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Bareilly News: आभा आईडी से जुड़ेंगे मरीजों के पर्चे और जांच रिपोर्ट
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जिला अस्पताल में बनाई गई पर्चें बनाने के लिए तीसरी खिड़की। संवाद
बदायूं। जिला अस्पताल में मरीजों के पर्चे और जांच रिपोर्ट को अब आभा आईडी से जोड़ा जाएगा। इससे न सिर्फ उनका पूरा मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रहेगा वहीं जरुरत पड़ने पर केस हिस्ट्री सामने रहने से उन्हें और बेहतर इलाज मिल सकेगा। वहीं मरीजों की सुविधा के मद्देनजर अब ओपीडी के पर्चे तीन खिड़कियों पर बनवाए जा सकेंगे।
जिला अस्पताल में आभा आईडी बनाने के लिए अलग से काउंटर भी संचालित किया जा रहा है। यहां मरीज अपनी आईडी बनवाकर उसे पर्चे और जांच रिपोर्ट से लिंक करवा सकते हैं। इससे डॉक्टरों को मरीज की पिछली बीमारियों, दवाओं और जांच रिपोर्ट की पूरी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध हो सकेगी। इससे इलाज अधिक सटीक और प्रभावी होगा।
जिला अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पर्चा बनाने की मौजूदा व्यवस्था में सुधार किया गया है। पहले दो खिड़कियों पर पर्चे बनाए जाते थे, लेकिन रोजाना करीब एक हजार की ओपीडी होने के कारण मरीजों को लंबी कतारों का सामना करना पड़ता था। अब इस समस्या को देखते हुए एक तीसरी खिड़की शुरू की गई है। इससे मरीजों और तीमारदारों को राहत मिलेगी, वहीं पर्चा बनवाने की प्रक्रिया तेज होगी।
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पुराने पर्चे रखने की नहीं होगी जरूरत
नई व्यवस्था के तहत मरीजों का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखा जाएगा। आभा आईडी से जुड़ने के बाद मरीज की जांच रिपोर्ट, दवाएं और इलाज का इतिहास एक ही जगह उपलब्ध रहेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि मरीज को हर बार पुराने कागज साथ रखने की जरूरत नहीं होगी। जरूरत पड़ने पर देश के किसी भी अस्पताल में डॉक्टर इस डेटा को देखकर तुरंत सही उपचार शुरू कर सकेंगे, जिससे समय की बचत और इलाज की गुणवत्ता दोनों बेहतर होंगी।
लंबी लाइन से मिलेगी राहत
जिला अस्पताल में रोजाना बढ़ती ओपीडी के कारण पर्चा बनवाने में मरीजों को काफी परेशानी होती थी। पहले केवल दो खिड़कियों पर पर्चे बनाए जाते थे, जिससे लंबी कतार लग जाती थी। अब अस्पताल प्रशासन ने तीसरी खिड़की शुरू कर दी है, जिससे पर्चा बनाने की प्रक्रिया तेज होगी। साथ ही आभा आईडी बनाने के लिए अलग काउंटर होने से भीड़ का दबाव कम होगा। इस व्यवस्था से मरीजों और तीमारदारों को सुविधा मिलेगी और अस्पताल की व्यवस्था अधिक व्यवस्थित व सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी।
मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। इसके लिए एक अतिरिक्त खिड़की की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा आभा आई से मरीजों की जांच रिपोर्ट लिंक की जाएगी, जिससे भविष्य में इलाज कराने पर उन्हें पुराना पर्चा सुरक्षित रखने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। -अमित वार्ष्णेय, सीएमएस, जिला अस्पताल
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जिला अस्पताल में आभा आईडी बनाने के लिए अलग से काउंटर भी संचालित किया जा रहा है। यहां मरीज अपनी आईडी बनवाकर उसे पर्चे और जांच रिपोर्ट से लिंक करवा सकते हैं। इससे डॉक्टरों को मरीज की पिछली बीमारियों, दवाओं और जांच रिपोर्ट की पूरी जानकारी एक ही जगह उपलब्ध हो सकेगी। इससे इलाज अधिक सटीक और प्रभावी होगा।
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जिला अस्पताल प्रशासन के अनुसार, पर्चा बनाने की मौजूदा व्यवस्था में सुधार किया गया है। पहले दो खिड़कियों पर पर्चे बनाए जाते थे, लेकिन रोजाना करीब एक हजार की ओपीडी होने के कारण मरीजों को लंबी कतारों का सामना करना पड़ता था। अब इस समस्या को देखते हुए एक तीसरी खिड़की शुरू की गई है। इससे मरीजों और तीमारदारों को राहत मिलेगी, वहीं पर्चा बनवाने की प्रक्रिया तेज होगी।
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पुराने पर्चे रखने की नहीं होगी जरूरत
नई व्यवस्था के तहत मरीजों का पूरा मेडिकल रिकॉर्ड डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रखा जाएगा। आभा आईडी से जुड़ने के बाद मरीज की जांच रिपोर्ट, दवाएं और इलाज का इतिहास एक ही जगह उपलब्ध रहेगा। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि मरीज को हर बार पुराने कागज साथ रखने की जरूरत नहीं होगी। जरूरत पड़ने पर देश के किसी भी अस्पताल में डॉक्टर इस डेटा को देखकर तुरंत सही उपचार शुरू कर सकेंगे, जिससे समय की बचत और इलाज की गुणवत्ता दोनों बेहतर होंगी।
लंबी लाइन से मिलेगी राहत
जिला अस्पताल में रोजाना बढ़ती ओपीडी के कारण पर्चा बनवाने में मरीजों को काफी परेशानी होती थी। पहले केवल दो खिड़कियों पर पर्चे बनाए जाते थे, जिससे लंबी कतार लग जाती थी। अब अस्पताल प्रशासन ने तीसरी खिड़की शुरू कर दी है, जिससे पर्चा बनाने की प्रक्रिया तेज होगी। साथ ही आभा आईडी बनाने के लिए अलग काउंटर होने से भीड़ का दबाव कम होगा। इस व्यवस्था से मरीजों और तीमारदारों को सुविधा मिलेगी और अस्पताल की व्यवस्था अधिक व्यवस्थित व सुचारु रूप से संचालित हो सकेगी।
मरीजों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। इसके लिए एक अतिरिक्त खिड़की की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा आभा आई से मरीजों की जांच रिपोर्ट लिंक की जाएगी, जिससे भविष्य में इलाज कराने पर उन्हें पुराना पर्चा सुरक्षित रखने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। -अमित वार्ष्णेय, सीएमएस, जिला अस्पताल