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संगीत किसी से भेदभाव नहीं करता : आदित्य कल्याणपुर
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आदित्य कल्याणपुर
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
तबला वादक आदित्य ने विदेशी कलाकारों के साथ मिलकर तैयार की है एलबम
बरेली। प्रसिद्ध तबला वादक आदित्य कल्याणपुर इस समय संगीत की बुलंदियों पर हैं। उनका कहना है कि संगीत एक ऐसी विधा है जो पूरे विश्व को जोड़ने की ताकत रखती है। इसमें कोई बैरियर नहीं है। न भाषा का और न धर्म, क्षेत्र का। संगीत सबको एक धागे में पिरोने का काम करता है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती है।
तबला वादक उस्ताद आदित्य यहां खानकाह नियाजिया में हाजिरी देने आए थे। इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने संगीत को लेकर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि फिलहाल एक एलबम तैयार किया है। इसमें ग्रैमी अवॉर्ड से सम्मानित इजराइल के ओपेरा सिंगर हिला प्लेमन, अमेरिका के गिटार वादक शैवेल्स और बेस के लिए टर्की के अहमद ने सहयोग किया है। शायद यह पहला मौका होगा कि इस तरह के एलबम में शास्त्रीय संगीत का समावेश उनके तबला वादन से हुआ है। आमतौर पर विदेशी संगीत में तबले का इस्तेमाल नहीं होता है।
यह पूछने पर कि वह अपनी शोहरत को चाय के विज्ञापन से जोड़ते हैं या अपनी मेहनत को इसका श्रेय देते हैं। इस पर उनका कहना था कि खुदा की ब्लेसिंग सब पर होती है। उस्ताद और बुजुर्गों का आशीर्वाद भी उन्हें मिला है। उस विज्ञापन से उन्हें रिकॉग्नाइज जरूर किया गया। हालांकि उस वक्त बहुत छोटे थे, तब यह नहीं समझ सके कि लोगों का आशीर्वाद उनके साथ है या नसीब। बोले- उस्ताद अल्लाह रक्खा खां और उस्ताद जाकिर हुसैन खां, दोनों ही उनके उस्ताद हैं। 11 साल की उम्र में वह उनके गंडाबंद शागिर्द हो गए थे। अभी वह अमेरिका में सेलम स्टेट यूनिवर्सिटी में तबला वादन सिखाते हैं। परिवार का संगीत से कभी कोई वास्ता नहीं रहा। पिता चैतन्य इंजीनियर थे और मां शामल कंप्यूटर एक्सपर्ट। वह खुद ही संगीत की तरफ आकर्षित हुए और फिर आगे बढ़ते चले गए।
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बरेली। प्रसिद्ध तबला वादक आदित्य कल्याणपुर इस समय संगीत की बुलंदियों पर हैं। उनका कहना है कि संगीत एक ऐसी विधा है जो पूरे विश्व को जोड़ने की ताकत रखती है। इसमें कोई बैरियर नहीं है। न भाषा का और न धर्म, क्षेत्र का। संगीत सबको एक धागे में पिरोने का काम करता है। यही इसकी सबसे बड़ी खूबसूरती है।
तबला वादक उस्ताद आदित्य यहां खानकाह नियाजिया में हाजिरी देने आए थे। इस दौरान मीडिया से बातचीत में उन्होंने संगीत को लेकर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि फिलहाल एक एलबम तैयार किया है। इसमें ग्रैमी अवॉर्ड से सम्मानित इजराइल के ओपेरा सिंगर हिला प्लेमन, अमेरिका के गिटार वादक शैवेल्स और बेस के लिए टर्की के अहमद ने सहयोग किया है। शायद यह पहला मौका होगा कि इस तरह के एलबम में शास्त्रीय संगीत का समावेश उनके तबला वादन से हुआ है। आमतौर पर विदेशी संगीत में तबले का इस्तेमाल नहीं होता है।
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यह पूछने पर कि वह अपनी शोहरत को चाय के विज्ञापन से जोड़ते हैं या अपनी मेहनत को इसका श्रेय देते हैं। इस पर उनका कहना था कि खुदा की ब्लेसिंग सब पर होती है। उस्ताद और बुजुर्गों का आशीर्वाद भी उन्हें मिला है। उस विज्ञापन से उन्हें रिकॉग्नाइज जरूर किया गया। हालांकि उस वक्त बहुत छोटे थे, तब यह नहीं समझ सके कि लोगों का आशीर्वाद उनके साथ है या नसीब। बोले- उस्ताद अल्लाह रक्खा खां और उस्ताद जाकिर हुसैन खां, दोनों ही उनके उस्ताद हैं। 11 साल की उम्र में वह उनके गंडाबंद शागिर्द हो गए थे। अभी वह अमेरिका में सेलम स्टेट यूनिवर्सिटी में तबला वादन सिखाते हैं। परिवार का संगीत से कभी कोई वास्ता नहीं रहा। पिता चैतन्य इंजीनियर थे और मां शामल कंप्यूटर एक्सपर्ट। वह खुद ही संगीत की तरफ आकर्षित हुए और फिर आगे बढ़ते चले गए।
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