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अजब इंतजाम : न पांच लोग होंगे, न एआरवी लगेगी

Wed, 03 Apr 2024 02:22 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Wed, 03 Apr 2024 02:22 AM IST
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Strange arrangement: Neither five people will be there, nor ARV will be installed.
बरेली। रैबीज से बचाव का एक मात्र विकल्प एआरवी (एंटी रैबीज वैक्सीन) ही है पर कई स्वास्थ्य केंद्रों पर यह लगाई ही नहीं जा रही। दरअसल, वॉयल खुलने के बाद अगर पांच लोगों को एआरवी नहीं लगी तो वह बेकार हो जाती है और संबंधित जिम्मेदार की जबावदेही तय की जाती है। इस वजह से जिम्मेदार एक-दो लोगों के लिए वॉयल खोलने से बचते हैं।
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राष्ट्रीय रैबीज नियंत्रण कार्यक्रम के तहत तीन माह पूर्व जिन नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर कोल्ड चेन यूनिट हैं, उनके चिकित्साधिकारियों व पैरामेडिकल स्टाफ को एआरवी लगाने का प्रशिक्षण मिला था। माहभर गुजरने के बाद भी केंद्रों पर एआरवी नहीं पहुंची। अमर उजाला ने मामले को प्रमुखता से उठाया तो केंद्रों तक एआरवी पहुंच तो गई पर इसे लगाने को लेकर कुत्ते, बंदर, बिल्ली, सियार या अन्य किसी पशु के काटने से घायल पांच लोगों का इंतजार हो रहा है। कार्रवाई की आशंका में केंद्रों पर वैक्सीन की शीशी खुल ही नहीं रही है।
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नजदीकी केंद्र पर एआरवी लगने की दी जाएगी जानकारी
नोडल अधिकारी एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ. मीसम अब्बास के मुताबिक शीशी खुलने के बाद छह घंटे तक डोज प्रभावी होती है। निर्धारित समय में पांच लोगों को वैक्सीन लगाना चुनौती है। नजदीकी कोल्ड चेन यूनिट पर वैक्सीन लगेगी, यह जानकारी स्थानीय निवासियों को देने के लिए प्रचार-प्रसार किया जाएगा।
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इन केंद्रों पर है व्यवस्थासुभाषनगर, सिविल लाइंस, पुराना शहर, बाकरगंज, जगतपुर, बानखाना नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर एआरवी पहुंच गई है पर अभी तक कहीं लगने की सूचना नहीं है। वहीं, तीन सौ बेड अस्पताल स्थित मंडलीय रैबीज नियंत्रण कक्ष में रोज तीन सौ से ज्यादा लोग एआरवी लगवाने पहुंच रहे हैं। केंद्र प्रभारी डॉ. वैभव के मुताबिक हर माह करीब 10 हजार लोगों को वैक्सीन लग रही है। बीते दो माह में 28,606 लोगों को एआरवी लगाई गई है।
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रैबीज से युवक की मौत

- कुत्ते के काटने के बाद नहीं लगी थी एआरवी, बीते माह हुई मौत भी छिपाए रहे जिम्मेदार

बरेली। रैबीज से बचाव के लिए चल रहे तमाम जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद बेपरवाही थम नहीं रही। लिहाजा, साल भर बाद फिर रैबीज की चपेट में आने से भमोरा निवासी युवक की मौत हो गई। इधर, विभाग मौत के आंकड़े को छिपाने में जुटा रहा।

स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त जानकारी के मुताबिक भमोरा निवासी सूर्यकांत (40) को जनवरी में कुत्ते ने काटा था। फरवरी में रैबीज के लक्षण दिखने लगे थे पर परिजनों को इसकी जानकारी नहीं थी। वे मेडिकल स्टाेर से दवाएं ले रहे थे। बीते दिनों हालत बिगड़ी तो परिजन इलाज के लिए हायर सेंटर ले जाने लगे पर रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। मौत की सूचना मिलने पर स्वास्थ्य विभाग ने डेथ ऑडिट किया तो परिजन ने एआरवी नहीं लगने की जानकारी दी। इंटीग्रेटेड डिजीज सर्विलांस प्रोग्राम टीम मौत की सूचना पोर्टल पर भी अपडेट कर चुकी है। ब्यूरो
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