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Bareilly News: मासूमों को जकड़ रहा निमोनिया... 20 दिन में 62 मिले पीड़ित, पांच हायर सेंटर रेफर
Tue, 20 Oct 2026 01:09 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली
Updated Tue, 20 Oct 2026 01:09 AM IST
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बरेली। मौसम में बढ़ती ठंड का असर अब नौनिहालों की सेहत पर दिखने लगा है। छोटे बच्चे सर्दी, खांसी और बुखार की चपेट में आ रहे हैं। जिला अस्पताल के बच्चा वार्ड में बीते 20 दिनों में 62 बच्चे निमोनिया की चपेट में मिल चुके हैं। इनमें से पांच को हायर सेंटर रेफर किया गया है।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप के अनुसार, बदलते मौसम में बच्चों की देखभाल में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। अभिभावक बच्चों को सामान्य कपड़ों में रखते हैं, जबकि सुबह और रात में ठंड पड़ रही है। बाल रोग विभाग की ओपीडी में रोज 100 से 120 बच्चे आते हैं। इनमें 10-12 में निमोनिया के लक्षण होते हैं। बच्चा वार्ड में बीते 20 दिनों से रोज निमोनिया से पीड़ित तीन-चार बच्चे भर्ती किए जा रहे हैं।
ये लक्षण दिखें तो लें डॉक्टर की सलाह
- तेज बुखार और लगातार खांसी आना।
- सांस लेने की गति तेज होना या सांस लेने में कठिनाई होना।
- चिड़चिड़ापन, सुस्ती और दूध पीने या भोजन करने से मना करना।
- सांस लेते समय घरघराहट या सीने से आवाज आना।
वर्जन
मौसम में बदलाव के चलते बच्चे निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। हालांकि, बच्चों के इलाज के लिए वार्ड में पर्याप्त दवाएं और संसाधन मौजूद हैं। परिजनों को साफ सफाई के साथ ही बच्चों को ठंड से बचाना चाहिए। - डा. आरसी दीक्षित, एडीएसआईसी
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जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप के अनुसार, बदलते मौसम में बच्चों की देखभाल में विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। अभिभावक बच्चों को सामान्य कपड़ों में रखते हैं, जबकि सुबह और रात में ठंड पड़ रही है। बाल रोग विभाग की ओपीडी में रोज 100 से 120 बच्चे आते हैं। इनमें 10-12 में निमोनिया के लक्षण होते हैं। बच्चा वार्ड में बीते 20 दिनों से रोज निमोनिया से पीड़ित तीन-चार बच्चे भर्ती किए जा रहे हैं।
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ये लक्षण दिखें तो लें डॉक्टर की सलाह
- तेज बुखार और लगातार खांसी आना।
- सांस लेने की गति तेज होना या सांस लेने में कठिनाई होना।
- चिड़चिड़ापन, सुस्ती और दूध पीने या भोजन करने से मना करना।
- सांस लेते समय घरघराहट या सीने से आवाज आना।
वर्जन
मौसम में बदलाव के चलते बच्चे निमोनिया की चपेट में आ रहे हैं। हालांकि, बच्चों के इलाज के लिए वार्ड में पर्याप्त दवाएं और संसाधन मौजूद हैं। परिजनों को साफ सफाई के साथ ही बच्चों को ठंड से बचाना चाहिए। - डा. आरसी दीक्षित, एडीएसआईसी
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