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एक घपले पर सवाल क्या उठाया घेर लिए गए वित्त अधिकारी
बरेली
Updated Fri, 26 Dec 2014 01:40 AM IST
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रुहेलखंड विश्वविद्यालय में वित्तीय अनियमितताएं और घपले के प्रकरण सामने आते रहे हैं। ताजा प्रकरण परीक्षा से जुड़े करीब 51 लाख रुपये के गोपनीय मुद्रण का है। वित्त अधिकारी ने इसके भुगतान का चेक जारी करने से पहले वाउचर और खर्च का ब्योरा तलब क्या किया खुद मुसीबत में घिर गए। नियमों की अनदेखी कर मनमाने ढंग से चेक जारी कराने के लिए कोई प्रभावशाली व्यक्ति वित्त अधिकारी की जान का दुश्मन बन गया है। पुलिस सुरक्षा मांगने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए और दो माह पहले जिनका अनुबंध पूरा हो चुका है उन सुरक्षा कर्मियों की सेवा लेने को कहा गया।
बुधवार को प्रकरण संज्ञान में आने पर डीएम पहले तो थोड़ा क्षुब्ध हुए, इसलिए कि मामला देर से उनके सामने लाया गया। फिर उन्होंने एडीएम सिटी को कार्रवाई के लिए कहा, जिन्होंने एसपी सिटी को सुरक्षा मुहैया कराने की जिम्मेदारी सौंपी। इस बीच शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार को पूरे तथ्यों के साथ वित्त अधिकारी को लखनऊ बुलाया है। सूत्रों ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में रजिस्ट्रार पर उंगली उठने लगी हैं। यह वही रजिस्ट्रार हैं जो पहले बरेली में एडीएम वित्त एवं राजस्व रह चुके हैं। वर्ष 2013 में नया सर्किल रेट लागू होने से ऐन पहले लाखों रुपये की स्टांप बिक्री से राजस्व को हुए घाटे के आरोप में तत्कालीन डीएम ने उन्हें मासिक स्टाफ बैठक से डांटकर निकाल दिया था और प्रकरण से शासन को भी अवगत कराया था। बाद में उनका तबादला हो गया था।
विश्वविद्यालय के गोपनीय मुद्रण वाले मामले में इन्होंने सिर्फ एक पत्र देकर चेक निर्गत करने को कहा था। वित्त अधिकारी ने गोपनीयता का हवाला देते हुए मुद्रण फर्म का नाम गोपनीय रखते हुए मुद्रित सामग्री का ब्योरा, मुद्रण दर निर्धारण की प्रक्रिया, निर्धारित करने वाले अधिकारी का नाम, प्रक्रिया संबंधी हुए टेंडर आदि का ब्योरा तलब किया जो कि प्रस्तुत नहीं हुआ। शनिवार को लखनऊ रवाना होने से पहले वित्त अधिकारी भानु प्रकाश ने बताया कि गत आठ सितंबर को उन्होंने ज्वाइन किया और नौ सितंबर से कार्यरत हैं। अब तक नियमों की अनदेखी कर एक भी भुगतान नहीं किया है। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि उन्हें पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए ताकि परिसर में वह निर्भीकता से आकर दैनिक कामकाज कर सकें।
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बुधवार को प्रकरण संज्ञान में आने पर डीएम पहले तो थोड़ा क्षुब्ध हुए, इसलिए कि मामला देर से उनके सामने लाया गया। फिर उन्होंने एडीएम सिटी को कार्रवाई के लिए कहा, जिन्होंने एसपी सिटी को सुरक्षा मुहैया कराने की जिम्मेदारी सौंपी। इस बीच शासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शुक्रवार को पूरे तथ्यों के साथ वित्त अधिकारी को लखनऊ बुलाया है। सूत्रों ने बताया कि इस पूरे प्रकरण में रजिस्ट्रार पर उंगली उठने लगी हैं। यह वही रजिस्ट्रार हैं जो पहले बरेली में एडीएम वित्त एवं राजस्व रह चुके हैं। वर्ष 2013 में नया सर्किल रेट लागू होने से ऐन पहले लाखों रुपये की स्टांप बिक्री से राजस्व को हुए घाटे के आरोप में तत्कालीन डीएम ने उन्हें मासिक स्टाफ बैठक से डांटकर निकाल दिया था और प्रकरण से शासन को भी अवगत कराया था। बाद में उनका तबादला हो गया था।
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विश्वविद्यालय के गोपनीय मुद्रण वाले मामले में इन्होंने सिर्फ एक पत्र देकर चेक निर्गत करने को कहा था। वित्त अधिकारी ने गोपनीयता का हवाला देते हुए मुद्रण फर्म का नाम गोपनीय रखते हुए मुद्रित सामग्री का ब्योरा, मुद्रण दर निर्धारण की प्रक्रिया, निर्धारित करने वाले अधिकारी का नाम, प्रक्रिया संबंधी हुए टेंडर आदि का ब्योरा तलब किया जो कि प्रस्तुत नहीं हुआ। शनिवार को लखनऊ रवाना होने से पहले वित्त अधिकारी भानु प्रकाश ने बताया कि गत आठ सितंबर को उन्होंने ज्वाइन किया और नौ सितंबर से कार्यरत हैं। अब तक नियमों की अनदेखी कर एक भी भुगतान नहीं किया है। उनकी मांग सिर्फ इतनी है कि उन्हें पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई जाए ताकि परिसर में वह निर्भीकता से आकर दैनिक कामकाज कर सकें।
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