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आयुष्मान योजना : 39 अस्पतालों के 3.01 करोड़ रुपये फंसे
Tue, 13 Jun 2023 01:20 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Tue, 13 Jun 2023 01:20 AM IST
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बस्ती। आयुष्मान योजना के तहत मरीजों का निशुल्क इलाज करने वाले 39 से अधिक अस्पतालों के 3.01 करोड़ रुपये फंस गए हैं। इसे लेकर अस्पताल संचालक जब विभाग से कारण जानना चाह रहे हैं, तो उन्हें यह बताया जा रहा है कि क्लेम पैनल की स्वीकृति कुछ कागजों के चलते नहीं हो पा रही है। जैसे ही वह अभिलेख उन्हें दिया जाएगा, धन मिल जाएगा।
जानकारी के मुताबिक, जिले में 17 सरकारी और 39 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हैं। इन अस्पतालों में आयुष्मान योजना के लाभार्थियों का निशुल्क इलाज होता है। हर दिन इन अस्पतालों में करीब 200 से 250 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें जनरल सर्जरी से लेकर बड़ी सर्जरी तक के मरीज शामिल हैं। करीब 100 के आसपास सर्जरी भी हो रही है। अलग-अलग सर्जरी के अलग-अलग रेट भी आयुष्मान योजना में तय है। अस्पताल संचालक इन मरीजों का ऑपरेशन तो कर दे रहे हैं, लेकिन सर्जरी के नाम पर रुपये लेने में अस्पताल संचालकों के पसीने छूट जा रहे हैं।
नाम न छपने की शर्त पर एक संचालक ने बताया कि ऑपरेशन के बाद रुपये लेना थोड़ा कठिन है। एक भी कागजात अगर सत्यापन के दौरान छूट जा रहा है, तो नए सिरे से कागजात जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती हैं। जबकि, नियम के तहत 21 दिन बाद भुगतान हो जाना चाहिए। लेकिन, 50 फीसदी मामलों में ऐसा नहीं है। एक-एक केस में तीन से चार माह बाद भुगतान हो रहा है।
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क्लेम करने 21 दिन बाद है भुगतान का नियम
आयुष्मान योजना के तहत अगर किसी मरीज का निजी अस्पतालों में इलाज होता है, तो वह 21 दिन के अंदर क्लेम कर सकता है। क्लेम करने के बाद 21 दिन बाद ही उसका भुगतान करने का नियम है। अगर 21 दिनों के अंदर कोई क्लेम नहीं करता है तो उसे भुगतान नहीं किया जाएगा।
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सीएमओ डॉ. आरपी मिश्र ने कहा कि आयुष्मान योजना का लाभ शत प्रतिशत मरीजों को दिया जा रहा है। योजना के तहत पूरे प्रदेश में कार्ड बनाने में हम दूसरे स्थान पर हैं। योजना के तहत मरीजों के इलाज में अब तक 34.40 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। अस्पताल संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि मरीज का इलाज करते समय एक-एक कागजात सही से अपलोड करें, जिससे की कोई दिक्कत न हो। डाक्यूमेंट के चक्कर में लोगों के रुपये नहीं मिल रहे होंगे। कमलेश व तफज्जुल का मामला संज्ञान में है। इसे प्रदेश स्तर पर भेजा गया है। शीघ्र ही इन्हें आयुष्मान कार्ड का लाभ मिल जाएगा।
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आंकड़ों पर एक नजर
259677 लाख लाभार्थी परिवार
44 हजार का अब तक जिले व गैर जिले में हुआ इलाज
32,500 मरीजों का इलाज जिले के अस्पतालों में हुआ है। इसका 29.28 करोड़ रुपये का भुगतान अब तक किया जा चुका है।
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आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए ये प्रमाणपत्र जरूरी
सीएमओ ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत उन्हीं लाभार्थियों का कार्ड बनाया जाता है, जिनका नाम योजना में शामिल होता है। वर्ष 2011 की आर्थिक जनगणना के अनुसार, जिनके नाम शामिल किए गए थे, उन्हीं लोगों का कार्ड बनाया जा रहा है। इसके अलावा मुख्यमंत्री जन आरोग्य के तहत भी कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसके लिए पारिवारिक समग्र आईडी के साथ एक पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन) लिया जाता है।इसके तहत परिवार का हर सदस्य संबद्ध अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का इलाज करा सकता है। 2011 की आर्थिक जनगणना के कार्ड, ई-ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी, आधार कार्ड जरूरी है। यह कार्ड कॉमन सर्विस सेंटर पर बनता है।
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आयुष्मान योजना का लाभ मरीजों को दिया जा रहा है। अस्पताल संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मरीज का इलाज करते समय एक-एक कागजात ठीक ढंग से अपलोड करें, जिससे कोई दिक्कत न हो। कागजात के चक्कर में लोगों के रुपये नहीं मिल रहे होंगे। -डॉ. आरपी मिश्र सीएमओ
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कार्ड होने के बाद भी नहीं हो पा रहा इलाज
कार्ड होते हुए भी मेरा इलाज नहीं हो पा रहा है। कई बार प्रयास किया गया, लेकिन मशीन ऑनलाइन निशान उठा नहीं रही है। इसके लिए शिकायत भी की, मगर अब तक मुझे कोई लाभ नहीं मिल सका है। सीएमओ से भी मिलकर शिकायत कर चुका हूं।
-कमलेश कुमार चौबाह
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मुझे गंभीर बीमारी है। पांच साल पहले आयुष्मान कार्ड बनाया गया था, मगर मेरा इलाज नहीं हो पा रहा है। इलाज के लिए ज्यादा रुपये की जरूरत है। कई बार आवेदन दे चुका हूं, मगर कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। -तफज्जुल, नटाईकला रुधौली
ये हैं अस्पताल जिनका है बकाया-
आदि शक्ति मेडिकल सेंटर- 61800
अक्षय हास्पिटल- 76600
अनंता हास्पिटल- 6,51,200
अवधेश सिंह नर्सिंग होम- 19800
अयोध्या आई हास्पिटल- 50100
बस्ती ट्रामा सेंटर- 2,11,600
केयर सेंटर- 1,00700
डिसेंट मल्टी स्पेशिलिटी हास्पिटल- 59,78,800
ग्लैक्सी आई इंस्टीट्यूट एंड पालीक्लीनिक- 33,14,400
ग्लोबल हास्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर- 20000
जीएस मल्टीस्पेशिलिटी हास्पिटल- 1,55,400
हिंद हास्पिटल - 26600
जेजे हास्पिटल- 1,87,200
खैर मेमोरियल हास्पिटल- 86200
किरन सर्जिकल सेंटर- 61,100
एमएस हास्पिटल- 1,07,600
नवज्योति आई हास्पिटल- 6,27,500
नवयुग मेडिकल सेंटर- 3,26,050
न्यू आदर्श हॉपिस्टल- 62200
नूर हास्पिटल- 97200
ओम आर्थोपैडिक एण्ड मल्टीस्पेशिलिटी हास्पिटल- 1,84200
पीएमसी नर्सिंग होम- 1,15000
प्रकाश मेडिकल सेंटर- 4,80400
आरसीसी मेडिकल मल्टीस्पेशिलिटी हॉपिस्टल- 31,100
रेमेडी प्लस सुपर स्पेशिलिटी हास्पिटल- 8,83200
एसएस मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल- 3,49300
संतकबीर आई हॉस्पिटल- 6,11,800
संकुश हास्पिटल- 13,46025
शर्मा हॉस्पिटल- 17,200
श्रीकृष्णा हॉस्पिटल- 8,35,659
एसआर हॉस्पिटल- 51,49,200
स्टार हॉस्पिटल- 15,38100
तथास्तु हॉस्पिटल- 5,84450
वीआरटीके ओमेन हॉस्पिटल- 12000
विशाल नर्सिंग होम- 14500
जियॉन हॉस्पिटल- 1,24,800
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जानकारी के मुताबिक, जिले में 17 सरकारी और 39 निजी अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़े हैं। इन अस्पतालों में आयुष्मान योजना के लाभार्थियों का निशुल्क इलाज होता है। हर दिन इन अस्पतालों में करीब 200 से 250 मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इनमें जनरल सर्जरी से लेकर बड़ी सर्जरी तक के मरीज शामिल हैं। करीब 100 के आसपास सर्जरी भी हो रही है। अलग-अलग सर्जरी के अलग-अलग रेट भी आयुष्मान योजना में तय है। अस्पताल संचालक इन मरीजों का ऑपरेशन तो कर दे रहे हैं, लेकिन सर्जरी के नाम पर रुपये लेने में अस्पताल संचालकों के पसीने छूट जा रहे हैं।
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नाम न छपने की शर्त पर एक संचालक ने बताया कि ऑपरेशन के बाद रुपये लेना थोड़ा कठिन है। एक भी कागजात अगर सत्यापन के दौरान छूट जा रहा है, तो नए सिरे से कागजात जमा करने की प्रक्रिया शुरू हो जाती हैं। जबकि, नियम के तहत 21 दिन बाद भुगतान हो जाना चाहिए। लेकिन, 50 फीसदी मामलों में ऐसा नहीं है। एक-एक केस में तीन से चार माह बाद भुगतान हो रहा है।
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क्लेम करने 21 दिन बाद है भुगतान का नियम
आयुष्मान योजना के तहत अगर किसी मरीज का निजी अस्पतालों में इलाज होता है, तो वह 21 दिन के अंदर क्लेम कर सकता है। क्लेम करने के बाद 21 दिन बाद ही उसका भुगतान करने का नियम है। अगर 21 दिनों के अंदर कोई क्लेम नहीं करता है तो उसे भुगतान नहीं किया जाएगा।
सीएमओ डॉ. आरपी मिश्र ने कहा कि आयुष्मान योजना का लाभ शत प्रतिशत मरीजों को दिया जा रहा है। योजना के तहत पूरे प्रदेश में कार्ड बनाने में हम दूसरे स्थान पर हैं। योजना के तहत मरीजों के इलाज में अब तक 34.40 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। अस्पताल संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि मरीज का इलाज करते समय एक-एक कागजात सही से अपलोड करें, जिससे की कोई दिक्कत न हो। डाक्यूमेंट के चक्कर में लोगों के रुपये नहीं मिल रहे होंगे। कमलेश व तफज्जुल का मामला संज्ञान में है। इसे प्रदेश स्तर पर भेजा गया है। शीघ्र ही इन्हें आयुष्मान कार्ड का लाभ मिल जाएगा।
आंकड़ों पर एक नजर
259677 लाख लाभार्थी परिवार
44 हजार का अब तक जिले व गैर जिले में हुआ इलाज
32,500 मरीजों का इलाज जिले के अस्पतालों में हुआ है। इसका 29.28 करोड़ रुपये का भुगतान अब तक किया जा चुका है।
आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए ये प्रमाणपत्र जरूरी
सीएमओ ने बताया कि आयुष्मान योजना के तहत उन्हीं लाभार्थियों का कार्ड बनाया जाता है, जिनका नाम योजना में शामिल होता है। वर्ष 2011 की आर्थिक जनगणना के अनुसार, जिनके नाम शामिल किए गए थे, उन्हीं लोगों का कार्ड बनाया जा रहा है। इसके अलावा मुख्यमंत्री जन आरोग्य के तहत भी कार्ड बनाए जा रहे हैं। इसके लिए पारिवारिक समग्र आईडी के साथ एक पहचान पत्र (आधार कार्ड, पैन) लिया जाता है।इसके तहत परिवार का हर सदस्य संबद्ध अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का इलाज करा सकता है। 2011 की आर्थिक जनगणना के कार्ड, ई-ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर आईडी, आधार कार्ड जरूरी है। यह कार्ड कॉमन सर्विस सेंटर पर बनता है।
आयुष्मान योजना का लाभ मरीजों को दिया जा रहा है। अस्पताल संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे मरीज का इलाज करते समय एक-एक कागजात ठीक ढंग से अपलोड करें, जिससे कोई दिक्कत न हो। कागजात के चक्कर में लोगों के रुपये नहीं मिल रहे होंगे। -डॉ. आरपी मिश्र सीएमओ
कार्ड होने के बाद भी नहीं हो पा रहा इलाज
कार्ड होते हुए भी मेरा इलाज नहीं हो पा रहा है। कई बार प्रयास किया गया, लेकिन मशीन ऑनलाइन निशान उठा नहीं रही है। इसके लिए शिकायत भी की, मगर अब तक मुझे कोई लाभ नहीं मिल सका है। सीएमओ से भी मिलकर शिकायत कर चुका हूं।
-कमलेश कुमार चौबाह
मुझे गंभीर बीमारी है। पांच साल पहले आयुष्मान कार्ड बनाया गया था, मगर मेरा इलाज नहीं हो पा रहा है। इलाज के लिए ज्यादा रुपये की जरूरत है। कई बार आवेदन दे चुका हूं, मगर कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। -तफज्जुल, नटाईकला रुधौली
ये हैं अस्पताल जिनका है बकाया-
आदि शक्ति मेडिकल सेंटर- 61800
अक्षय हास्पिटल- 76600
अनंता हास्पिटल- 6,51,200
अवधेश सिंह नर्सिंग होम- 19800
अयोध्या आई हास्पिटल- 50100
बस्ती ट्रामा सेंटर- 2,11,600
केयर सेंटर- 1,00700
डिसेंट मल्टी स्पेशिलिटी हास्पिटल- 59,78,800
ग्लैक्सी आई इंस्टीट्यूट एंड पालीक्लीनिक- 33,14,400
ग्लोबल हास्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर- 20000
जीएस मल्टीस्पेशिलिटी हास्पिटल- 1,55,400
हिंद हास्पिटल - 26600
जेजे हास्पिटल- 1,87,200
खैर मेमोरियल हास्पिटल- 86200
किरन सर्जिकल सेंटर- 61,100
एमएस हास्पिटल- 1,07,600
नवज्योति आई हास्पिटल- 6,27,500
नवयुग मेडिकल सेंटर- 3,26,050
न्यू आदर्श हॉपिस्टल- 62200
नूर हास्पिटल- 97200
ओम आर्थोपैडिक एण्ड मल्टीस्पेशिलिटी हास्पिटल- 1,84200
पीएमसी नर्सिंग होम- 1,15000
प्रकाश मेडिकल सेंटर- 4,80400
आरसीसी मेडिकल मल्टीस्पेशिलिटी हॉपिस्टल- 31,100
रेमेडी प्लस सुपर स्पेशिलिटी हास्पिटल- 8,83200
एसएस मल्टी स्पेशिलिटी हॉस्पिटल- 3,49300
संतकबीर आई हॉस्पिटल- 6,11,800
संकुश हास्पिटल- 13,46025
शर्मा हॉस्पिटल- 17,200
श्रीकृष्णा हॉस्पिटल- 8,35,659
एसआर हॉस्पिटल- 51,49,200
स्टार हॉस्पिटल- 15,38100
तथास्तु हॉस्पिटल- 5,84450
वीआरटीके ओमेन हॉस्पिटल- 12000
विशाल नर्सिंग होम- 14500
जियॉन हॉस्पिटल- 1,24,800