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शहर में लगे अधिकांश सरकारी हैंडपंप गर्मी में बेपानी

Tue, 19 Apr 2016 12:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 19 Apr 2016 12:03 AM IST
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handpumps dry in summer
मालवीय रोड पर एलआईसी कार्यालय के पास खराब पड़ा इंडिया मार्का हैंड पम्प। - फोटो : रमेश मिश्र

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बस्ती। शहर में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए स्थापित अधिकांश इंडिया मार्क टू हैंडपंप बेपानी हो गए है। इनमें कुछ तकनीकी खराबी के कारण बेकार पड़े हैं तो कुछ रीबोर न होने कारण निष्प्रयोज्य हैं। बस्ती नगर पालिका क्षेत्र में कुल 1007 इंडिया मार्क टू हैंडपंप लगाए हैं, मगर धरातल पर इनमें से तमाम दिखते ही नहीं। जो दिखते हैं, उनमें से भी अधिकांश बेपानी हैं।

एक दशक पूर्व नगर पालिका की ओर से शहर के कुछ प्रमुख स्थानों पर वाटरकूलर लगाए गए थे, जो देखरेख के अभाव में खराब हो गए। इनमें से कुछ तो गायब भी हो गए।
अप्रैल माह में ही पारा 43 डिग्री तक पहुंच चुका है। ऐसे में गर्मी और उमस बढ़ रही है। गर्मी के चलते लोगों को प्यास बुझाने के लिए पेयजल के संसाधनों की दरकार महसूस होने लगी है।
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शहर में पेयजल संसाधनों की हालत बदतर है। जलकल विभाग की माने तो नगर पालिका क्षेत्र में 1007 इंडिया मार्क टू हैंडपंप स्थापित हैं। इनमें से कितने हैंडपंप खराब हैं। इसकी सटीक जानकारी विभाग को भी नहीं है। विभाग का कहना है कि जैसे-जैसे हैंडपंपों के बारे में शिकायत मिलती है उन्हें ठीक कराया जाता है। कुछ हैंडपंपों को रिबोर के लिए जल निगम को लिखा गया है।
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शहर में स्थापित इंडिया मार्क टू हैंडपंप में से कुछ तो दिखते ही नहीं। जो दिख रहे हैं, उनमें से भी अधिकांश सूख चुके हैं या दूषित पानी दे रहे हैं। कुछ को रिबोर कराए जाने की जरूरत है तो कुछ यांत्रिक दोष के चलते पानी नहीं दे रहे हैं। मालवीय रोड पर एलआईसी के सामने से फौव्वारा तिराहे तक महज तीन सौ मीटर की दूरी पर तीन इंडिया मार्क टू हैंड पंप खराब पड़े हैं।

यह पिछले साल से ही सूखे पड़े है, मगर इन्हें अब तक ठीक नहीं कराया गया। इससे सटे गांधीनगर से रामेश्वरपुरी मुहल्ले में जाने वाले रोड के किनारे लगा इंडिया मार्क टू हैंड पंप पिछले तीन साल से बेपानी है। यही हाल जीआईसी परिसर में लगे एक इंडिया मार्क टू हैंडपंप का है। आवास विकास कालोनी में कई हैंडपंप वर्षों से सूखे पड़े हैं। यह तो महज बानगी है, हकीकत यह है कि शहर में लगे इंडिया मार्क टू हैंडपंपों में अधिकांश बेपानी है।


जिनमें पानी भी आ रहा है, उनमें से कई ऐसे है, जिनका पानी पीने लायक नहीं है। उदाहरण के तौर पर गांधीनगर में स्थित अरबन कोआपरेटिव बैंक के नीचे स्थापित हैंडपंप है। इतना ही नहीं एक दशक पूर्व शहर के प्रमुख स्थानों पर लगाए गए वाटर कूलर भी कई सालों से खराब पड़े हैं। इनमें से कुछ स्थानों पर वाटरकूलर मशीन ही गायब हो चुकी है। ऐसे में गर्मी के मौसम में शहर की पेयजल व्यवस्था ध्वस्त नजर आ रही है।
 
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