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गलती यूनिवर्सिटी की और भुगत रहे छात्र

Fri, 29 Nov 2013 05:41 AM IST
Basti
Basti Updated Fri, 29 Nov 2013 05:41 AM IST
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बस्ती। जिले के कई महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं का रिजल्ट अपूर्ण होने के कारण छात्रों में नाराजगी है। तमाम ऐसे छात्र-छात्रा हैं जिनका रिजल्ट सत्यापन के अभाव में रोका गया है।
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जिले के दो सबसे बड़े पीजी कालेज में बड़ी संख्या में छात्रा छात्राओं का रिजल्ट अधर में है। एपीएन पीजी कालेज में बीए प्रथम और द्वितीय वर्ष के 130 छात्र छात्राओं का रिजल्ट अपूर्ण है। जबकि बीए तृतीय वर्ष के तकरीबन 70 विद्यार्थियों का रिजल्ट सत्यापन के अभाव में रोका गया है। इसी क्लास के छह बच्चों का रिजल्ट अपूर्ण बताया गया है।
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इसी प्रकार शिवहर्ष किसान पीजी कालेज में बीएससी प्रथम वर्ष के 46 परीक्षार्थियों का रिजल्ट अपूर्ण है जबकि 22 का रिजल्ट सत्यापन के अभाव में गोरखपुर यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से रोका गया है। एमए प्रथम वर्ष हिंदी के छह छात्रों के परिणाम अपूर्ण हैं जबकि दो का सत्यापन के अभाव में रिजल्ट रोका गया है। एमए प्रथम वर्ष भूगोल के छात्र-छात्राओं की समस्या तो और भी गंभीर है। पहले घोषित रिजल्ट में 36 फेल तो चार पास हुए थे। बाद में पुनर्मूल्यांकन के बाद रिजल्ट इसका ठीक उल्टा हो गया। 36 पास और चार फेल हो गए। इसी बीच कुलपति अपने पुनर्मूल्यांकन वाले निर्णय को पलटते हुए पुराने रिजल्ट को मानने की बात कह रहे हैं। ऐसे में एक बार फिर इन छात्र-छात्राओं के भविष्य पर सवाल खड़ा होने लगा है। गलती यूनिवर्सिटी प्रशासन की है और भुगत रहे हैं छात्र।
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प्राचार्य ने परीक्षा नियंत्रक को लिखा पत्र
एपीएन पीजी कालेज के प्राचार्य डा.वीपी सिंह ने विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक को पत्र लिखा है। इसमें कालेज के बीए प्रथम और द्वितीय वर्ष के 130 अपूर्ण रिजल्ट को अविलंब घोषित करने का अनुरोध किया गया है। पत्र में छात्रों के आंदोलन का हवाला देते हुए इस मामले में त्वरित निर्णय लेने को कहा गया है। वहीं छात्र संघ महामंत्री आदित्य त्रिपाठी ने कहा कि केवल अपूर्ण ही नहीं सत्यापन के अभाव में रोके गए रिजल्ट को भी तत्काल घोषित किया जाए, जिससे छात्र-छात्राएं अगले कक्षा में प्रवेश ले सकें।
विद्यार्थियों के भविष्य से खेल रहे वीसी : आलोक
शिवहर्ष किसान पीजी कालेज के छात्र संघ अध्यक्ष आलोक कुमार पांडेय ने बताया कि गोरखपुर यूनिवर्सिटी के कुलपति छात्र-छात्राओं के भविष्य से खेल रहे हैं। बड़े पैमाने पर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गड़बड़ी की शिकायत पर पहले तो पुनर्मूल्यांकन का निर्देश दिए बाद में जर्मनी से आने के बाद अपनी बात से पलट गए और कहा कि 1987 के बाद से पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया बंद कर दी गई है। आलोक ने बताया कि उनके कालेज के एमए प्रथम वर्ष भूगोल के 36 छात्र-छात्राएं पुनर्मूल्यांकन के बाद उत्तीर्ण हुए, उनकी मार्कशीट भी कालेज को मिल चुके हैं। मगर कुलपति ने सभी प्राचार्यों को पत्र भेजकर कहा है कि पुनर्मूल्यांकन के बाद जो मार्कशीट भेजी गई है वह मान्य नहीं है। कथनी और करनी में अंतर रखने वाले ऐसे व्यक्ति को कुलपति रहने का अधिकार नहीं है। वहीं कालेज के प्राचार्य डा. अजीत प्रताप ने कहा कि मार्कशीट प्राप्त हो गई है। रही बात वीसी के पत्र की तो ऐसा कोई पत्र नहीं मिला है, हां, पेपर में यह बात पढ़ी है।
छात्र नेताओं ने निकाली भड़ास
बस्ती। शिवहर्ष किसान पीजी कालेज के छात्रसंघ अध्यक्ष आलोक पांडेय और एपीएन पीजी कालेज के छात्रसंघ महामंत्री आदित्य त्रिपाठी की अगुवाई में छात्रों का धरना गुरुवार को भी जारी रहा। छात्रनेताओं का कहना है कि जब तक विश्वविद्यालय प्रशासन उनकी मांगे मान नहीं लेता तब तक वे अपना धरना समाप्त नहीं करेंगे।
मंगलवार को एपीएनपीजी कालेज के गेट पर शुरू हुआ छात्रों का धरना गुरुवार को भी जारी रहा। एपीएन छात्रसंघ महामंत्री आदित्य त्रिपाठी ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है। छात्रों के उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में जिस तरह गड़बड़ी की गई वह किसी से छिपा नहीं है। पुनर्मूल्यांकन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की कलई खुल गई।
शिवहर्ष किसान पीजी कालेज के छात्रसंघ अध्यक्ष आलोक कुमार पांडेय और उपाध्यक्ष अभिषेक उपाध्याय ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से बरती गई अनियमितता से छात्र परेशान हैं। जिले के कई महाविद्यालयों पर सामूहिक नकल का आरोप लगा कर परीक्षा फल बाधित कर दिया गया है। अपूर्ण और सत्यापन की बात कहकर छात्रों के परीक्षाफल में विलंब किया जा रहा है। जब तक छात्र छात्राओं के साथ एकरूपता का व्यवहार नहीं किया जाता, सभी छात्रों का परीक्षाफल घोषित नहीं किया जाता, तब तक धरना समाप्त करने का सवाल ही नहीं पैदा होता।

इस मौके पर एपीएन छात्रसंघ कोषाध्यक्ष शीतला सिंह, छात्रनेता प्रियांक शुक्ल, ऋषभ त्रिपाठी, आकाश सोनी, अमरमणि चंदन, अमरदीप, सत्येंद्र चौधरी, सूरज चतुर्वेदी, रवि शुक्ल, मधुकर पांडेय, सुुयश मिश्र, विनीत सिंह आदि मौजूद रहे।
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