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Basti News: जांच-परख कर खरीदें खोवा-पनीर, वरना हो जाएंगे बीमार
Sun, 24 Mar 2024 01:05 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 24 Mar 2024 01:05 AM IST
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पर्व से पहले कार्रवाई की औपचारिकता निभा रहा खाद्य सुरक्षा विभाग
बाजार में पटा है मिलावटी मावा व पनीर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। होली के उल्लास के बीच सेहत को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। बाजार में मिलावटी खोवा और पनीर की भरमार है। जानकारों की मानें तो धंधेबाज पाउडर और रिफाइंड ऑयल से बना खोवा और सोयाबीन मिश्रित पनीर बाजार में खपा रहे हैं। ऐसे में बाजार जाएं तो खरीदारी थोड़ा सतर्क रहकर करें। ज्यादा चकमदार खोवा या पनीर की चकाचौंध में न आएं। जांच-परखकर ही खरीदें, वरना बीमार पड़ सकते हैं।
मिठाई व गुझिया बनाने के लिए खोवा की जबरदस्त मांग हैमार्केट में मांग से भी अधिक खोवा मौजूद है। पांच सौ रुपये किलो से लेकर 200 रुपये किलो तक के भाव हैं। पनीर भी 150 से लेकर 260 रुपये किलो तक बिक रहा है। दरअसल, रेट का यह खेल इनमें हो रही मिलावट के चलते ही है। बाजार की बढ़ी मांग को मिलावटी खोवा और पनीर से पूरा किया जा रहा है।
खोवा व्यापारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि एक विशेष प्रकार के पाउडर को रिफाइंड ऑयल के साथ गूंधकर मावा तैयार हो जा रहा है। वहीं पाउडर और सोयाबीन के विशेष मिश्रण को फ्रीज में जमाकर बिल्कुल असली जैसा पनीर बनाया जा रहा है। बीते दो दिनों में मार्केट में डेढ़ क्विंटल खोवा मिठाई व 100 किलो खोवा पकड़ा भी जा चुका है।
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शहर की एक दुकान पर मिठाई बनाने का काम करने वाले राजाराम ने बताया कि मिठाई और गुझिया की मांग बढ़ गई है। इतना असली खोवा से दे पाना संभव नहीं है। असली खोवा का रेट 500 रुपये प्रति किलो से ऊपर है। उससे मिठाई या गुझिया बनाने में जितनी लागत आएगी, उस हिसाब से बिक्री मूल्य नहीं मिलेगा। दुकान के काउंटर में दिखाने के लिए जो मिठाई बनाई जाती है, उसमें गुणवत्ता का विशेष ख्याल रखा जाता है। बाकी मार्केट में जो मिल रहा है। उससे ही बनाना पड़ेगा।
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ज्यादा चमकदार मतलब मिलावट अधिक
खोवा कारोबारी रमेश कुमार गुप्ता बताते हैं कि बाजार में चार रेट के खोवा मौजूद हैं।सबसे अच्छी क्वालिटी का खोवा जिसे देसी कहा जाता है, उसकी कीमत 500 रुपये प्रति किलो है। गेहूं के रंग जैसा दिखने वाला यह खोवा स्वाद और सुगंध में भी औरों से अलग होता है। इसके बाद 450 रुपये, 300 रुपये और 200 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव का भी खोवा उपलब्ध है, लेकिन इनमें पाउडर और रिफांइड ऑयल की मिलावट है। पाउडर को रिफाइंड में गूंथकर यह खोवा तैयार होता है। पाउडर से बने दूध और सोयाबीन को पीसकर पनीर बनाया जाता है।
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शुद्धता के लिए घर पर बना रहे गुझिया
बस्ती। यूं तो बाजार में हर चीज अब आसानी से उपलब्ध है, फिर भी घर में बनी गुझिया व अन्य पकवानों का स्वाद और शुद्धता अलग ही है। घर में इन्हें स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी ध्यान रखते हुए बनाया जाता है। यहीं कारण है कि आज भी महिलाएं बाजार में सभी सामान की उपलब्धता के बावजूद घर पर खुद ही पकवान बनाना अधिक पसंद करतीं हैं। होली के अवसर पर महिलाएं पकवान बनाने में जुट गई हैं। घरों में गुझिया की महक फैलने लगी है। बच्चों की जिद्द या स्वाद का चस्का चाहे जो भी हो घरों में गुझिया, नमकीन, पापड़, मालपुआ, मठरी, खुरमा बनने शुरू हो गए हैं।
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होली पर खपेगा 300 क्विंटल मावा व 300 क्विंटल पनीर
बस्ती। होली मंगलवार को पड़ रही है। ऐसे में लोग मांस-मछली से दूरी बनाएंगे। पनीर और खोवा के थोक कारोबारियों के अनुसार इस होली 300 क्विंटल खोवा और 300 क्विंटल पनीर के खप जाने की उम्मीद है। रोडवेज स्थित खोवा मंडी में इन दिनों 20 से 30 क्विंटल खोवा की आवक कानपुर जरवल रोड व गोंडा आदि जगहों से हो रही है। खोवा व्यापारी अमीर चंद ने बताया कि उम्मीद है कि होली तक 300 क्विंटल खोवा की बिक्री हो जाएगी। ब्लाक रोड पर पनीर व खोवा के थोक व्यापारी प्रभुप्रीत सिंह, पनीर के थोक व्यापारी रामकुमार ने बताया कि शहर में करीब 300 क्विंटल पनीर बिकने की संभावना है।
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खाद्य सुरक्षा अधिकारी धनंजय सिंह बताते हैं-खोवा में आलू, आटा, शकरकंदी समेत कई वस्तुएं मिलाई जा रही हैं। त्योहार को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। कई जगहों से लिए गए नमूनों की जांच भी की जा रही है। लोग थोड़ी सी सावधानी से इसे पहचान सकते हैं।
अगर खोवा से दुर्गंध आ रही है, तो वह खराब है। इसे कत्तई न खरीदें।
- खोवा को हथेली पर रखकर गोली बनाएं। अगर गोली एकदम चिकनी है तो खोवा ठीक होगा।
खोवा को हथेली पर रखकर कुछ देर तक मसलें। इससे शुद्ध देसी घी की सुगंध आएगी।
खोवा को गर्म करें और उस पर एक बूंद आयोडीन टिंचर डालें अगर खोवा का रंग नीला हो जाए तो समझ लें कि उसमें मिलावट है।
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मिलावटी खोवा व पनीर सेहत के साथ लिवर के लिए नुकसानदायक
बस्ती। होली का उत्साह बिना रंग और मिठाईयों के संभव ही नहीं है। लेकिन मुनाफाखोरों ने अपने फायदे के लिए इसे बदरंग बनाने की तैयारी कर ली है। बाजार में केमिकल युक्त रंग और नकली व मिलावटी मिठाइयों की भरमार है। इनके प्रयोग से बाल और त्वचा से लेकर पेट तक खराब होता है। मिलावटी मिठाइयों से लिवर तक पर असर होता है। सीएमओ डॉ. रमाशंकर दुबे ने बताया कि होलिका दहन में लकड़ी के अलावा और कोई ज्वलनशील पदार्थ का प्रयोग न करें। क्योंकि इससे वातावरण प्रदूषित होगा। हमेशा हर्बल रंग का प्रयोग करें रासायनिक रंगों का प्रयोग न करें क्योंकि रासायनिक रंग जब हमारे शरीर के संपर्क में आता है तो हमें विभिन्न प्रकार से नुकसान पहुंचाता है। रासायनिक रंग यदि बालों में लग जाता है तो बालों की चमक खत्म हो जाती है, रूखापन आ जाता है, डैंड्रफ होने की संभावना बढ़ जाती है और बाल झड़ने लगते हैं।
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बाजार में पटा है मिलावटी मावा व पनीर
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। होली के उल्लास के बीच सेहत को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। बाजार में मिलावटी खोवा और पनीर की भरमार है। जानकारों की मानें तो धंधेबाज पाउडर और रिफाइंड ऑयल से बना खोवा और सोयाबीन मिश्रित पनीर बाजार में खपा रहे हैं। ऐसे में बाजार जाएं तो खरीदारी थोड़ा सतर्क रहकर करें। ज्यादा चकमदार खोवा या पनीर की चकाचौंध में न आएं। जांच-परखकर ही खरीदें, वरना बीमार पड़ सकते हैं।
मिठाई व गुझिया बनाने के लिए खोवा की जबरदस्त मांग हैमार्केट में मांग से भी अधिक खोवा मौजूद है। पांच सौ रुपये किलो से लेकर 200 रुपये किलो तक के भाव हैं। पनीर भी 150 से लेकर 260 रुपये किलो तक बिक रहा है। दरअसल, रेट का यह खेल इनमें हो रही मिलावट के चलते ही है। बाजार की बढ़ी मांग को मिलावटी खोवा और पनीर से पूरा किया जा रहा है।
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खोवा व्यापारी नाम न छापने की शर्त पर बताते हैं कि एक विशेष प्रकार के पाउडर को रिफाइंड ऑयल के साथ गूंधकर मावा तैयार हो जा रहा है। वहीं पाउडर और सोयाबीन के विशेष मिश्रण को फ्रीज में जमाकर बिल्कुल असली जैसा पनीर बनाया जा रहा है। बीते दो दिनों में मार्केट में डेढ़ क्विंटल खोवा मिठाई व 100 किलो खोवा पकड़ा भी जा चुका है।
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शहर की एक दुकान पर मिठाई बनाने का काम करने वाले राजाराम ने बताया कि मिठाई और गुझिया की मांग बढ़ गई है। इतना असली खोवा से दे पाना संभव नहीं है। असली खोवा का रेट 500 रुपये प्रति किलो से ऊपर है। उससे मिठाई या गुझिया बनाने में जितनी लागत आएगी, उस हिसाब से बिक्री मूल्य नहीं मिलेगा। दुकान के काउंटर में दिखाने के लिए जो मिठाई बनाई जाती है, उसमें गुणवत्ता का विशेष ख्याल रखा जाता है। बाकी मार्केट में जो मिल रहा है। उससे ही बनाना पड़ेगा।
ज्यादा चमकदार मतलब मिलावट अधिक
खोवा कारोबारी रमेश कुमार गुप्ता बताते हैं कि बाजार में चार रेट के खोवा मौजूद हैं।सबसे अच्छी क्वालिटी का खोवा जिसे देसी कहा जाता है, उसकी कीमत 500 रुपये प्रति किलो है। गेहूं के रंग जैसा दिखने वाला यह खोवा स्वाद और सुगंध में भी औरों से अलग होता है। इसके बाद 450 रुपये, 300 रुपये और 200 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव का भी खोवा उपलब्ध है, लेकिन इनमें पाउडर और रिफांइड ऑयल की मिलावट है। पाउडर को रिफाइंड में गूंथकर यह खोवा तैयार होता है। पाउडर से बने दूध और सोयाबीन को पीसकर पनीर बनाया जाता है।
शुद्धता के लिए घर पर बना रहे गुझिया
बस्ती। यूं तो बाजार में हर चीज अब आसानी से उपलब्ध है, फिर भी घर में बनी गुझिया व अन्य पकवानों का स्वाद और शुद्धता अलग ही है। घर में इन्हें स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी ध्यान रखते हुए बनाया जाता है। यहीं कारण है कि आज भी महिलाएं बाजार में सभी सामान की उपलब्धता के बावजूद घर पर खुद ही पकवान बनाना अधिक पसंद करतीं हैं। होली के अवसर पर महिलाएं पकवान बनाने में जुट गई हैं। घरों में गुझिया की महक फैलने लगी है। बच्चों की जिद्द या स्वाद का चस्का चाहे जो भी हो घरों में गुझिया, नमकीन, पापड़, मालपुआ, मठरी, खुरमा बनने शुरू हो गए हैं।
होली पर खपेगा 300 क्विंटल मावा व 300 क्विंटल पनीर
बस्ती। होली मंगलवार को पड़ रही है। ऐसे में लोग मांस-मछली से दूरी बनाएंगे। पनीर और खोवा के थोक कारोबारियों के अनुसार इस होली 300 क्विंटल खोवा और 300 क्विंटल पनीर के खप जाने की उम्मीद है। रोडवेज स्थित खोवा मंडी में इन दिनों 20 से 30 क्विंटल खोवा की आवक कानपुर जरवल रोड व गोंडा आदि जगहों से हो रही है। खोवा व्यापारी अमीर चंद ने बताया कि उम्मीद है कि होली तक 300 क्विंटल खोवा की बिक्री हो जाएगी। ब्लाक रोड पर पनीर व खोवा के थोक व्यापारी प्रभुप्रीत सिंह, पनीर के थोक व्यापारी रामकुमार ने बताया कि शहर में करीब 300 क्विंटल पनीर बिकने की संभावना है।
खाद्य सुरक्षा अधिकारी धनंजय सिंह बताते हैं-खोवा में आलू, आटा, शकरकंदी समेत कई वस्तुएं मिलाई जा रही हैं। त्योहार को लेकर लगातार कार्रवाई की जा रही है। कई जगहों से लिए गए नमूनों की जांच भी की जा रही है। लोग थोड़ी सी सावधानी से इसे पहचान सकते हैं।
अगर खोवा से दुर्गंध आ रही है, तो वह खराब है। इसे कत्तई न खरीदें।
- खोवा को हथेली पर रखकर गोली बनाएं। अगर गोली एकदम चिकनी है तो खोवा ठीक होगा।
खोवा को हथेली पर रखकर कुछ देर तक मसलें। इससे शुद्ध देसी घी की सुगंध आएगी।
खोवा को गर्म करें और उस पर एक बूंद आयोडीन टिंचर डालें अगर खोवा का रंग नीला हो जाए तो समझ लें कि उसमें मिलावट है।
मिलावटी खोवा व पनीर सेहत के साथ लिवर के लिए नुकसानदायक
बस्ती। होली का उत्साह बिना रंग और मिठाईयों के संभव ही नहीं है। लेकिन मुनाफाखोरों ने अपने फायदे के लिए इसे बदरंग बनाने की तैयारी कर ली है। बाजार में केमिकल युक्त रंग और नकली व मिलावटी मिठाइयों की भरमार है। इनके प्रयोग से बाल और त्वचा से लेकर पेट तक खराब होता है। मिलावटी मिठाइयों से लिवर तक पर असर होता है। सीएमओ डॉ. रमाशंकर दुबे ने बताया कि होलिका दहन में लकड़ी के अलावा और कोई ज्वलनशील पदार्थ का प्रयोग न करें। क्योंकि इससे वातावरण प्रदूषित होगा। हमेशा हर्बल रंग का प्रयोग करें रासायनिक रंगों का प्रयोग न करें क्योंकि रासायनिक रंग जब हमारे शरीर के संपर्क में आता है तो हमें विभिन्न प्रकार से नुकसान पहुंचाता है। रासायनिक रंग यदि बालों में लग जाता है तो बालों की चमक खत्म हो जाती है, रूखापन आ जाता है, डैंड्रफ होने की संभावना बढ़ जाती है और बाल झड़ने लगते हैं।