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अचानक नाक बंद होना ब्लैक फंगस का प्रमुख लक्षण
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Black Fungus
- फोटो : अमर उजाला
पोस्ट कोविड मरीजों के कमजोर शरीर पर हमला कर रहा है ब्लैक फंगस
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जांच कराने के बाद फौरन इलाज शुरू करने से पाई जा सकती है निजात
बरेली। ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों के बीच डॉक्टरों ने आगाह किया है कि अगर अचानक नाक बंद हो जाए तो उसे बैक्टीरियल साइनसाइटिस समझने की भूल न करें। खासतौर पर तब जब कोई कोविड-19 से संक्रमित हो या फिर इम्यूनोसप्रेशन का सामना कर रहा हो। ऐसे मामलों में जरूरी है कि फौरन फंगल एटियोलॉजी का पता लगाया जाए। इसके लिए केओएच टेस्ट और माइक्रोस्कोप से न घबराएं और डॉक्टर से परामर्श लेकर तत्काल इलाज शुरू कराएं।
न्यूरोफिजिशियन डॉ. राम सिंह कुशवाहा के मुताबिक ऐसे पोस्ट कोविड मरीज जो डायबिटीज से पीड़ित हैँ, उनमें ब्लैक फंगस के संक्रमण के मामले ज्यादा मिल रहे हैं। अगर समय रहते इस रोग का पता चल जाए तो इसका इलाज मुमकिन है। दरअसल ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस ऐसा फंगल इंफेक्शन है जिसे कोरोना वायरस प्रेरित करता है। जो पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे हैं और जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, उनमें यह संक्रमण तेजी से फैलता है। अनियंत्रित डायबिटीज, स्टेरॉयड की वजह से कमजोर इम्यूनिटी, लंबे समय तक आईसीयू या अस्पताल में भर्ती रहने, पोस्ट ऑर्गन ट्रांसप्लांट, कैंसर या वोरिकोनाजोल थेरेपी (गंभीर फंगल इंफेक्शन का इलाज) के मामले में ब्लैक फंगस के खतरे की आशंका रहती है।
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ये लक्षण हैं ब्लैक फंगस के
ब्लैक फंगस के मरीज की आंखों में लालामी, तेज दर्द, बुखार, सिरदर्द, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, उल्टी में खून, मानसिक स्थिति में बदलाव, दो चीजें दिखना, आंखों का धीरे-धीरे बंद होते जाना प्रमुख लक्षण हैं। यह संक्रमण हवा में फैले रोगाणुओं के संपर्क में आने, त्वचा पर लगी चोट, रगड़ या जले हुए हिस्सों पर वायरस के हमले से फैल सकता है।
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ऐसे बचें इस रोग से
ब्लैक फंगस से बचने के लिए धूल वाली जगहों पर मास्क पहनकर रहें। मिट्टी, काई या खाद जैसी चीजों के नजदीक जाते वक्त जूते, ग्ल्बस, पूरी आस्तीन की शर्ट और पैंट पहनें। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें। डायबिटीज पर कंट्रोल, इम्यूनोमॉड्यूलेटिंग ड्रग या स्टेरॉयड का कम से कम इस्तेमाल करके इससे बचा जा सकता है।
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जांच कराने के बाद फौरन इलाज शुरू करने से पाई जा सकती है निजात बरेली। ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों के बीच डॉक्टरों ने आगाह किया है कि अगर अचानक नाक बंद हो जाए तो उसे बैक्टीरियल साइनसाइटिस समझने की भूल न करें। खासतौर पर तब जब कोई कोविड-19 से संक्रमित हो या फिर इम्यूनोसप्रेशन का सामना कर रहा हो। ऐसे मामलों में जरूरी है कि फौरन फंगल एटियोलॉजी का पता लगाया जाए। इसके लिए केओएच टेस्ट और माइक्रोस्कोप से न घबराएं और डॉक्टर से परामर्श लेकर तत्काल इलाज शुरू कराएं।
न्यूरोफिजिशियन डॉ. राम सिंह कुशवाहा के मुताबिक ऐसे पोस्ट कोविड मरीज जो डायबिटीज से पीड़ित हैँ, उनमें ब्लैक फंगस के संक्रमण के मामले ज्यादा मिल रहे हैं। अगर समय रहते इस रोग का पता चल जाए तो इसका इलाज मुमकिन है। दरअसल ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस ऐसा फंगल इंफेक्शन है जिसे कोरोना वायरस प्रेरित करता है। जो पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे हैं और जिनका इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, उनमें यह संक्रमण तेजी से फैलता है। अनियंत्रित डायबिटीज, स्टेरॉयड की वजह से कमजोर इम्यूनिटी, लंबे समय तक आईसीयू या अस्पताल में भर्ती रहने, पोस्ट ऑर्गन ट्रांसप्लांट, कैंसर या वोरिकोनाजोल थेरेपी (गंभीर फंगल इंफेक्शन का इलाज) के मामले में ब्लैक फंगस के खतरे की आशंका रहती है।
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ये लक्षण हैं ब्लैक फंगस के
ब्लैक फंगस के मरीज की आंखों में लालामी, तेज दर्द, बुखार, सिरदर्द, खांसी, सांस लेने में तकलीफ, उल्टी में खून, मानसिक स्थिति में बदलाव, दो चीजें दिखना, आंखों का धीरे-धीरे बंद होते जाना प्रमुख लक्षण हैं। यह संक्रमण हवा में फैले रोगाणुओं के संपर्क में आने, त्वचा पर लगी चोट, रगड़ या जले हुए हिस्सों पर वायरस के हमले से फैल सकता है।
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