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Basti News: सावधान, पैरामिक्सो वायरस बढ़ा रहा बच्चों में गलसुआ
Sun, 31 Dec 2023 11:40 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Sun, 31 Dec 2023 11:40 PM IST
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बस्ती। महर्षि वशिष्ठ मेडिकल कॉलेज व जिला चिकित्सालय में इन दिनों गलसुआ बीमारी के मामले आने शुरू हो गए हैं। एकाएक कई मामलों के आने के बाद महकमा भी सतर्क हो गया है। अस्पताल के ईएनटी विभाग की ओपीडी में औसतन 20 से 25 मामले रोज आ रहे हैं। इनमें सात से 10 और 15 से 16 साल के बच्चे अधिक हैं। डॉक्टरों की मानें तो छुआछूत का यह रोग पैरामिक्सो नामक वायरस के सक्रिय होने से फैल रहा है। यह वायरस बच्चों को अपना शिकार बना रहा है। गलसुआ समय पर दवा न कराने पर यह खतरनाक हो सकता है।
मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल गले से संबंधित रोग के मामले बढ़े हैं। ईएनटी विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि यह एक संक्रामक रोग है, जो गाल के नीचे जबड़ों के पास स्थित पेरोटिड ग्रंथियों में पैरोमिक्सो वायरस के संक्रमण के फैलने से होता है। यह ग्रंथियां लार बनाती हैं। संक्रमण के कारण इस रोग में गालों में सूजन आ जाती है। हालांकि इसके लक्षण जल्दी नजर नहीं आते हैं लेकिन इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। मरीज के गालों और गर्दन में इस रोग के कारण अधिक दर्द होता है। लिहाजा उपचार के लिए तुरंत अस्पताल आना चाहिए।
मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में प्रोफेसर डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि गलसुआ के कुछ मामले सामने आए हैं। उचित परामर्श देकर दवा दी जा रही है। ईएनटी सर्जन जिला अस्पताल डॉ. एसएस कन्नौजिया का कहना है कि छोटे बच्चों में गलसुआ जैसे लक्षण दिख रहे। वहीं बड़े गले में सूजन लेकर आ रहे। इससे उनको खाने-पीने में समस्या हो रही है। दवा से यह ठीक हो जा रहा है।
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गलसुआ बीमारी के लक्षण
गलसुआ बीमारी के 15 से 20 दिन बाद लक्षण दिखने शुरू होते हैं। इसके लक्षण टांसिल से अधिक मिलते हैं। इसमें बुखार, सिरदर्द, भूख न लगना, कमजोरी, चबाने, निगलने में दर्द होना और गालों में सूजन आदि लक्षण नजर आते हैं।
रोग से करें बचाव
ईएनटी विभाग के डॉ. एसएस कन्नौजिया ने बताया कि गलसुआ या मम्प्स होने पर गर्म पानी पीना चाहिए। इसमें दवाई भी दी जाती हैं लेकिन उसे केवल चिकित्सक की ओर से पर्ची पर लिखने के बाद ही सेवन करना चाहिए। इसके अलावा मरीज को ओरल हाइजीन का ध्यान रखना चाहिए। एक सप्ताह से लेकर 10 दिन तक अलग भी रहना चाहिए। जूठा खाने से भी परहेज करना चाहिए और न ही दूसरों को खिलाना चाहिए।
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मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल गले से संबंधित रोग के मामले बढ़े हैं। ईएनटी विभाग के डॉक्टरों का कहना है कि यह एक संक्रामक रोग है, जो गाल के नीचे जबड़ों के पास स्थित पेरोटिड ग्रंथियों में पैरोमिक्सो वायरस के संक्रमण के फैलने से होता है। यह ग्रंथियां लार बनाती हैं। संक्रमण के कारण इस रोग में गालों में सूजन आ जाती है। हालांकि इसके लक्षण जल्दी नजर नहीं आते हैं लेकिन इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। मरीज के गालों और गर्दन में इस रोग के कारण अधिक दर्द होता है। लिहाजा उपचार के लिए तुरंत अस्पताल आना चाहिए।
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मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में प्रोफेसर डॉ. संजीव कुमार ने बताया कि गलसुआ के कुछ मामले सामने आए हैं। उचित परामर्श देकर दवा दी जा रही है। ईएनटी सर्जन जिला अस्पताल डॉ. एसएस कन्नौजिया का कहना है कि छोटे बच्चों में गलसुआ जैसे लक्षण दिख रहे। वहीं बड़े गले में सूजन लेकर आ रहे। इससे उनको खाने-पीने में समस्या हो रही है। दवा से यह ठीक हो जा रहा है।
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गलसुआ बीमारी के लक्षण
गलसुआ बीमारी के 15 से 20 दिन बाद लक्षण दिखने शुरू होते हैं। इसके लक्षण टांसिल से अधिक मिलते हैं। इसमें बुखार, सिरदर्द, भूख न लगना, कमजोरी, चबाने, निगलने में दर्द होना और गालों में सूजन आदि लक्षण नजर आते हैं।
रोग से करें बचाव
ईएनटी विभाग के डॉ. एसएस कन्नौजिया ने बताया कि गलसुआ या मम्प्स होने पर गर्म पानी पीना चाहिए। इसमें दवाई भी दी जाती हैं लेकिन उसे केवल चिकित्सक की ओर से पर्ची पर लिखने के बाद ही सेवन करना चाहिए। इसके अलावा मरीज को ओरल हाइजीन का ध्यान रखना चाहिए। एक सप्ताह से लेकर 10 दिन तक अलग भी रहना चाहिए। जूठा खाने से भी परहेज करना चाहिए और न ही दूसरों को खिलाना चाहिए।