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तमाम दिक्कतें झेलकर यूक्रेन से घर पहुंचे पांच विद्यार्थी

Fri, 04 Mar 2022 11:11 PM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 04 Mar 2022 11:11 PM IST
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five students come from ukraine
हर्रैया क्षेत्र के मोहित यूक्रेन से घर पहुचने पर परिवार के लोगो ने किया स्वागत। - फोटो : BASTI
तमाम दिक्कतें झेलकर यूक्रेन से घर पहुंचे पांच विद्यार्थी
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- मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन के कॉलेज में लिया था प्रवेश
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे पांच छात्र-छात्राएं शुक्रवार को अपने घर पहुंचे। 24 फरवरी को रुस और यूक्रेन के बीच युद्ध के बाद परिवार के लोग चिंतित हो गए थे, मगर वहां से निकल कर रोमानिया पहुंचे छात्रों को हवाई जहाज से लेकर अपने वतन पहुंचा तो परिवार में खुशी की लहर छा गई।
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छावनी क्षेत्र के रूपगढ़ गांव निवासी मुलायम सिंह यादव यूक्रेन में फंस गए थे। वह एमबीबीएस चौथे समेस्टर की परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। टर्नोपिल नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में वह पढ़ते हैं। यूक्रेन पर हमला के बाद जैसे-तैसे रोमानियां पहुंचे और वहां से उन्हें हवाई जहाज से दिल्ली पहुंचाया गया, जहां से शुक्रवार को वे अपने गांव रुपगढ़ पहुंच गए। मुलायम सिंह के पिता सत्यप्रकाश ने सरकार के सहयोग के लिए धन्यवाद दिया है। कहा कि सरकार की पहल पर बच्चे घर आ गए।
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मोहित के घर पहुंचने पर परिजन खुश
हर्रैया। महूघाट गांव निवासी एमबीबीएस छात्र मोहित कुमार गौड़ की सकुशल घर वापसी से परिजन व शुभचिंतकों ने राहत की सांस ली है। एयरपोर्ट पर बृहस्पतिवार रात को रोहित ने वृद्ध दादी के पैर छुए तो भावुक दादी अपने लाल से लिपट गई और दोनों की आंखें नम हो गई। रोहित कुमार गौड़ ने डॉक्टरी की पढ़ाई करने 2017 में यूक्रेन के टरनोपिल शहर के यूनिवर्सिटी में दाखिला कराया था। उनका कोर्स जून 2023 में पूरा होगा। रोहित ने बताया कि इस समय इंटर्नशिप व प्रेक्टिकल क्लास चल रहा था। जब से वार शुरू हुआ सभी जगह अफरातफरी का माहौल है। बताया कि 25 फरवरी को टरनोपिल से टैक्सी लेकर सात छात्रों के साथ 200 किमी की यात्रा के बाद रोमानिया बार्डर पर पहुंचे। वहां से उनके साथ सभी को एक शेल्टर हाउस ले जाया गया जहां पर भारतीय छात्रों के अलावा अन्य देशों के हजारों छात्र अपने वतन वापसी की प्रतीक्षा कर रहे थे। करीब एक सप्ताह बाद दो मार्च को वह एयर इंडिया की फ्लाइट पकड़कर मुंबई पहुंचे। तीन तारीख को मुंबई से प्रदेश सरकार की तरफ मुहैया कराए गए जहाज से शाम छह बजे लखनऊ एयरपोर्ट पहुंचे। रोहित ने भारत सरकार के मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों की सराहना की।
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एक सप्ताह मौत के साए में गुजरा : कल्याणी
यूक्रेन के टर्नोपिल शहर में रह कर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही कल्याणी मिश्रा पुत्री अवधेश मिश्रा भी शुक्रवार को शहर के पिकौरा शिव गुलाम रोडवेज स्थित आवास पर सुबह पहुंची। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह मौत के साए में जिंदगी गुजरी। कहा कि सरकार की पहल ने भारतीय छात्रों को सहायता की है। उन्हें निजी वाहन से परिवार के लोग लेकर यहां पहुंचे। उनके घर में खुशी का माहौल है। पिता अवधेश मिश्र ने कहा कि पुत्री को पाकर उन्हें नया जीवन मिला है। हर दिन वे बेटी को लेकर परेशान थे। उन्होंने सरकार को धन्यवाद दिया।
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डर में गुजरे कई रात : आनंद
शंकरपुर हर्रैया निवासी आनंद वर्मा पुत्र रामजनक वर्मा का कहना है कि वह युद्ध की स्थिति से परेशान हो गए। डर में कई रात गुजारने के बाद वे बस से रोमानिया की सीमा पर पहुंचे। जहां उन्हें अस्थायी रिफ्यूजी बीजा मिला। इसके बाद वे रोमानियां में पहुंच गए, जहां उन्हें शेल्टर होम में रखा गया। यहां सभी सुविधा उपलब्ध कराई गईं। इसके बाद वे एयरपोर्ट पहुंचे जहां से हवाईजहाज से दिल्ली आए। यहां उनको केंद्र व प्रदेश सरकार के मंत्रियों के अलावा अधिकारियों ने रिसीव कर यूपी भवन ले गए। यहां ठहरने की पूरी व्यवस्था मिली। सरकार के निजी साधन से वे घर पहुंचे। घर पर परिवार के लोग उन्हें देख राहत की सांस लिए।

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‘युद्ध के बाद से सताने लगी थी बेटे की चिंता’
शहर के बाटा गली निवासी नजिस असगर पुत्र असगर रजा भी यूक्रेन शहर के ट्रालीबूस्ना में एमबीबीएस के छात्र हैं। वे सुबह अपने घर पहुंचे। यहां उनके परिजनों ने गले से लगा लिया। नाजिस के पिता असगर ने कहा कि वे अपने पुत्र को सकुशल पाकर बेहद खुश हैं। जब से युद्ध शुरू हुआ तब से बेटे की चिंता में ठीक से नींद तक नहीं आई। अब बेटा आ गया। नजिस ने बताया कि वहां के हालत ठीक नहीं है। 24 फरवरी से लेकर पहली मार्च तक का सफर बेहद दिक्कतों भरा रहा, मगर रोमानियां पहुंचने के बाद राहत मिल गई। सरकार ने पूरा सहयोग किया है, जिससे वतन वापसी हो सकी है।
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