमाम मंदिरों में व्रती महिलाओं की रही भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। हरितालिका तीज पर रविवार को महिलाओं ने निर्जल उपवास रखकर अपने पति के लंबी उम्र के लिए भगवान शिव और माता पार्वती से प्रार्थना की। ऐसा मानना है कि यह व्रत रखने वाली महिलाओं पर शिवशंकर की विशेष कृपा होती है। भद्रेश्वरनाथ समेत अन्य मंदिरों पर व्रती महिलाओं की पूरे दिन अच्छी खासी भीड़ रही। दिन भर तेज धूप और गर्मी के कारण सुहागिनों को कठिन तपस्या से गुजरना पड़ा।
भाद्रपद के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि पर सोमवार को सुहागिनों ने हरितालिका तीज का व्रत रखा। भोर में ही सुहागिनें पति की दीर्घायु के लिए निराजल व्रत की शुरुआत कीं। भोर में अल्पाहार के बाद से ही उनके व्रत की शुरुआत हो गई। सुहागिनों ने भगवान शंकर पार्वती की बालू की मूर्ति बनाकर पूजा कीं, शिव और पार्वती से अपने सुहाग की लंबी उम्र मांगी। नए वस्त्र धारण कर मंगल गीत गाए। यह पर्व भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप नर नारी की उत्पत्ति, जीवन की शक्ति और सृष्टि की रचना से जुड़ा है। प्रात:काल की पूजा के बाद शाम को भी विभिन्न पूजन सामग्री के साथ पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद शिव पार्वती के विवाह की कथा का श्रवण सुहागिनों ने किया। ऊं नम: शिवाय आदि मंत्रों के उच्चारण के साथ ही सुहागिनों शिव पार्वती की आराधना करती रहीं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। हरितालिका तीज पर रविवार को महिलाओं ने निर्जल उपवास रखकर अपने पति के लंबी उम्र के लिए भगवान शिव और माता पार्वती से प्रार्थना की। ऐसा मानना है कि यह व्रत रखने वाली महिलाओं पर शिवशंकर की विशेष कृपा होती है। भद्रेश्वरनाथ समेत अन्य मंदिरों पर व्रती महिलाओं की पूरे दिन अच्छी खासी भीड़ रही। दिन भर तेज धूप और गर्मी के कारण सुहागिनों को कठिन तपस्या से गुजरना पड़ा।
भाद्रपद के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि पर सोमवार को सुहागिनों ने हरितालिका तीज का व्रत रखा। भोर में ही सुहागिनें पति की दीर्घायु के लिए निराजल व्रत की शुरुआत कीं। भोर में अल्पाहार के बाद से ही उनके व्रत की शुरुआत हो गई। सुहागिनों ने भगवान शंकर पार्वती की बालू की मूर्ति बनाकर पूजा कीं, शिव और पार्वती से अपने सुहाग की लंबी उम्र मांगी। नए वस्त्र धारण कर मंगल गीत गाए। यह पर्व भगवान शिव के अर्धनारीश्वर स्वरूप नर नारी की उत्पत्ति, जीवन की शक्ति और सृष्टि की रचना से जुड़ा है। प्रात:काल की पूजा के बाद शाम को भी विभिन्न पूजन सामग्री के साथ पूजन-अर्चन किया गया। इसके बाद शिव पार्वती के विवाह की कथा का श्रवण सुहागिनों ने किया। ऊं नम: शिवाय आदि मंत्रों के उच्चारण के साथ ही सुहागिनों शिव पार्वती की आराधना करती रहीं।
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