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Basti News: मेडिकल कॉलेज में आए थे 93 वेंटिलेटर... उपयोग में एक भी नहीं
Fri, 19 Jul 2024 12:11 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
Updated Fri, 19 Jul 2024 12:11 AM IST
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बस्ती। गंभीर रोगियों के फेफड़े तक ऑक्सीजन पहुंचाने वाले वेंटिलेटर मेडिकल कॉलेज के ओपेक चिकित्सालय कैली में दम तोड़ रहे हैं। दो साल से इन मशीनोें का उपयोग ही नहीं हो पा रहा है। टेक्ननीशियन न होने की दशा में बड़ी संख्या में मशीनें स्टोर रूम में धूल फांक रही है। देखरेख के अभाव करोड़ों लागत की इन मशीनों में यांत्रिक खराबी आने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। इनकी उपयोगिता न होने से सीरियस मरीजों को रेफर करना पड़ रहा है।
कोरोना काल (दिसंबर 2020) में पीएम केवर फंड से यहां 93 नए वेंटिलेटर आवंटित हुए थे। कोरोना आपदा के समय मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एनएचएम के संविदा टेक्नीशियनों की मदद से कुछ वेंटिलेटर उपयोग में लाए। लेकिन, कुछ दिनों के बाद इन मशीनों कोे स्टोर में रखवा दिया गया। जबकि इनकी औसत उम्र चार से पांच साल की होती है।
ऐसे में बिना उपयोग में आए ही यह मशीने बड़ी संख्या में खराब भी हो रही है। रखरखाव एवं टेक्नीशियन के अभाव में तीन साल से यह वेंटिलेटर बेमतलब साबित हो रहे हैं। अस्पताल प्रशासन टेक्नीशियन न होने की दशा में इनके संचालन से हाथ खड़े कर दिया है। आपूर्तिकर्ता कंपनी के तरफ से इन वेेंटिलेटरों की जांच भी नहीं की गई है।
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इससे यह पता लगाना भी कठिन है कि कितने वेंटिलेटर उपयोग के लिए फिट हैं। जिले के सबसे बड़े अस्पताल के लिहाज से यहां वेंटिलेटर का होना बेहद अनिवार्य है। मगर, मेडिकल कॉलेज की स्थापना के पांच वर्ष बाद भी यह सुविधा बहाल नहीं हो पाई।
कोरोना काल में कुछ वेंटिलेटर उपयोग में आते देखे गए थे। इसके बाद से स्टोर रूम में सभी डंप कर दिए गए। जबकि एक वेंटिलेटर की कीमत करीब चार लाख रुपये है। आपूर्ति करने वाली कंपनी की गारंटी केवल एक साल की होती है। गारंटी अवधि बीतने के बाद अब संबंधित कंपनी की जवाबदेही भी नहीं रह गई।
प्रतिदिन रेफर हो रहे गंभीर मरीज
मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन 500 से अधिक मरीजों का आवक है। इसमें हार्ट अटैक, मार्ग दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल अचेता अवस्था में आने वाले मरीजों को तत्काल वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ती है। इसके जरिये उनके फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाया जाता है। ताकि मरीज काे बीमारी से लड़ने में मदद मिलें। मगर वेंटिलेटर की सुविधा न होने से गंभीर मरीजों को तत्काल रेफर कर दिया जा रहा है। जबकि उपलब्धता के हिसाब से यहां 93 मरीजों को वेंटिलेटर की सुविधा एक साथ मिल सकती है।
एक वेंटिलेटर के संचालन में तीन टेक्नीशियन की जरूरत
एक वेंटिलेटर के संचालन में 24 घंटे के दौरान तीन टेक्नीशियन की जरूरत पड़ती है। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में एक भी टेक्नीशियन नहीं है। इससे इन मशीनों का संचालन नहीं हो पा रहा है। जबकि वेंटिलेटर जीवन रक्षक प्रणाली का हिस्सा है। इसकी जरूरत ज्यादातर मेडिसिन, सर्जरी, आर्थों सर्जरी, न्यूरो, कार्डियोेलॉजी विभाग को पड़ती है। किसी भी विभाग के पास गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर वार्ड नहीं है।
कोरोना काल में 93 वेंटिलेटर आवंटित हुए थे। शुरुआत में एनएचएम के संविदा टेक्नीशियनों से यह संचालित कराया गया था। बाद में वह हट गए। इससे सभी वेंटिलेटर स्टोर में सुरक्षित करा दिया गया है। टेक्नीशियनों की मांग शासन से की गई है।
-डॉ. एएन प्रसाद, सीएमएस, ओपेक चिकित्सालय कैली
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कोरोना काल (दिसंबर 2020) में पीएम केवर फंड से यहां 93 नए वेंटिलेटर आवंटित हुए थे। कोरोना आपदा के समय मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने एनएचएम के संविदा टेक्नीशियनों की मदद से कुछ वेंटिलेटर उपयोग में लाए। लेकिन, कुछ दिनों के बाद इन मशीनों कोे स्टोर में रखवा दिया गया। जबकि इनकी औसत उम्र चार से पांच साल की होती है।
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ऐसे में बिना उपयोग में आए ही यह मशीने बड़ी संख्या में खराब भी हो रही है। रखरखाव एवं टेक्नीशियन के अभाव में तीन साल से यह वेंटिलेटर बेमतलब साबित हो रहे हैं। अस्पताल प्रशासन टेक्नीशियन न होने की दशा में इनके संचालन से हाथ खड़े कर दिया है। आपूर्तिकर्ता कंपनी के तरफ से इन वेेंटिलेटरों की जांच भी नहीं की गई है।
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इससे यह पता लगाना भी कठिन है कि कितने वेंटिलेटर उपयोग के लिए फिट हैं। जिले के सबसे बड़े अस्पताल के लिहाज से यहां वेंटिलेटर का होना बेहद अनिवार्य है। मगर, मेडिकल कॉलेज की स्थापना के पांच वर्ष बाद भी यह सुविधा बहाल नहीं हो पाई।
कोरोना काल में कुछ वेंटिलेटर उपयोग में आते देखे गए थे। इसके बाद से स्टोर रूम में सभी डंप कर दिए गए। जबकि एक वेंटिलेटर की कीमत करीब चार लाख रुपये है। आपूर्ति करने वाली कंपनी की गारंटी केवल एक साल की होती है। गारंटी अवधि बीतने के बाद अब संबंधित कंपनी की जवाबदेही भी नहीं रह गई।
प्रतिदिन रेफर हो रहे गंभीर मरीज
मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन 500 से अधिक मरीजों का आवक है। इसमें हार्ट अटैक, मार्ग दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल अचेता अवस्था में आने वाले मरीजों को तत्काल वेंटिलेटर की आवश्यकता पड़ती है। इसके जरिये उनके फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाया जाता है। ताकि मरीज काे बीमारी से लड़ने में मदद मिलें। मगर वेंटिलेटर की सुविधा न होने से गंभीर मरीजों को तत्काल रेफर कर दिया जा रहा है। जबकि उपलब्धता के हिसाब से यहां 93 मरीजों को वेंटिलेटर की सुविधा एक साथ मिल सकती है।
एक वेंटिलेटर के संचालन में तीन टेक्नीशियन की जरूरत
एक वेंटिलेटर के संचालन में 24 घंटे के दौरान तीन टेक्नीशियन की जरूरत पड़ती है। वर्तमान में मेडिकल कॉलेज में एक भी टेक्नीशियन नहीं है। इससे इन मशीनों का संचालन नहीं हो पा रहा है। जबकि वेंटिलेटर जीवन रक्षक प्रणाली का हिस्सा है। इसकी जरूरत ज्यादातर मेडिसिन, सर्जरी, आर्थों सर्जरी, न्यूरो, कार्डियोेलॉजी विभाग को पड़ती है। किसी भी विभाग के पास गंभीर मरीजों के लिए वेंटिलेटर वार्ड नहीं है।
कोरोना काल में 93 वेंटिलेटर आवंटित हुए थे। शुरुआत में एनएचएम के संविदा टेक्नीशियनों से यह संचालित कराया गया था। बाद में वह हट गए। इससे सभी वेंटिलेटर स्टोर में सुरक्षित करा दिया गया है। टेक्नीशियनों की मांग शासन से की गई है।
-डॉ. एएन प्रसाद, सीएमएस, ओपेक चिकित्सालय कैली