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Bareilly News: फर्जी आईएएस विप्रा पर तीन और रिपोर्ट, ममेरी बहन भी नामजद

Fri, 21 Aug 2026 01:04 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 21 Aug 2026 01:04 AM IST
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Three more reports against fake IAS officer Vipra; maternal cousin also named.
बरेली। फर्जी आईएएस विप्रा के खिलाफ बारादरी थाने में तीन नई रिपोर्ट दर्ज की गई हैं। एक मामले में विप्रा की ममेरी बहन को भी नामजद कराया गया है। विप्रा के ड्राइवर विनोद ने भी रिपोर्ट दर्ज कराई है। हालांकि, पहले विप्रा के साथ विनोद भी ठगी के मामले में नामजद हुआ था।
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विशारतगंज के मंजूर अहमद ने रिपोर्ट में जिक्र किया है कि वह कोतवाली इलाके में एक होटल पर चाय पी रहे थे, तभी एडीएम एफआर लिखी कार होटल पर आकर रुकी और उसमें से एक महिला व उसके सुरक्षाकर्मी निकले। महिला ने पूछा आप क्या करते हैं? मंजूर अहमद ने कहा कि सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा हूं। महिला ने बताया कि वह आईएएस डॉ. विप्रा शर्मा है, वह सरकारी नौकरी लगवा देगी। मंजूर को अपने साथ ग्रीन पार्क स्थित घर ले गई। वहां पंद्रह लाख में नौकरी लगवाने का झांसा दिया। मंजूर ने 10,50,000 रुपये विप्रा के खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसके बाद नियुक्ति पत्र भेजे गए। विप्रा ने 4,50,000 रुपये नकद ले लिए। बाद में अखबारों के माध्यम से पता चला विप्रा शातिर ठग है और दिए गए नियुक्ति पत्र फर्जी हैं।
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संभल के युवक से भी ठगी
संभल जिले के हयातपुर थाना क्षेत्र निवासी मयंक शर्मा ने रिपोर्ट में जिक्र किया कि वह गुरुकुल में प्राचार्य थे। विप्रा ने अपने एसडीएम बनने की बात कहकर मिठाई बांटी। विप्रा के पवन विहार स्थित मकान में पूजा-पाठ होनी थी तो मयंक उनके घर गए थे। पूजा के बाद विप्रा और उसकी ममेरी बहन दीक्षा पाठक ने सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा दिया। मयंक ने अपने भाई शिवओम और राघव की नौकरी लगवाने के लिए कहा। विप्रा ने मोबाइल फोन निकालकर चार-पांच कॉल की और पुलिस विभाग में नौकरी लगवाने की बात कही। इसके बदले 20 लाख रुपये मांगे। साढे़ छह लाख रुपये विप्रा और दीक्षा ने ले लिए। शिवओम की पुलिस में नौकरी नहीं लगी। विप्रा के घर गए तो पता चला कि दोनों बहनें ठगी के मामले में जेल जा चुकी हैं।
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ड्राइवर भी बन गया पीड़ित
जोगी नवादा निवासी विनोद ने बताया कि तीन साल पहले उनका एक परिचित ड्राइवर खुद को एसडीएम का ड्राइवर बताता था। ड्राइवर ने एसडीएम बताकर विप्रा से मिलवाया था। विनोद ने अपनी और पुत्र की नौकरी लगवाने के लिए 12 लाख रुपये विप्रा को दिए थे। विप्रा ने विनोद को अपने यहां ड्राइवर के रूप में नियुक्त कर लिया। तीन माह के बाद हटा दिया और वेतन भी नही दिया।

वर्जन
तीन और मामलों में विप्रा के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई है। सभी मामलों में विवेचना के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। बाकी आरोपियों का पता लगाकर गिरफ्तारी की जाएगी। - मानुष पारीक, एसपी सिटी
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