{"_id":"66789a6f7fd109e91c0d9fb4","slug":"file-for-repair-of-hostels-pending-for-approval-basti-news-c-207-1-sgkp1006-119244-2024-06-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Basti News: छात्रावासों के मरम्मत की फाइल स्वीकृति के लिए लटकी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Basti News: छात्रावासों के मरम्मत की फाइल स्वीकृति के लिए लटकी
विज्ञापन
- नए कलेवर में नहीं चमक सके जिले के पांच राजकीय छात्रावास
- प्रभारी मंत्री के निर्देश पर दो साल पहले समाज कल्याण विभाग ने की थी तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। राजकीय छात्रावासों की दशा जर्जर है। एक वर्ष पहले समाज कल्याण मंत्री ने दौरा करके चार राजकीय छात्रावास की व्यवस्था को दुरुस्त करने का निर्देश दिया था। संबंधित कार्यदायी संस्था ने प्रस्ताव बनाकर भेज दिया था, लेकिन उस पर अमल अब तक नहीं हो पाया है।
जिले के पांच राजकीय अनुसूचित जाति के छात्रावासों को नए कलेवर में चमकाने का सपना अभी तक नहीं पूरा हो सका, जबकि दो साल पहले जिले के तत्कालीन प्रभारी मंत्री रवींद्र जायसवाल के निर्देश पर जिला समाज कल्याण विभाग ने यूपीसिडको को इनके नवीनीकरण की जिम्मेदारी सौंपी थी। 23 अगस्त 2022 को तत्कालीन प्रभारी मंत्री रवींद्र जायसवाल ने महिला पीजी कॉलेज व सिविल लाइन स्थित अनुसूचित जाति के राजकीय छात्रावासों का निरीक्षण किया। इस मौके पर इसमें रहने वाले छात्रों ने छात्रावासों में सीलन, लीकेज, जलजमाव, सुविधाओं के अभाव व भवन संबंधी समस्याओं के बारे में शिकायत की।
मंत्री ने इसके लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी को जर्जर भवनों की मरम्मत करवाने व जरूरी सुविधाओं को तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने 24 अगस्त को ही इसके लिए कार्यदायी संस्था यूपी सिडको के तत्कालीन अधिशासी अभियंता सत्यप्रकाश सिंह को पत्र लिखकर आगणन उपलब्ध कराने को कहा था। बावजूद इसके अभी तक न तो इन छात्रावासों की मरम्मत हो सकी और न ही यहां के विद्यार्थियों को सुविधाएं उपलब्ध हो सकीं।
विज्ञापन
-- -
इन छात्रावासों का इतने दिन बाद भी नहीं हुआ कायाकल्प
मंडल मुख्यालय के सिविल लाइन स्थित दो राजकीय अनुसूचित जाति के पुरुष छात्रावासों का निर्माण वर्ष 1985-86 में हुआ था। वहीं राजकीय महिला महाविद्यालय कंपनीबाग स्थित महिला छात्रावास का निर्माण वर्ष 1990-91 में हुआ। इसके अलावा बभनान के महिला छात्रावास का निर्माण 2001-02 में व गौर के पुरुष छात्रावास का निर्माण वर्ष 1995-96 में हुआ था। इन सभी छात्रावासों को लंबे समय से मरम्मत की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
-- -
छात्रावासों में लगने थे आरओ प्लांट, बिछनी थी इंटरलॉकिंग
विद्यार्थियों की शिकायतों के अनुसार इन छात्रावासों में सीलन व लीकेज की समस्या दूर की जानी थी और जल निकासी के इंतजाम के अलावा इंटरलॉकिंग बिछाए जाने की योजना थी। वहीं पेयजल के लिए आरओ प्लांट व पानी की टंकी का इंतजाम भी किया जाना था। साथ ही सभी छात्रावासों को सोलर लाइट से संतृप्त करने की भी योजना थी।
-- -
फाइल का निरीक्षण कर उपलब्ध कराई जाएगी सुविधा
ऐसी किसी परियोजना के लिए भेजी गई फाइल की जांच की जाएगी और वस्तुस्थिति के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-आशुतोष द्विवेदी, अधिशासी अभियंता, यूपी सिडको
विज्ञापन
- प्रभारी मंत्री के निर्देश पर दो साल पहले समाज कल्याण विभाग ने की थी तैयारी
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। राजकीय छात्रावासों की दशा जर्जर है। एक वर्ष पहले समाज कल्याण मंत्री ने दौरा करके चार राजकीय छात्रावास की व्यवस्था को दुरुस्त करने का निर्देश दिया था। संबंधित कार्यदायी संस्था ने प्रस्ताव बनाकर भेज दिया था, लेकिन उस पर अमल अब तक नहीं हो पाया है।
जिले के पांच राजकीय अनुसूचित जाति के छात्रावासों को नए कलेवर में चमकाने का सपना अभी तक नहीं पूरा हो सका, जबकि दो साल पहले जिले के तत्कालीन प्रभारी मंत्री रवींद्र जायसवाल के निर्देश पर जिला समाज कल्याण विभाग ने यूपीसिडको को इनके नवीनीकरण की जिम्मेदारी सौंपी थी। 23 अगस्त 2022 को तत्कालीन प्रभारी मंत्री रवींद्र जायसवाल ने महिला पीजी कॉलेज व सिविल लाइन स्थित अनुसूचित जाति के राजकीय छात्रावासों का निरीक्षण किया। इस मौके पर इसमें रहने वाले छात्रों ने छात्रावासों में सीलन, लीकेज, जलजमाव, सुविधाओं के अभाव व भवन संबंधी समस्याओं के बारे में शिकायत की।
विज्ञापन
मंत्री ने इसके लिए जिला समाज कल्याण अधिकारी को जर्जर भवनों की मरम्मत करवाने व जरूरी सुविधाओं को तत्काल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। जिला समाज कल्याण अधिकारी ने 24 अगस्त को ही इसके लिए कार्यदायी संस्था यूपी सिडको के तत्कालीन अधिशासी अभियंता सत्यप्रकाश सिंह को पत्र लिखकर आगणन उपलब्ध कराने को कहा था। बावजूद इसके अभी तक न तो इन छात्रावासों की मरम्मत हो सकी और न ही यहां के विद्यार्थियों को सुविधाएं उपलब्ध हो सकीं।
विज्ञापन
इन छात्रावासों का इतने दिन बाद भी नहीं हुआ कायाकल्प
मंडल मुख्यालय के सिविल लाइन स्थित दो राजकीय अनुसूचित जाति के पुरुष छात्रावासों का निर्माण वर्ष 1985-86 में हुआ था। वहीं राजकीय महिला महाविद्यालय कंपनीबाग स्थित महिला छात्रावास का निर्माण वर्ष 1990-91 में हुआ। इसके अलावा बभनान के महिला छात्रावास का निर्माण 2001-02 में व गौर के पुरुष छात्रावास का निर्माण वर्ष 1995-96 में हुआ था। इन सभी छात्रावासों को लंबे समय से मरम्मत की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
छात्रावासों में लगने थे आरओ प्लांट, बिछनी थी इंटरलॉकिंग
विद्यार्थियों की शिकायतों के अनुसार इन छात्रावासों में सीलन व लीकेज की समस्या दूर की जानी थी और जल निकासी के इंतजाम के अलावा इंटरलॉकिंग बिछाए जाने की योजना थी। वहीं पेयजल के लिए आरओ प्लांट व पानी की टंकी का इंतजाम भी किया जाना था। साथ ही सभी छात्रावासों को सोलर लाइट से संतृप्त करने की भी योजना थी।
फाइल का निरीक्षण कर उपलब्ध कराई जाएगी सुविधा
ऐसी किसी परियोजना के लिए भेजी गई फाइल की जांच की जाएगी और वस्तुस्थिति के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-आशुतोष द्विवेदी, अधिशासी अभियंता, यूपी सिडको