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Basti News: डग्गामार आगे रोडवेज पीछे... रोजाना एक से डेढ़ लाख का नुकसान
Tue, 10 Sep 2024 11:55 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 10 Sep 2024 11:55 PM IST
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परिवहन निगम के डिपो में खड़ीं बसें।
बस्ती-लखनऊ मार्ग पर सीएनजी कार और प्राइवेट बस मिलाकर दौड़ रहे 50 से अधिक वाहन
प्रति व्यक्ति तीन सौ रुपये वसूल रहे किराया, सरकारी बसों में सवारियों का टोटा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। डग्गामार वाहन रोडवेज बसों पर भारी पड़ रहे हैं। बस्ती-लखनऊ हाईवे से लेकर सिद्धार्थनगर और बढ़नी रूट पर डग्गामार वाहनों का बोलबाला है। इनके आगे रोडवेज बसें पीछे छूट जा रही हैं। यदि यह कहा जाए कि डग्गामार वाहन रोडवेज डिपो के समानांतर व्यवस्था में चलाए जा रहे हैं तो गलत नहीं होगा। केवल बस्ती-लखनऊ हाईवे पर 50 से अधिक डग्गामार वाहन दिन-रात फर्राटे रहे हैं। इससे परिवहन निगम को तगड़ा झटका लग रहा है। बस्ती डिपो को रोजाना एक से डेढ़ लाख रुपये की चपत लग रही है।
बताया जा रहा है कि बस्ती-लखनऊ रूट पर सीएनजी कार और बस मिलाकर 50 से अधिक डग्गावाहन चल रहे हैं। रोडवेज गेट से लेकर हाईवे के प्रमुख चौराहों तक यह खुलेआम सवारियां बैठा रहे हैं। जबकि इन वाहनों को सवारी लेकर चलने की परमिट नहीं दी गई है। दिनभर में इन वाहनों का बस्ती से लखनऊ तक एक फेरा लग रहा है। औसतन दो हजार यात्री ढोए जा रहे हैं। लखनऊ तक प्रति यात्री तीन सौ रुपये किराया है।
दोनों तरफ का किराया जोड़ लिया जाए तो केवल इसी रूट पर प्रतिदिन औसतन 60 हजार रुपये का झटका लग रहा है। डग्गामार वाहनों पर कार्रवाई भी यदाकदा हो रही है। परिवहन विभाग से गहरी पैठ बनाकर वाहन माफिया खुलेआम डग्गामार वाहनों का संचालन करा रहे हैं। बस्ती-लखनऊ रूट पर डिपो की तरफ से दो दर्जन बसों को दौड़ाया जा रहा है। मगर, अधिकतर में सवारियां नहीं पूरी हो रही है। आधी-अधूरी सीटों पर यात्री बैठाकर इन बसों को दौड़ना पड़ रहा है। इससे बस्ती डिपो की आमदनी को चपत लग रही है।
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इन रूटों पर भी डग्गामार वाहन
बस्ती-सिद्धार्थनगर, बस्ती-बांसी रूट पर भी डग्गामार वाहनों की भरमार है। छोटे वैन से लेकर लग्जरी बस तक बिना परमिट के दौड़ाए जा रहे हैं। रोडवेज गेट के सामने से ही इन वाहनों में सुबह से देर रात तक सवारियां बैठाई जा रही हैं। इसके अलावा बड़ेवन, कटरा, मालवीय रोड पर भी डग्गामार वाहनों का ठहराव हो रहा है। मगर, इन्हें यातायात पुलिस या परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम रोकने में रुचि नहीं लेती है।
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समूह बनाकर निकलते हैं रोडवेज कर्मी
बांसी, सिद्धार्थनगर और लखनऊ रूट की बसों में सवारी भरने के लिए रोडवेज डिपो के चालक-परिचालक एवं यूनियन कर्मचारियों को रोजाना कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। वह अपने ही बेड़े में सवारी भरने के लिए डिपो से समूह बनाकर सड़क तक आते हैं। इस दौरान सवारियों को लेकर डग्गामार वाहन चालक और डिपो कर्मचारियों में खींचतान बढ़ जाती है। सुबह 6 से 10 बजे तक अक्सर नोकझोंक होते हुए देखा जाता है। काफी जद्दोजहद के बाद डिपो की बसों में सवारियां बैठ रही हैं।
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कंडम बसों के नाते भी डिपो हो रहा पीछे
रोडवेज डिपो में नई बसों की संख्या इस साल बढ़ी जरूर है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। वर्तमान में 102 बसें डिपो और 25 अनुबंधित हैं। इनमें 30 बसें नई भी शामिल हैं। नई बसें बस्ती-लखनऊ, कानपुर, दिल्ली रूट पर दौड़ाई जा रही है। जबकि पुरानी बसों को अयोध्या, बांसी, बढ़नी आदि लोकल रूट पर चलाया जा रहा है। पुरानी बसों में 60 फीसदी बसें क्षमता से अधिक चल चुकी हैं या 15 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी हैं। इसलिए डग्गामार वाहनों की अपेक्षा यह बसें पीछे छूट जा रही हैं। यात्री समय की बचत और अच्छी सुविधा के चलते प्राइवेट लग्जरी वाहन एवं निजी बसों से यात्रा करना पसंद कर रहे हैं।
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सात सवारी पर दौड़ जा रही सीएनजी कार
सात सीटर सीएनजी कार बिना परमिट के सवारी ढोने के काम में उपयोग की जा रही है। हाईवे और रोडवेज पर सात सवारी होते ही यह लखनऊ तक दौड़ जा रही है। कुछ वाहन तो सुबह पांच से रात दस बजे तक दो चक्कर पूरा कर रहे हैं। इसलिए बस से अच्छी कार की यात्रा लोग मान रहे हैं। बस में 40 से 50 सवारी एकत्र करने में समय लगता है। जबकि कार में 10 से 15 मिनट में ही सवारी भर जा रही है। लोगों की यात्रा एसी में हो रही है और समय का भी बचत हो रहा है। डिपो अभी इसका काट नहीं निकाल पा रहा है।
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कोट
डग्गामार वाहनों के खिलाफ समय-समय पर संयुक्त अभियान चलाया जाता है। इसके लिए पत्राचार भी होता है। वर्चुअल बैठक में भी उच्चाधिकारियों के संज्ञान में यह प्रकरण लाया गया है। जल्द ही कोई विकल्प निकलेगा।
-आयुष भटनागर, एआरएम
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प्रवर्तन टीम लगातार सक्रिय है। डग्गामार वाहनों को लेकर लोकल रूट और हाईवे पर चेकिंग की जाती है। इसी माह एक दर्जन डग्गामार वाहन पकड़े गए हैं।
-पंकज सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन
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प्रति व्यक्ति तीन सौ रुपये वसूल रहे किराया, सरकारी बसों में सवारियों का टोटा
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। डग्गामार वाहन रोडवेज बसों पर भारी पड़ रहे हैं। बस्ती-लखनऊ हाईवे से लेकर सिद्धार्थनगर और बढ़नी रूट पर डग्गामार वाहनों का बोलबाला है। इनके आगे रोडवेज बसें पीछे छूट जा रही हैं। यदि यह कहा जाए कि डग्गामार वाहन रोडवेज डिपो के समानांतर व्यवस्था में चलाए जा रहे हैं तो गलत नहीं होगा। केवल बस्ती-लखनऊ हाईवे पर 50 से अधिक डग्गामार वाहन दिन-रात फर्राटे रहे हैं। इससे परिवहन निगम को तगड़ा झटका लग रहा है। बस्ती डिपो को रोजाना एक से डेढ़ लाख रुपये की चपत लग रही है।
बताया जा रहा है कि बस्ती-लखनऊ रूट पर सीएनजी कार और बस मिलाकर 50 से अधिक डग्गावाहन चल रहे हैं। रोडवेज गेट से लेकर हाईवे के प्रमुख चौराहों तक यह खुलेआम सवारियां बैठा रहे हैं। जबकि इन वाहनों को सवारी लेकर चलने की परमिट नहीं दी गई है। दिनभर में इन वाहनों का बस्ती से लखनऊ तक एक फेरा लग रहा है। औसतन दो हजार यात्री ढोए जा रहे हैं। लखनऊ तक प्रति यात्री तीन सौ रुपये किराया है।
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दोनों तरफ का किराया जोड़ लिया जाए तो केवल इसी रूट पर प्रतिदिन औसतन 60 हजार रुपये का झटका लग रहा है। डग्गामार वाहनों पर कार्रवाई भी यदाकदा हो रही है। परिवहन विभाग से गहरी पैठ बनाकर वाहन माफिया खुलेआम डग्गामार वाहनों का संचालन करा रहे हैं। बस्ती-लखनऊ रूट पर डिपो की तरफ से दो दर्जन बसों को दौड़ाया जा रहा है। मगर, अधिकतर में सवारियां नहीं पूरी हो रही है। आधी-अधूरी सीटों पर यात्री बैठाकर इन बसों को दौड़ना पड़ रहा है। इससे बस्ती डिपो की आमदनी को चपत लग रही है।
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इन रूटों पर भी डग्गामार वाहन
बस्ती-सिद्धार्थनगर, बस्ती-बांसी रूट पर भी डग्गामार वाहनों की भरमार है। छोटे वैन से लेकर लग्जरी बस तक बिना परमिट के दौड़ाए जा रहे हैं। रोडवेज गेट के सामने से ही इन वाहनों में सुबह से देर रात तक सवारियां बैठाई जा रही हैं। इसके अलावा बड़ेवन, कटरा, मालवीय रोड पर भी डग्गामार वाहनों का ठहराव हो रहा है। मगर, इन्हें यातायात पुलिस या परिवहन विभाग की प्रवर्तन टीम रोकने में रुचि नहीं लेती है।
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समूह बनाकर निकलते हैं रोडवेज कर्मी
बांसी, सिद्धार्थनगर और लखनऊ रूट की बसों में सवारी भरने के लिए रोडवेज डिपो के चालक-परिचालक एवं यूनियन कर्मचारियों को रोजाना कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। वह अपने ही बेड़े में सवारी भरने के लिए डिपो से समूह बनाकर सड़क तक आते हैं। इस दौरान सवारियों को लेकर डग्गामार वाहन चालक और डिपो कर्मचारियों में खींचतान बढ़ जाती है। सुबह 6 से 10 बजे तक अक्सर नोकझोंक होते हुए देखा जाता है। काफी जद्दोजहद के बाद डिपो की बसों में सवारियां बैठ रही हैं।
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कंडम बसों के नाते भी डिपो हो रहा पीछे
रोडवेज डिपो में नई बसों की संख्या इस साल बढ़ी जरूर है, लेकिन यह पर्याप्त नहीं है। वर्तमान में 102 बसें डिपो और 25 अनुबंधित हैं। इनमें 30 बसें नई भी शामिल हैं। नई बसें बस्ती-लखनऊ, कानपुर, दिल्ली रूट पर दौड़ाई जा रही है। जबकि पुरानी बसों को अयोध्या, बांसी, बढ़नी आदि लोकल रूट पर चलाया जा रहा है। पुरानी बसों में 60 फीसदी बसें क्षमता से अधिक चल चुकी हैं या 15 वर्ष की आयु पूरी कर चुकी हैं। इसलिए डग्गामार वाहनों की अपेक्षा यह बसें पीछे छूट जा रही हैं। यात्री समय की बचत और अच्छी सुविधा के चलते प्राइवेट लग्जरी वाहन एवं निजी बसों से यात्रा करना पसंद कर रहे हैं।
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सात सवारी पर दौड़ जा रही सीएनजी कार
सात सीटर सीएनजी कार बिना परमिट के सवारी ढोने के काम में उपयोग की जा रही है। हाईवे और रोडवेज पर सात सवारी होते ही यह लखनऊ तक दौड़ जा रही है। कुछ वाहन तो सुबह पांच से रात दस बजे तक दो चक्कर पूरा कर रहे हैं। इसलिए बस से अच्छी कार की यात्रा लोग मान रहे हैं। बस में 40 से 50 सवारी एकत्र करने में समय लगता है। जबकि कार में 10 से 15 मिनट में ही सवारी भर जा रही है। लोगों की यात्रा एसी में हो रही है और समय का भी बचत हो रहा है। डिपो अभी इसका काट नहीं निकाल पा रहा है।
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कोट
डग्गामार वाहनों के खिलाफ समय-समय पर संयुक्त अभियान चलाया जाता है। इसके लिए पत्राचार भी होता है। वर्चुअल बैठक में भी उच्चाधिकारियों के संज्ञान में यह प्रकरण लाया गया है। जल्द ही कोई विकल्प निकलेगा।
-आयुष भटनागर, एआरएम
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प्रवर्तन टीम लगातार सक्रिय है। डग्गामार वाहनों को लेकर लोकल रूट और हाईवे पर चेकिंग की जाती है। इसी माह एक दर्जन डग्गामार वाहन पकड़े गए हैं।
-पंकज सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन