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आठवीं बार मिला गोकुल पुरस्कार

Thu, 28 Apr 2016 12:45 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 28 Apr 2016 12:45 AM IST
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got 8th times gokul award
कठोर परिश्रम और बुलंद इरादे से किसानों के प्रेरणास्रोत बने फौजी राममणि। - फोटो : संताोष पाल
कुदरहा। कठोर परिश्रम और बुलंद इरादे के बलबूते एक बार फिर फौजी राममणि ने मिसाल कायम की है। सीमित संसाधनों में बेहतर काम करने वाले राममणि किसानों के लिए प्रेरणास्रोत बन गए हैं। राममणि ने बस्ती जनपद में सबसे अधिक 46000 लीटर दूध की आपूर्ति कर लगातार आठवीं बार गोकुल पुरस्कार प्राप्त किया है। 
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ग्राम सभा फुलवरिया पांडेय के राममणि का जीवन अभाव और संघर्षों के बीच रहा। तीन साल के थे तो सिर से पिता का साया उठ गया। जवानी में भाई का निधन हो गया। उन्होंने देश सेवा का व्रत लिया और फौज में भर्ती हो गए। वे सात साल तक थल सेना से जुड़े रहे, पर मजबूरियों के चलते उन्हें घर आना पड़ा। इसके बाद उन्होंने दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में बेहतर करने का बीड़ा उठाया ।1994 में उन्होंने एक गाय और एक भैंस से डेयरी शुरू की। 
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पूंजी का अभाव था मगर, परिश्रम व लगन देख बैंक ने उन्हें ऋण मुहैया कराया। उसके बाद वह क्षेत्र के किसानों के लिए आदर्श बन गए। उन्होंने 2007 में दुग्ध संघ को 25 हजार लीटर दूध की आपूर्ति की। इसके बाद डेयरी में लगातार अत्याधुनिक तकनीक का प्रयोग दूध का  उत्पादन  बढ़ाते गए। फौजी राममणि का हौसला और तीस हजार लीटर दूध उत्पादन देख प्रदेश सरकार ने इन्हें वर्ष 2009 में पहली बार गोकुल पुरस्कार से नवाजा। फिर गोकुल पुरस्कार पाने का यह सिलसिला अब तक जारी है। वर्ष 2014-15 में फौजी ने दुग्ध संघ को 46000 लीटर दूध की आपूर्ति की। 
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जनपद में सबसे अधिक आपूर्ति करने के कारण इन्हें गोकुल पुरस्कार के लिए चयनित किया गया। मंगलवार को गन्ना शोध संस्थान में प्रदेश के दुग्ध विकास मंत्री राममूर्ति वर्मा ने राममणि तिवारी सहित प्रदेश के 65 किसानों को सम्मानित किया। उन्हें 22000 रुपये का चेक, प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिह्न दिया गया। 

इसके अलावा वे फुटकर में भी लोगों को दूध मुहैया कराते हैं। इन्होंने कम समय में ही अपनी जिंदगी बदल दी है। उन्हें भारत सरकार की ओर से भी 2011 में दूसरे बड़े दुग्ध उत्पादक के रूप में राष्ट्रीय दुग्ध किसान पुरस्कार से नवाजा गया। बकौल राममणि, उनका जीवन  पशुओं  की  सेवा  में समर्पित  हैं।  वे  क्षेत्र के किसानों को भी दुग्ध  उत्पादन  के लिए प्रेरित करते हैं। वे कहते हैं कि उनके जानवर उनकी भाषा भी समझते हैं।  उन्हें  खिलाने-पिलाने व सेवा करने में ज्यादा दिक्कत नहीं होती हैं।

खेती में गोबर की खाद का इस्तेमाल 
रासायनिक खादों से हो रहे नुकसान के मद्देनजर खेती में सिर्फ गोबर की खाद का प्रयोग किया जाता है इससे होने वाले उपज की काफी मांग है। लोग अधिक मूल्य भी देते हैं। फौजी कहते हैं कि मांग के अनुरूप अनाजों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। 

मशीन से निकाला जाता है दूध 
राममणि दूध निकालने की मशीन भी ले चुके हैं। उससे एक साथ चार गायों का दूध निकलता है। उनका कहना है कि मशीनों से निकला दूध हाथ के दूध से ज्यादा शुद्ध होता है। उनका कहना है कि पंजाब और इस्राइल की तर्ज पर वे पशुओं का चारा तैयार करते हैं साथ ही बाड़े का निर्माण भी उसी तरीके से किया गया है।


गोबर गैस प्लांट से चलता हैं इंजन
राममणि गोबर गैस से इंजन चलाते हैं। वे गोबर से ऊर्जा की पूर्ति भी करते हैं।उनका कहना है कि वे इस प्लांट को बड़ा करना चाहते हैं ताकि ऊर्जा की जरूरत पूरी हो सके।
 
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