फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Bareilly News ›   teen talaq

तीन तलाक पर सरकार के बाद अब उलमा मुहिम को तैयार

Mon, 05 Aug 2019 01:14 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Mon, 05 Aug 2019 01:14 AM IST
विज्ञापन
teen talaq
बरेली। तीन तलाक बिल पास होने से उलमा में काफी बेचैनी है। इसे शरीयत पर हमला करार देते हुए वे जल्द ही जागरूकता की मुहिम शुरू करने की तैयारी में हैं। उलमा का कहना है कि तीन तलाक कानून से औरतों का ही नुकसान होगा इसलिए वे कोशिश करेंगे कि ऐसे मामले में थाने या कचहरी में जाएं ही नहीं। यह भी दावा किया जा रहा है कि 99 प्रतिशत से ज्यादा मुसलमान शरीयत पर अडिग हैं।
विज्ञापन

कई इस्लामी तंजीम समाज के बीच तलाक और दूसरे शरई मामलात पर जागरूक करने का काम करेंगी। तीन तलाक का मुद्दा इस मुहिम में सबसे खास रहेगा। तंजीम उलमा इस्लाम, राष्ट्रीय सुन्नी उलमा कौंसिल सहित कई तंजीमें और उलमा इसके लिए आगे आ रहे हैं। इनमें खासतौर से रजा एकेडमी मुंबई, मुस्लिम जमात कालीकट, गरीब नवाज सोसाइटी रायपुर, अमीने शरीयत एजुकेशनल ट्रस्ट जामनगर आदि तंजीमें हैं जो आपस में भी बातचीत चल रही है। इसमें मौलाना शहाबुद्दीन रजवी, मौलाना इंतजार अहमद कादरी, मुफ्ती अबसार अहमद, मौलाना शहादत खां, डा. महमूद हुसैन, मौलाना ताहिर रजा फरीदी, मौलाना निजामुद्दीन, हाफिज मुजाहिद हुसैन, सूफी इकरार हुसैन, मुफ्ती मुशर्रफ कादरी, हाजी नाजिम बेग, जावेद मुजीब आदि भी इस मुहिम का हिस्सा होंगे।
विज्ञापन

ॎ तीन तलाक पर रोक लगे इसमें कोई हर्ज नहीं है। इसे वैसे भी इस्लाम में अच्छा नहीं माना गया है। मगर इस कानून दुरुपयोग होने का इमकान है। लिहाजा उलमा इस बात से भी फिक्रमंद हैं कि शौहर के सजा के बाद कोई भी समझौते की गुंजाइश नहीं बचेगी। इससे समाज में नई मुश्किलें पैदा होंगी। - मौलाना शहाबुद्दीन रजवी, महासचिव तंजीम उलमा इस्लाम
विज्ञापन
विज्ञापन

ॎ इस्लाम खुद में एक मजबूत मजहब है। इसका कानूने शरीयत कभी न बदलने वाला है। इसमें ही तमाम ऐसे रास्ते हैं जो हर एक मसलों का हल देते हैं। इस्लाम के मानने वाले शरीयत से अलग नहीं जा सकते। उनका अमल इस्लामी शरीयत पर ही है और वह इसी के मुताबिक अपनी जिंदगी बसर करते हैं। - मौलाना इंतजार अहमद कादरी, अध्यक्ष राष्ट्रीय उलमा कौंसिल

ॎ कुछ इस्लाम से नवाकिफ लोग जरूर भटक कर तीन तलाक पर कानून को सही मान रहे हैं जबकि हकीकत में इस कानून से कोई फायदा दिखाई नहीं देता। सबसे बढ़कर जिन औरतों के लिए कानून बना है उन्हें ही इसका फायदा नहीं मिल पाएगा। ऐसा साफ दिखाई दे रहा है। इसलिए कौम में बेदारी जरूरी है। - मौलाना सईद नूरी, रजा एकेडमी
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed