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Basti News: 80 रुपये दीजिए, गांजा हो या मिलावटी खोवा सब बसों से भेजिए

Sun, 18 Jun 2023 01:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती Updated Sun, 18 Jun 2023 01:17 AM IST
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Give 80 rupees, be it ganja or adulterated khova, send it by all buses
बस्ती। अगर, आपको किसी भी अवैध या वैध सामान को कम खर्च पर कहीं पहुंचाना है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है। इसके लिए रोडवेज की बसों में आपको महज 80 रुपये खर्च करने होंगे। यह भी तय है कि आपके सामान की जांच नहीं होगी। उसमें गांजा है या वास्तव में घरेलू सामान, इससे भी जिम्मेदारों को कोई मतलब नहीं है। शनिवार को इसकी पड़ताल की गई तो यह पूरी तरह से सच पाया गया। महज 80 रुपये में बांसी तक का एक गत्ता लेकर जाने कि लिए रोडवेज का परिचालक तैयार हो गया। उसने यह भी जानने की कोशिश नहीं की कि पैक गत्ते में क्या है?
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दोपहर 12.45 बजे के करीब। रोडवेज के गेट पर एक साथ दो बसें खड़ी थीं। इसी में से एक बस बांसी जाने के लिए पूरी तरह तैयार थी। सवारी बैठे थे और परिचालक आवाज दे रहा था बांसी...बांसी... बस चलने वाली ही है। परिचालक के पास जाकर पूछा, भाई एक सामान बांसी ले जाना है। तपाक से जवाब आया, रख दीजिए, क्या है? ... अरे छोटा सा गत्ता। कोई बात नहीं... 80 रुपये लगेंगे। ठीक है...। क्योंकि हकीकत जाननी थी तो यह भी पूछना पड़ा, भाई कहीं यह तो नहीं बताना पड़ेगा कि इसमें क्या है। जवाब आता है, नहीं भाई, रुपये दो, समय बर्बाद मत करो। फिर क्या, परिचालक के सीट के पास गया तो पहले से सामान भरा हुआ था, मैंने पूछा कहां रखूं। तभी उसने चालक के बगल वाली सीट के पास खड़े एक यात्री को वहां से हटा दिया, बोला जाओ, पीछे और वहीं पर सामान रखवा दिया। खैर मैंने (रिपोर्टर) तो खाली डब्बा ही रखा, लेकिन तस्कर और बदमाश ऐसी ही लापरवाही और ऊपरी कमाई के लिए सभी कायदे तोड़ने का फायदा उठा रहे हैं।
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मोटी कमाई के चक्कर में हो सकता है हादसा
अब इस सामान को ढोने में रोडवेज का सीधा नुकसान तो कुछ नहीं है, अगर कोई बदमाश घटना करना चाहे तो उसे रोका नहीं जा सकता है। रोडवेज के जिम्मेदारों को तो सिर्फ 80 रुपये से ही मतलब है। इससे उनका कोई लेना-देना नहीं है कि उसमें रखा क्या जा रहा है। दूसरे, इससे मोटी कमाई भी होती है। 80 रुपये तो कम दूरी के होते हैं। अगर, दूरी अधिक होती है तो फिर रुपये भी ज्यादा देने होते हैं।
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खुद के धंधे के लिए ही फेल कर दिया गया कूरियर का सिस्टम
जानकार बताते हैं कि रोडवेज में कूरियर सिस्टम भी लागू किया गया था। कुछ साल पहले कार्गो नाम की कंपनी को काम दिया गया था, तब बाकायदा सामान की बुकिंग होती थी और तय रेट पर सामान भेजे जाते थे। बुकिंग के पहले सामान की जांच भी होती थी। इस सिस्टम से सरकार को तो फायदा था, लेकिन अफसरों की जेब नहीं भर पाती थी। इस वजह से ही इतनी जांच पड़ताल की जाती थी कि लोग इससे दूरी बनाने लगे। फिर इसे घाटे का सौदा बताकर शासन को रिपोर्ट भेजी गई और इस सिस्टम को बंद कर अवैध धंधे काे पनपा दिया गया है।

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सबका हिस्सा तय...नहीं मिलने पर करते हैं कार्रवाई
रोडवेज के सूत्रों का कहना है कि इस अवैध कमाई के लिए अफसर तक एक सिस्टम है। अगर, बस से मेज के नीचे से आने वाली रकम कम होती है तो फिर अफसर जाग जाते हैं और अचानक चेकिंग शुरू कर दी जाती है। लेकिन, इस दौरान भी उसी बस के चालक या परिचालक पर कार्रवाई की जाती है, जिससे मामला बिगड़ा हो।
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ऐसे पकड़ा गया अवैध धंधा

दोपहर 12 से एक बजे के बीच बस स्टेशन पर पड़ताल के दौरान एक व्यक्ति गत्ता में सामान लेकर पहुंचा। इस दौरान कई बसों के परिचालकों ने उस व्यक्ति को घेर लिया और पूछने लगे कि सामान कहां ले जाना है, तो व्यक्ति ने कहा बांसी। इसके बाद बांसी जाने वाली बस (यूपी 53ईबी 9077) के परिचालक ने व्यक्ति से गत्ता लेकर पैसे लिए और उसे अपना मोबाइल नंबर देकर सामान को बस में रख दिया। इसी तरह डुमरियागंज जाने वाली यूपी 51 क्यूटी 5549 एवं देवरिया जाने वाली बस यूपी 51 एटी 7809 बस के चालक और परिचालक अवैध सामान को बसों में रखवाते मिले।
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रोडवेज परिसर और गेट पर ही सामानों की खेप पहुंचाने का मोलभाव किया जाता है। यहां डुमरियागंज, सिद्धार्थनगर, लखनऊ, बांसी आदि जगहों पर सामान पहुंचाने के उद्देश्य से अवैध कूरियर का धंधा खुलेआम चलता है। सामानों को लाने वाले और चालकों और परिचालकों के बीच मोलभाव होता है, लेकिन एआरएम एवं अन्य जिम्मेदार अफसरों को इसकी परवाह नहीं है।
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त्योहार के समय और फलता-फूलता है धंधा
तस्करों के लिए सामान को ले जाने और लाने में सबसे अधिक मदद रोडवेज बसों से मिलती है, क्योंकि इनकी कोई जांच नहीं होती है। वहीं त्योहार में यह धंधा और भी फलता-फूलता है। होली-दिवाली और दशहरा आदि पर्व में बड़ी संख्या में लोग सामान को लाते और ले आते हैं।

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केस 1
4 जुलाई 2020 को देवरिया से बस्ती आ रही रोडवेज डिपो की बस में कांटे चौराहा के पास 30 किलोग्राम गांजा की बोरी बरामद हुई। पकड़े जाने पर इसे किसी भी यात्री ने स्वीकार नहीं किया। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर ये बरामदगी की थी।

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केस 2

16 मार्च 2021 को लखनऊ से बस्ती आ रही रोडवेज की बस में एक झोले से 30-35 साइबेरियन एवं प्रतिबंधित चिड़ियां बरामद हुई थीं। उन्हें जिला मुख्यालय पर बेचने के लिए लाया जा रहा था। जिनका शिकार प्रतिबंधित है। चौकड़ी टोल प्लाजा के पास पुलिस टीम ने यह कार्रवाई की थी।


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बस में सिर्फ यात्री ही सामान ले जा सकते हैं, अगर चालक और परिचालक बिना यात्री के सामान बसों में लाद रहे हैं तो यह गलत हैं। इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी। -आयुष भटनागर, एआरएम बस्ती डिपो।
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