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Basti News: गोपियां चाहती थीं कि उनके घर से कान्हा माखन चुराएं
Thu, 22 Feb 2024 12:16 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Thu, 22 Feb 2024 12:16 AM IST
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दीक्षापार में चह रही है श्रीमद् भागवत गीता
संवाद न्यूज एजेंसी
मुंडेरवा। दीक्षापार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में महामृत्युंजय पीठाधीश्वर स्वामी प्रणवपुरी महाराज ने श्रद्धालुओं को बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने भक्तों को आनंद देने के लिए माधुर्य भरी बाल लीलाएं कीं। सखाओं के साथ गोपियों के घर से खूब माखन चुरा कर खाया। गोपियां भी कान्हा से अत्यंत प्रेम करती थीं, वह भी चाहती थीं कि कृष्ण उनके घर का माखन चुराकर खाएं।
उन्होंने श्रीकृष्ण लीला का प्रसंग सुनाते हुए कहा किए मखन चोरी करते हुए एक बार प्रभु ने मिट्टी खा लिया, तब उनके शाखाओं ने यशोदा मैया से शिकायत कर दी। बताया कि प्रेम में वासना नहीं होती है। किसी का कुछ अच्छा लगना प्रेम नहीं होता है। प्रेम का अर्थ एक-दूसरे के प्रति समर्पण होना होता है। आजकल के युवा प्रेम का मतलब समझ पाने में असमर्थ हैं। वह प्रेम का अर्थ पाना समझते हैं। आजकल का प्रेम आकर्षण है, इसमें छलावा है।
कहा कि वास्तव में प्रभु की कृपा को जो व्यक्ति प्रतिक्षण अनुभव करता है, वह भगवान के धाम का अधिकारी बन जाता है। समस्या यह है कि ईश्वर ने हमें जो दिया है उसके लिए उसे धन्यवाद देने के बजाय अधिक पाने के लिए कोसते रहते हैं। यह नहीं सोचते कि ईश्वर से ने हमें इंसान बनाकर हम पर कृपा किया है। मौके पर मुख्य यजमान कैप्टन रमाकांत शुक्ल, चंद्रवती, उमाकांत शुक्ल, श्रीराम पाठक, त्रिपुरारी पांडेय, घनश्याम दुबे, परमात्मा भट्ट, राम अवध पांडेय, रामचंद्र शुक्ल, चिंताहरण शुक्ल, मोहन शुक्ल, मेवालाल शुक्ल आदि मौजूद रहे।
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मुंडेरवा। दीक्षापार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में महामृत्युंजय पीठाधीश्वर स्वामी प्रणवपुरी महाराज ने श्रद्धालुओं को बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने भक्तों को आनंद देने के लिए माधुर्य भरी बाल लीलाएं कीं। सखाओं के साथ गोपियों के घर से खूब माखन चुरा कर खाया। गोपियां भी कान्हा से अत्यंत प्रेम करती थीं, वह भी चाहती थीं कि कृष्ण उनके घर का माखन चुराकर खाएं।
उन्होंने श्रीकृष्ण लीला का प्रसंग सुनाते हुए कहा किए मखन चोरी करते हुए एक बार प्रभु ने मिट्टी खा लिया, तब उनके शाखाओं ने यशोदा मैया से शिकायत कर दी। बताया कि प्रेम में वासना नहीं होती है। किसी का कुछ अच्छा लगना प्रेम नहीं होता है। प्रेम का अर्थ एक-दूसरे के प्रति समर्पण होना होता है। आजकल के युवा प्रेम का मतलब समझ पाने में असमर्थ हैं। वह प्रेम का अर्थ पाना समझते हैं। आजकल का प्रेम आकर्षण है, इसमें छलावा है।
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कहा कि वास्तव में प्रभु की कृपा को जो व्यक्ति प्रतिक्षण अनुभव करता है, वह भगवान के धाम का अधिकारी बन जाता है। समस्या यह है कि ईश्वर ने हमें जो दिया है उसके लिए उसे धन्यवाद देने के बजाय अधिक पाने के लिए कोसते रहते हैं। यह नहीं सोचते कि ईश्वर से ने हमें इंसान बनाकर हम पर कृपा किया है। मौके पर मुख्य यजमान कैप्टन रमाकांत शुक्ल, चंद्रवती, उमाकांत शुक्ल, श्रीराम पाठक, त्रिपुरारी पांडेय, घनश्याम दुबे, परमात्मा भट्ट, राम अवध पांडेय, रामचंद्र शुक्ल, चिंताहरण शुक्ल, मोहन शुक्ल, मेवालाल शुक्ल आदि मौजूद रहे।
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