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Basti News: अम्मा ट्रेन में गर्दी बहुत है... दिवाली में बस से आइब, भले किराया ज्यादे लागी
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- दिल्ली एनसीआर में 12 नवंबर से बीएस- 4 बसों को नहीं मिलेगा प्रवेश
- ट्रेनों में सीटें हैं फुल, बसें भी एनसीआर की सीमा से आगे नहीं बढ़ सकेंगी
संवाद न्यूज एजेंसी
... हेलो, हां अम्मा नमस्ते...। खुश रहा बाबू, का हाल बा...। सब ठीक बा। ... कब अइबो। पहली के तनख्वाह मिली फिर निकलब। कैसे अइबो... ट्रेन से। ... नाही, नाही ट्रेन म बहुत गर्दी है। सीट मिलतै नाई बा... पता किहे रहे। आइब बसवे से, भले किराया ज्यादे लागी, और घर के हालचाल ठीक बा। हां सब बढि़या बा...। जैसे भी आयो संभालकै आयो... बसों में बहुत भीड़ बा...।
यह बातचीत रुधौली से दिल्ली कमाने गए प्रवीण की उनकी माता जी से हो रही है।
हां काहौ दिवाकर...। ठीक बाटा...। हां भैया सब बढि़ए हैं। आपन बतावा... एहरो ठीक है। बाबू जी के तबियतवां कैइसन है...। ल्या... ल्या बतियाई ला बगलिए हईन। ... हेलो, का बाबू.. खुश रहा। और बताओ अरे दिवलिया में कब अइबो...। आइब- आइब बाबू 5- 6 तारीख तक। तैयारी होई रहल बा। काव लावै के बा... हमरे लिए कुछ ना लायौ कुल बाय...। अपने अम्मा के भले कुछ लई आयो...। कौने ट्रेन में टिकट लिहै हया...। बाबू टिकट नाई मिलल बा। उहे एसी बसा से आइब... प्राइवेटवा से। वैसे किराया महंग होईगै बा...। 25 सौ रुपये में खाली बइठे के एक सीट मिली, लेकिन का करी...। अपने यहां के सरकारी बसा पर दिल्ली में रोक लगल बा। यह बातचीत भटोलवा के रहने वाले दिवाकर और उनके भाई तथा पिता के बीच की है।
यह अवधी भोजपुरी मिश्रित बोली जिले के विभिन्न अंचल की है। दिवाली की आहट घर-घर पहुंच चुकी है। परदेस कमाने वाले लोग अब त्योहार मनाने के लिए घर का रुख करने की तैयारी में हैं। यात्रा में तमाम सांसत हैं। दिल्ली में प्रदूषण के भय से बीएस- 4 श्रेणी की बसों के संचालन पर प्रतिबंध लग चुका है, जिससे इस अंचल की दिल्ली तक दौड़ने वाली सरकारी बसें अनफिट हो चुकी हैं। ट्रेनों में नो-रूम पहले से चल रहा है। मध्यम वर्गीय लोग परिवार के साथ दिवाली मनाने के लिए सस्ती दर पर यात्रा नहीं कर सकते हैं। उन्हें घर पहुंचने के लिए प्राइवेट बसों का ही अब सहारा है। वहीं प्राइवेट बस संचालक इसे कमाई का सुनहरा अवसर मान रहे हैं। एक व्यक्ति का दिल्ली से बस्ती तक का किराया 800 से बढ़कर 2500 रुपये अभी से हो गया है।
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अगले सप्ताह यात्रियों की भीड़ बढ़ते ही इसमें और इजाफा होगा। इन बसों में केबिन का किराया 4500 रुपये कर दिया गया है। लोगों में एक तरफ घर आने की खुशी तो दूसरी ओर सीमित आमदनी में महंगा किराया अदा करने का गम भी है। पेश है इस मसले पर पड़ताल करती एक रिपोर्ट-
दिवाली के बाद रोडवेज बसों से दिल्ली जाने वाले यात्रियों की राह कठिन होने वाली है। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने 12 नवंबर से बीएस-4 बसों के दिल्ली एनसीआर में प्रवेश पर रोक लगी है। सिर्फ बीएस-6 बसें ही दिल्ली एनसीआर में प्रवेश कर पाएंगी। अभी रोडवेज के पास इस श्रेणी में मात्र 10 बसें ही बस्ती में हैं।
एनसीआर में रहने वाले जनपद के लोग बड़ी संख्या में दिवाली और छठ पूजा मनाने के लिए घर आते हैं। दिल्ली से बस्ती आने वाली वैशाली, गोरखधाम, बिहार संपर्क क्रांति, हमसफर एक्सप्रेस आदि प्रमुख ट्रेनों में नवंबर तक वेटिंग है। ट्रेनों में सीटें फुल होने के बाद रोडवेज की बसें ही उनका सहारा होती हैं, लेकिन दिल्ली सरकार ने दिवाली के बाद दिल्ली को प्रदूषण से बचाने के लिए बीएस-4 बसों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगा दी है। ये रोक 12 से 20 नवंबर तक रहेगी। ऐसे में यात्रियों को दिल्ली पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
रोडवेज प्रबंधन के अनुसार, हर दिन जिले से पांच बसें दिल्ली जाती हैं। इनमें तीन बीएस-4 हैं। वर्तमान में रोडवेज के पास 10 बीएस-6 श्रेणी की बसे हैं। रोडवेज प्रबंधन के अनुसार, एक नवंबर से बीएस-6 श्रेणी की ही बसें दिल्ली भेजी जाएंगी। दिवाली पर यात्रियों की संख्या को देखते हुए बीएस-6 बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
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हवा में पांच गुना कम सल्फर घोलती हैं बीएस-6 श्रेणी की बसें
बीएस-6 श्रेणी की बसों से निकलने वाले धुएं में सल्फर की मात्रा 10 पीपीएम (कण प्रति 10 लाख) होती है, जबकि बीएस- 4 धुएं में सल्फर की मात्रा 50 पीपीएम है। इसके अलावा बीएस- 6 डीजल वाहनों में नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा 70 प्रतिशत तक कम हो जाएगी। पेट्रोल वाहनों में 25 प्रतिशत की कमी आएगी।
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दिवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर में सिर्फ बीएस-6 श्रेणी की बसें ही जा सकेंगी। डिपो में 10 बसें बीएस-6 श्रेणी की हैं। एक नवंबर से बीएस-6 बसों को ही दिल्ली भेजा जाएगा। यात्रियों की किसी प्रकार की दिक्कत न हो इसके लिए अतिरिक्त बसें भी चलाई जाएंगी।
-आयुष भटनागर, एआरएम, रोडवेज डिपो।
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प्रमुख ट्रेनों में वेटिंग टिकट
जिले से दिल्ली के लिए करीब आधा दर्जन ट्रेनें जाती हैं। इन ट्रेनों में नवंबर भर वेटिंग आ रही है। रेलवे अधिकारियों की मानें तो यह वेटिंग अभी और भी बढ़ेगी। मुख्य आरक्षण अधिकारी एके पाठक ने बताया कि गोरखधाम, वैशाली, कुशीनगर, लोकमान्य तिलक, जम्मूतवी, छपरा मथुरा एक्सप्रेस में अभी सौ से नीचे वेटिंग चल रही है।
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- ट्रेनों में सीटें हैं फुल, बसें भी एनसीआर की सीमा से आगे नहीं बढ़ सकेंगी
संवाद न्यूज एजेंसी
... हेलो, हां अम्मा नमस्ते...। खुश रहा बाबू, का हाल बा...। सब ठीक बा। ... कब अइबो। पहली के तनख्वाह मिली फिर निकलब। कैसे अइबो... ट्रेन से। ... नाही, नाही ट्रेन म बहुत गर्दी है। सीट मिलतै नाई बा... पता किहे रहे। आइब बसवे से, भले किराया ज्यादे लागी, और घर के हालचाल ठीक बा। हां सब बढि़या बा...। जैसे भी आयो संभालकै आयो... बसों में बहुत भीड़ बा...।
यह बातचीत रुधौली से दिल्ली कमाने गए प्रवीण की उनकी माता जी से हो रही है।
हां काहौ दिवाकर...। ठीक बाटा...। हां भैया सब बढि़ए हैं। आपन बतावा... एहरो ठीक है। बाबू जी के तबियतवां कैइसन है...। ल्या... ल्या बतियाई ला बगलिए हईन। ... हेलो, का बाबू.. खुश रहा। और बताओ अरे दिवलिया में कब अइबो...। आइब- आइब बाबू 5- 6 तारीख तक। तैयारी होई रहल बा। काव लावै के बा... हमरे लिए कुछ ना लायौ कुल बाय...। अपने अम्मा के भले कुछ लई आयो...। कौने ट्रेन में टिकट लिहै हया...। बाबू टिकट नाई मिलल बा। उहे एसी बसा से आइब... प्राइवेटवा से। वैसे किराया महंग होईगै बा...। 25 सौ रुपये में खाली बइठे के एक सीट मिली, लेकिन का करी...। अपने यहां के सरकारी बसा पर दिल्ली में रोक लगल बा। यह बातचीत भटोलवा के रहने वाले दिवाकर और उनके भाई तथा पिता के बीच की है।
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यह अवधी भोजपुरी मिश्रित बोली जिले के विभिन्न अंचल की है। दिवाली की आहट घर-घर पहुंच चुकी है। परदेस कमाने वाले लोग अब त्योहार मनाने के लिए घर का रुख करने की तैयारी में हैं। यात्रा में तमाम सांसत हैं। दिल्ली में प्रदूषण के भय से बीएस- 4 श्रेणी की बसों के संचालन पर प्रतिबंध लग चुका है, जिससे इस अंचल की दिल्ली तक दौड़ने वाली सरकारी बसें अनफिट हो चुकी हैं। ट्रेनों में नो-रूम पहले से चल रहा है। मध्यम वर्गीय लोग परिवार के साथ दिवाली मनाने के लिए सस्ती दर पर यात्रा नहीं कर सकते हैं। उन्हें घर पहुंचने के लिए प्राइवेट बसों का ही अब सहारा है। वहीं प्राइवेट बस संचालक इसे कमाई का सुनहरा अवसर मान रहे हैं। एक व्यक्ति का दिल्ली से बस्ती तक का किराया 800 से बढ़कर 2500 रुपये अभी से हो गया है।
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अगले सप्ताह यात्रियों की भीड़ बढ़ते ही इसमें और इजाफा होगा। इन बसों में केबिन का किराया 4500 रुपये कर दिया गया है। लोगों में एक तरफ घर आने की खुशी तो दूसरी ओर सीमित आमदनी में महंगा किराया अदा करने का गम भी है। पेश है इस मसले पर पड़ताल करती एक रिपोर्ट-
दिवाली के बाद रोडवेज बसों से दिल्ली जाने वाले यात्रियों की राह कठिन होने वाली है। बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने 12 नवंबर से बीएस-4 बसों के दिल्ली एनसीआर में प्रवेश पर रोक लगी है। सिर्फ बीएस-6 बसें ही दिल्ली एनसीआर में प्रवेश कर पाएंगी। अभी रोडवेज के पास इस श्रेणी में मात्र 10 बसें ही बस्ती में हैं।
एनसीआर में रहने वाले जनपद के लोग बड़ी संख्या में दिवाली और छठ पूजा मनाने के लिए घर आते हैं। दिल्ली से बस्ती आने वाली वैशाली, गोरखधाम, बिहार संपर्क क्रांति, हमसफर एक्सप्रेस आदि प्रमुख ट्रेनों में नवंबर तक वेटिंग है। ट्रेनों में सीटें फुल होने के बाद रोडवेज की बसें ही उनका सहारा होती हैं, लेकिन दिल्ली सरकार ने दिवाली के बाद दिल्ली को प्रदूषण से बचाने के लिए बीएस-4 बसों के दिल्ली में प्रवेश पर रोक लगा दी है। ये रोक 12 से 20 नवंबर तक रहेगी। ऐसे में यात्रियों को दिल्ली पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
रोडवेज प्रबंधन के अनुसार, हर दिन जिले से पांच बसें दिल्ली जाती हैं। इनमें तीन बीएस-4 हैं। वर्तमान में रोडवेज के पास 10 बीएस-6 श्रेणी की बसे हैं। रोडवेज प्रबंधन के अनुसार, एक नवंबर से बीएस-6 श्रेणी की ही बसें दिल्ली भेजी जाएंगी। दिवाली पर यात्रियों की संख्या को देखते हुए बीएस-6 बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी।
हवा में पांच गुना कम सल्फर घोलती हैं बीएस-6 श्रेणी की बसें
बीएस-6 श्रेणी की बसों से निकलने वाले धुएं में सल्फर की मात्रा 10 पीपीएम (कण प्रति 10 लाख) होती है, जबकि बीएस- 4 धुएं में सल्फर की मात्रा 50 पीपीएम है। इसके अलावा बीएस- 6 डीजल वाहनों में नाइट्रोजन ऑक्साइड की मात्रा 70 प्रतिशत तक कम हो जाएगी। पेट्रोल वाहनों में 25 प्रतिशत की कमी आएगी।
दिवाली के बाद दिल्ली-एनसीआर में सिर्फ बीएस-6 श्रेणी की बसें ही जा सकेंगी। डिपो में 10 बसें बीएस-6 श्रेणी की हैं। एक नवंबर से बीएस-6 बसों को ही दिल्ली भेजा जाएगा। यात्रियों की किसी प्रकार की दिक्कत न हो इसके लिए अतिरिक्त बसें भी चलाई जाएंगी।
-आयुष भटनागर, एआरएम, रोडवेज डिपो।
प्रमुख ट्रेनों में वेटिंग टिकट
जिले से दिल्ली के लिए करीब आधा दर्जन ट्रेनें जाती हैं। इन ट्रेनों में नवंबर भर वेटिंग आ रही है। रेलवे अधिकारियों की मानें तो यह वेटिंग अभी और भी बढ़ेगी। मुख्य आरक्षण अधिकारी एके पाठक ने बताया कि गोरखधाम, वैशाली, कुशीनगर, लोकमान्य तिलक, जम्मूतवी, छपरा मथुरा एक्सप्रेस में अभी सौ से नीचे वेटिंग चल रही है।