UPPCS-J Result: पिता बोले- हम डायस के इस पार थे...बिटिया अब उस पार, वकील की बेटी प्रियंका दिवाकर बनीं जज
प्रियंका बताती हैं कि उन्होंने 2021 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद लॉकडाउन के बाद से ही तैयारियों में लग गई थीं।
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उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा सिविल जज (जूनियर डिवीजन) परीक्षा में लखीमपुर खीरी के मोहम्मदी निवासी अधिवक्ता वीरसेन दिवाकर की पुत्री प्रियंका दिवाकर ने सफलता प्राप्त की है। उन्होंने पीसीएस जे परीक्षा पास कर नगर और जिले का नाम रोशन किया है। प्रियंका ने पहले ही प्रयास में सफलता हासिल की है। उन्होंने बताया कि लखनऊ में रहकर पढ़ाई के दौरान उन्होंने पूरी तरीके से सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी।
मोहम्मदी के रामलीला मैदान निवासी प्रियंका दिवाकर के पिता वीरसेन दिवाकर सिविल कोर्ट में वकालत करते हैं। जबकि उनके बड़ा भाई अमित कुमार भी एलएलएम कर रहे हैं। प्रियंका बताती हैं कि उन्होंने 2021 में एलएलबी की पढ़ाई पूरी की थी। इसके बाद लॉकडाउन के बाद से ही तैयारियों में लग गई थीं।
प्रियंका ने बताया कि यह उनका पहला ही प्रयास है, हालांकि इसके लिये उन्होंने लखनऊ में रहते हुए कोचिंग का सहारा लिया था। कोचिंग के गाइडेंस व बड़े भाई के टिप्स से वह पढ़ाई में अव्वल होती गईं और आखिरकार पीसीएस जे में सफलता हासिल की।
प्रियंका ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता, बड़े भाई व कोचिंग के लॉ पढ़ाने वाले अमित सर को दिया है। उधर, आने वाली पीढ़ी को सफलता के टिप्स देते हुए प्रियंका ने बताया कि लगातार पढ़ाई करते रहना बहुत जरुरी है। यह नहीं है कि कभी छोड़ दिया कभी पढ़ लिया। यह रवैया ठीक नहीं है। साथ ही उन्होंने नई पीढ़ी से सोशल मीडिया के प्रपंच से भी दूर रहने की सलाह दी है।
पिता बोले, हम डायस के इस पार थे, बिटिया अब उस पार
पिता वीरसेन दिवाकर ने बताया कि उनके और परिवार के लिए यह बड़े गौरव की बात है कि अब परिवार की बिटिया डायस के उस पार न्यायाधीश की कुर्सी पर विराजमान होगी। वीरसेन दिवाकर के चार बच्चे हैं। एक लड़की की शादी हो गई है। दो बच्चे लोकसेवा आयोग परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रियंका ने नर्सरी से कक्षा 12 तक की शिक्षा नगर के श्रीकृष्णा इंटर कालेज मोहम्मदी से प्राप्त की है। हाईस्कूल में 86 फीसदी और इंटरमीडिएट में 80 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। इसके बाद लखनऊ जाकर एलएलबी में एडमिशन लिया और 2021 में एलएलबी की पढाई पूरी की। पीसीएस जे में 267वीं रैंक हासिल कर उन्होंने न्यायिक सेवा में प्रवेश किया है।