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Bareilly News: बेंत की घटी लचक, फीकी हुई जरदोजी की चमक

Sun, 07 Apr 2024 02:48 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sun, 07 Apr 2024 02:48 AM IST
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The elasticity of cane has decreased, the shine of filigree has faded.
बरेली। जरी-जरदोजी और बेंत के फर्नीचर के लिए पूरी दुनिया में अलग पहचान बनाने वाली बरेली के स्थानीय मुद्दे इस बार लोकसभा चुनाव के शोर में अभी तक गायब हैं। राजनीतिक दलों के एजेंडे में बरेली में होने वाली सोने की कढ़ाई और बेंत की बुनाई के काम को बढ़ावा देने की प्राथमिकता नजर नहीं आ रही। इससे इस कारोबार से जुड़े उद्यमी मायूस हैं।
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प्रदेश सरकार ने बरेली के जरी-जरदोजी, बेंत के फर्नीचर और सुनारी को वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट में शामिल किया है, लेकिन यहां के उद्यमी इस विश्वविख्यात कला की बदहाली को दूर किए जाने और इसे नया कलेवर दिए जाने की आस लगाए हैं। वे चाहते हैं कि लोकसभा चुनाव में इन कलाओं के उत्थान की गूंज उठे। इससे जब चुनाव पूरा होगा तो वह अपने सांसद से भी उनके वादों का हिसाब-किताब कर पाएंगे।
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उद्यमियों का कहना है कि जीएसटी की उलझन, कच्चे माल की आसमान छूती कीमतों, अंतिम उत्पादों की लगभग स्थिर कीमत, कई निषेध और अंतरराष्ट्रीय उत्पादों से मिल रही चुनौती ने यहां की जरी-जरदोजी और बेंत के फर्नीचर की चमक को कमजोर किया है। पिछले कुछ समय से जरी-जरदोजी के कच्चे माल जैसे रेशम, करदाना मोती, कोरा कसाब, मछली के तार, नक्शी, नग, मोती, ट्यूब, चनाला, जरकन नोरी, पत्तियां, दर्पण, सोने की चेन आदि की कीमतों में वृद्धि हुई है। वहीं तैयार माल की कीमतें जस की तस हैं। ऐसा ही हाल बेंत के फर्नीचर का भी है।
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ये है व्यवसायियों की पीड़ा
हमारी लंबे समय से मांग है कि सरकार की ओर से इस उद्योग को बढ़ावा देने के लिए बजट जारी किया जाए। सरकार की ओर से ऐसा कोई केंद्र खुलना चाहिए, जिसमें कारीगरों के लिए नए-नए डिजाइन उपलब्ध हों। वर्तमान में डिजाइनर के तैयार डिजाइन बहुत महंगे होते हैं, जो आम करीगरों की पहुंच से दूर हैं।
शाकिर अली, जरी-जरदोजी कारोबारी
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बरेली की वर्षों पुरानी परंपरा से जुड़ी जरी-जरदोजी को बढ़ावा देने के लिए सरकार से हमें बहुत उम्मीद है। मगर, इसके लिए स्थानीय स्तर पर ध्यान आकृष्ट कराना होगा। हमें उम्मीद है कि इस चुनाव में लोग हमारी बात समझेंगे और इस क्षेत्र के लिए काम करेंगे।

हिमकत अली, जरी-जरदोजी कारोबारी
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सरकार की कुछ योजनाएं आती हैं, लेकिन उनका लाभ चुनिंदा लोगों को ही मिलता है। अगर स्थानीय स्तर पर पहल हो और सुनारी उद्योग के लिए एक नीति बने तो यह असंगठित उद्योग नए कलेवर में आ सकता है।
राजकुमार अग्रवाल, अध्यक्ष, बरेली सराफ एसोसिएशन
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वर्तमान में 50 हजार रुपये से ऊपर की सोने की खरीद पर आधार कार्ड अनिवार्य किया गया है, जबकि 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 70 हजार रुपये है। इस नियम में बदलाव के लिए हम लंबे समय से मांग कर रहे हैं। ऐसी छोटी-छोटी समस्याओं पर किसी का ध्यान नहीं है।
दिनेश अग्रवाल, महामंत्री, बरेली सराफ एसोसिएशन
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बेंत के फर्नीचर को चीन सहित अन्य देशों से भी प्रतिस्पर्धा मिल रही है। ऐसे में बेंत उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी की भी जरूरत है। इसके लिए हम लंबे समय से सरकार से मांग भी कर रहे हैं।
नत्थू हुसैन, बेंत फर्नीचर कारोबारी
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