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सतर्क रहें किसान, धान में बढ़ रहा फाल आर्मी वर्म कीट का प्रकोप
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सतर्क रहें किसान, धान में बढ़ रहा फाल आर्मी वर्म कीट का प्रकोप
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बेहतर बारिश से धान की फसल अच्छी होने की संभावना है। ऐेसे में उत्पादन अधिक हो इसके लिए किसानों को निगरानी के साथ ही कीटों व रोगों से बचाव करना होगा। वर्तमान में प्रदेश के कई जिलों में फाल आर्मी वर्म कीट या सैनिक कीट का प्रकोप बढ़ रहा है। ऐसे में कृषि रक्षा विभाग ने किसानों को इससे सहज रहने की अपील की है।
कृषि रक्षा विशेषज्ञ अजय कुमार तिवारी बताते हैं कि फाल आर्मी कीट की मादा पत्तियों की निचली सतह पर अंडे देती हैं। अंडे एक से ज्यादा परत में सफेद झांग से ढके होते हैं। अंडे हल्के पीले या भूरे रंग में होते हैं। फाल आर्मी वर्म का लार्वा (अंडे से निकलने पर कीट का प्रारंभिक स्वरूप) भूरा या धूसर रंग का होता है। कीट के दोनों बगल तीन पतली सफेेद धारियां होती हैं और सिर पर अंग्रेजी का उल्टा वाई अक्षर दिखता है। शरीर के दूसरे अंतिम व अन्य भागों पर वर्गाकार चार बिंदु दिखाई पड़ते हैं। इस कीट की प्रथम अवस्था सबसे अधिक हानिकारक होती है। इन्हें मक्के की फसल इसे सर्वाधिक पसंद होती है। इसके साथ ही ये बाजरा, ज्वार, धान, गेहूं व गन्ना को भी व्यापक नुकसान पहुंचाते हैं।
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यांत्रिक और रसायनिक विधि से किया जा सकता है प्रबंधन
कृषि रक्षा विशेषज्ञ के अनुसार, इस कीट का प्रबंधन यांत्रिक तरीके से किया जा सकता है। इसके लिए प्रति एकड़ छह से आठ बर्ड पर्चर (कीटों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला जाल) खेत में लगा देना चाहिए। इसके अलावा रसायनिक तरीके से भी इसका प्रबंधन किया जा सकता है। पांच प्रतिशत पौध क्षति की दशा में एनपीबी 250 एलई या मेटाराइजियम एनिप्सोली पांच ग्राम प्रति लीटर या बैसिलस थुरिनजैनसिस (बीटी) दो ग्राम प्रति लीटर की दर से क्षेत्र में छिड़काव करें। 10 से 20 प्रतिशत पौध क्षति की दशा में क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी 0.4 मिली प्रति लीटर पानी या इमामेक्टिन बेनजोइट 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी या स्पाइनोसैड 0.3 मिली या थायामेथाक्साम 12.6 प्रतिशत और लेम्ब्डासाइहैलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत 0.5 मिली प्रति लीटर पानी में मिला कर छिड़काव करें। अधिक जानकारी के लिए कृषि रक्षा विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
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संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। बेहतर बारिश से धान की फसल अच्छी होने की संभावना है। ऐेसे में उत्पादन अधिक हो इसके लिए किसानों को निगरानी के साथ ही कीटों व रोगों से बचाव करना होगा। वर्तमान में प्रदेश के कई जिलों में फाल आर्मी वर्म कीट या सैनिक कीट का प्रकोप बढ़ रहा है। ऐसे में कृषि रक्षा विभाग ने किसानों को इससे सहज रहने की अपील की है।
कृषि रक्षा विशेषज्ञ अजय कुमार तिवारी बताते हैं कि फाल आर्मी कीट की मादा पत्तियों की निचली सतह पर अंडे देती हैं। अंडे एक से ज्यादा परत में सफेद झांग से ढके होते हैं। अंडे हल्के पीले या भूरे रंग में होते हैं। फाल आर्मी वर्म का लार्वा (अंडे से निकलने पर कीट का प्रारंभिक स्वरूप) भूरा या धूसर रंग का होता है। कीट के दोनों बगल तीन पतली सफेेद धारियां होती हैं और सिर पर अंग्रेजी का उल्टा वाई अक्षर दिखता है। शरीर के दूसरे अंतिम व अन्य भागों पर वर्गाकार चार बिंदु दिखाई पड़ते हैं। इस कीट की प्रथम अवस्था सबसे अधिक हानिकारक होती है। इन्हें मक्के की फसल इसे सर्वाधिक पसंद होती है। इसके साथ ही ये बाजरा, ज्वार, धान, गेहूं व गन्ना को भी व्यापक नुकसान पहुंचाते हैं।
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यांत्रिक और रसायनिक विधि से किया जा सकता है प्रबंधन
कृषि रक्षा विशेषज्ञ के अनुसार, इस कीट का प्रबंधन यांत्रिक तरीके से किया जा सकता है। इसके लिए प्रति एकड़ छह से आठ बर्ड पर्चर (कीटों को अपनी ओर आकर्षित करने वाला जाल) खेत में लगा देना चाहिए। इसके अलावा रसायनिक तरीके से भी इसका प्रबंधन किया जा सकता है। पांच प्रतिशत पौध क्षति की दशा में एनपीबी 250 एलई या मेटाराइजियम एनिप्सोली पांच ग्राम प्रति लीटर या बैसिलस थुरिनजैनसिस (बीटी) दो ग्राम प्रति लीटर की दर से क्षेत्र में छिड़काव करें। 10 से 20 प्रतिशत पौध क्षति की दशा में क्लोरेंट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी 0.4 मिली प्रति लीटर पानी या इमामेक्टिन बेनजोइट 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी या स्पाइनोसैड 0.3 मिली या थायामेथाक्साम 12.6 प्रतिशत और लेम्ब्डासाइहैलोथ्रिन 9.5 प्रतिशत 0.5 मिली प्रति लीटर पानी में मिला कर छिड़काव करें। अधिक जानकारी के लिए कृषि रक्षा विभाग से संपर्क कर सकते हैं।
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